राजा विदुर ने बताए हैं एक सफल और बुद्धिमान इंसान के 5 गुण- विदुर नीति

भारतीय सनातन परंपरा मे कई सारी नीति और आदर्श पिटिका के बारे मे बताया गया है जिनमे चाणक्य और विदुर नीति बहुत ही प्रसिद्ध है। ये नीति सूत्र हमे जीवन यापन के सही मार्ग के बारे मे बताते है और इन नीतियों के पालन कर के हम अपने जीवन के सभी लाभों को प्राप्त कर सकते हैं।

आज के इस लेख मे हम बात करेंगे विदुर नीति के उन अंशों के बारे मे जिसके अनुसार एक बुद्धिमान एवं सफल इंसान मे कौन से गुण विद्यमान होते है। तो चलिये हम जानते है उन नीतियों के बारे मे।

1- लक्ष्य की स्थिरता- राजा विदुर के अनुसार एक व्यक्ति के सफल और बुद्धिमान होने का पता उसके विचारों से पता चलता व्यक्ति जैसा भी सोचता है या विचार करता है उसका निर्माण भी उसी प्रकार से होता है। एक सफल व्यक्ति हमेशा अपने लक्ष्य के सकारात्मक पहलुओं के बारे मे सोचता है और उस लक्ष्य की प्राप्ति के बारे मे ही विचार करता रहता है और जिससे उसे उसकी प्राप्ति होती है।

वहीं जो अपने लक्ष्य के नकारात्मक पहलुओं के बारे मे सोचता रहता है और उसक लक्ष्य की प्राप्ति मे मिलने वाले अड़चनों को लेकर विचार करता है और उससे भयभीत होता रहता है उसे सफल होने मे कोई भी सहयोग नहीं कर सकता है।

2- संगति- राजा विदुर का मानना है कि हमारी सफलता और हमारी बुद्धिमता का निर्धारण हमारी संगति से भी पता चलता है। जहां एक सफल इंसान के मित्र मंडली और उनके सहयोगी इत्यादि या फिर वो अपने समय का सदुपयोग गुणवान एवं प्रतिभाशाली लोगो के साथ करता है। जो कि उसके लक्ष्य प्राप्ति एवं सफलता प्राप्ति मे उसका सहयोग करते है।

वहीं दूसरी तरफ एक असफल व्यक्ति के असफलता का एक प्रमुख कारण उसकी गलत संगति होती है जिसमे वो दुराचारी और नकारात्मक लोगो के संगति मे रहता है और जिससे उसके लक्ष्य प्राप्ति मे अडचने मिलती है और और ऐसी संगति के कारण उसमे कर्तव्यनिष्ठा की भी कमी हो जाती है।

3- ग्रहण करने की आदत- विदुर जी कहते है एक व्यक्ति कितना भी सफल या फिर बुद्धिमान भले ही हो उसमे ग्रहण करने की आदत हमेशा ही बनी रहती है। ग्रहण करने से तात्पर्य वो हमेशा नवीन ज्ञान को ग्रहण करने मे कभी भी परहेज नहीं करता किसी भी देश काल परिस्थिति हो या कैसा भी व्यक्ति विशेष हो अगर उससे कोई ज्ञान बात जानने को मिलता है तो उसे अवश्य ही ग्रहण करेगा।

वहीं एक असफल व्यक्ति थोड़ा बहुत ज्ञान होने मात्र से अभिमानी हो जाएगा और किसी की बात सुनने को तैयार नहीं होइएगा केवल अपने ज्ञान को सर्वश्रेष्ठ और सर्वमान्य मानेगा और यही अवगुण उसे असफल बनाता है।

4- सोच विचार से काम करना- एक सफल इंसान कोई भी काम करने से पहले बहुत ही सोच विचार कर काम करता है। उसके किसी काम से किसी कोई हानी या लाभ होगा या फिर उसके किसी कृत्य से किसी को कोई क्षति होगी इसका ध्यान वो हमेशा रखेगा।
अगर किसी अन्य के किसी व्यवहार से उसे बुरा महसूस होता है तो बुद्धिमान व्यक्ति ऐसा व्यवहार किसी अन्य के साथ भी नहीं करेगा। उसके सारे कार्य बहुत ही सोच विचार के बाद ही अग्रेषित होते है।

5- अति विश्वास से बच कर रहना- एक बुद्धिमान और सफल इंसान किसी भी नया पर आँख मूँद कर विश्वास करने से परहेज करता है। जिन्हे वो अविश्वासी मानता है उन पर तो वो कभी भी विश्वास नहीं करता बल्कि जो उसके जीवन मे विश्वासपात्र भी होते है उन पर भी आँख मूँद कर विश्वास करने से बचता है।
वही एक असफल और मूर्ख इंसान किसी पर भी बड़ी आसानी से आँख मूँद कर विश्वास कर लेता है। एक असफल व्यक्ति किसी की भी मीठी मीठी बातों मे बड़ी आसानी से आ जाता है। और अपनी हानि करा लेता है।

उपरोक्त पाँच नीतियाँ जो महाराज विदुर ने बताई है जिनके आधार पर हम एक सफल और बुद्धिमान इंसान की पहचान कर सकते हैं। यहाँ राजा विदुर ने सफल और बुद्धिमान दोनों ही तरह के इंसान की पहचान के लिए एक ही प्रकार के गुणों का वर्णन किया जिसके द्वारा वो बताना चाह रहे हैं कि एक सफल इंसान बुद्धिमान होगा ही और उसकी बुद्धिमता का निर्णय इनके गुणों के विद्यमान रहने से ही होगी और ये गुण अगर उसमे है तो वो जीवन मे सफल भी अवश्य होगा।

तो दोस्तों आज का ये लेख आप लोगो को कैसे लगा हमे अवश्य बताए और हमसे जुड़े रहे धर्म, नीति और दर्शन इत्यादि के विषयों पर और ऐसे रोचक और किस्से कहानियों से भरे लेख को पढ़ने के लिए।
धन्यवाद!

||इति शुभम्य||

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