जन जन को राम नाम सुलभ कराया महाकवि तुलसीदास ने- जयंती विशेष

जन जन के मन मस्तिष्क मे राम की कथा कंठस्थ है और अगर बोला जाये इसका प्रमुख कारण महाकवि तुलसीदास (Tulsidas) है तो ये कोई अतिस्योक्ति नहीं होगा। आज श्रावण मास के शुक्ल पक्ष के सप्तमी तिथि को जन कवि तुलसीदास बाबा का जयंती है। तुलसी दास ने अपनी महान रचना रामचरितमानस के जरिये जन जन को राम कथा उनके दिलो दिमाग मे ऐसा उतार दिया कि हर किसी को रामायण की कथा मालूम है। राम चरितमानस के अलावा भी कई महान कृतियाँ तुलसीदास जी ने लिखी है जो जन मानस मे प्रसिद्ध है। तो आज हम बात करेंगे गोस्वामी तुलसी दास की उनके जयंती के उपलक्ष्य मे कि किस प्रकार एक साधारण व्यक्ति महान कवि और राम भक्त बना और मुगल काल मे भी जन मानस के घर घर मे अपनी कृति उपलब्ध कारवाई।

तुलसीदास का आरंभिक जीवन-गोस्वामी तुलसीदास का जन्म कहाँ हुआ इसकी बात करना सही नहीं होगा। आज भी लोगो मे मतभेद है। पैदा होने के कुछ दिन बाद ही इनकी माता का स्वर्गवास हो गया। इनके जन्म के उपरांत इन्होने राम नाम बोला था इसीलिए इनका नाम रामबोला पढ़ गया। शुरुवाती जीवन सामान्य व्यक्ति के अनुरूप जिया। जीवन मे बहुत सारे दुख होने के कारण कुछ लोग इन्हे अभागा भी मानते थे। पर ऐसा कुछ हुआ जिसके कारण ये कलयुग के सबसे बड़े राम भक्त बने एक महान कवि बने और जन भाषा मे राम के चरित्र का बखान किया।

जीवन मे परिवर्तन- एक समय की बात है तुलसीदास जी की पत्नी अपने मायके गई हुई थी बरसात का मौसम था। और तुलसीदास घनघोर बारिश मे अपनी पत्नी से मिलने केलिए सारी कठिनाइयों को पार करते हुए उनके ससुराल पहुँच गए। उनकी पत्नी ने देखा कि किस प्रकार मेरे आसक्ति के कारण सभी कठिनाइयों का परवाह किए बगैर यहाँ पहुँच गए। इसपर उनकी पत्नी ने उन्हे बोला कि जितनी आसक्ति तुम्हें मेरे इस हाड़ मांस के शरीर से है उतनी आसक्ति अगर तुम्हें ईश्वर से होती तो ज्यादा अच्छा होता। और इसी बात पर तुलसी का हृदय परिवर्तन हुआ और आगे चलकर वो जन मानस के सबसे प्रसिद्ध कवि और महान राम भक्त बने।

मानस रचना की यात्रा- उपरोक्त प्रसंग के उपरांत तुलसीदास जी ने गृह त्याग कर दिया और कई तीरथों का भ्रमण किया। और भ्रमण करते हुए काशी पहुंचे। वहाँ इनकी मुलाक़ात एक भूत से हुई और उसने इन्हे बताया की श्री हनुमान जी इन्हे कहा मिलेंगे और हनुमान जी के द्वारा उन्हे प्रभु श्री राम के दर्शन का लाभ मिला और इन्होने मानस रचना की शुरुवात की। और दो वर्ष, सात माह, छब्बीस दिन मे रचना पूर्ण हुई।

रामचरित मानस को शिव का प्रमाणीकरण- रामचरित मानस की रचना कर लेने मात्र से ही सब कुछ मान्य नहीं था। क्योंकि राम चरित मानस की रचना काशी मे हुई थी साथ ही साथ इसकी भाषा सामान्य बोल चाल की भाषा और मूलतः अवधि मे थी। अब काशी विद्वानो का क्षेत्र है तो फिर कैसे एक एक ग्रंथ को मान्य करे जिसकी रचना संस्कृत भाषा मे नहीं है। बल्कि सामान्य बोल चाल की भाषा मे है। इस पर वहाँ के विद्वान जन सभी प्रमुख ग्रंथो के नीचे रामचरित मानस को श्री काशी विश्वनाथ मंदिर मे रख देते है और मंदिर के कपाट रात भर के लिए बंद कर दिये जाते है।
सुबह जब मंदिर के कपाट खुलते है तो मानस की प्रति सबसे ऊपर पायी गई और उस प्रति पर सत्यम, शिवम, सुंदरम का अंकन पाया गया जो कि स्वयं शिव का प्रमाणीकरण था।

जन जन को राम नाम का साक्षात्कार कराया- रामचरित मानस की सबसे बड़ी खूबी ये है कि इसने जन जन को राम के बारे मे साक्षात्कार सुलभ कराया। रामायण ग्रंथ संस्कृत भाषा मे लिखित है जो कि जन मानस की भाषा मे नहीं अहि उसके लिए अच्छे व्याकरण की जानकारी होना अति आवश्यक है लेकिन रामचरित मानस के निर्माण के उपरांत इसकी साधारण और सरल काव्य रूपांतरित चौपाई और दोहे ने सभी को राम के चरित्र का आत्म साक्षात्कार बड़ी आसानी से कराया। मान्यता है कि राम चरित मानस मे सभी भाषाओं का समावेश है सभी भाषाओं के कुछ कुछ शब्दों का प्रयोग इस महाग्रंथ मे हुआ है। मूलतः अवधि का प्रयोग किया गया है जो कि हिन्दी भाषा से ही उत्पन्न हुई है। सभी हिन्दी भाषी के लिए समझना बहुत ही आसान है।

तुलसीदास की अन्य कृतियाँ- रामचरित मानस के अलावा अन्य कई कृतियों का निर्माण तुलसीदास जी ने किया था। जिनमे प्रमुख हनुमान चालीसा, हनुमानष्टक, बजरंग बाण, विनय पत्रिका इत्यादि बहुत सारे प्रसिद्ध कृतियाँ है। लगभग सभी कृतियाँ बहुत ही आसान और सरल भाषा मे रचित है और इसी सरलता के कारां ये जन जन मे बहुत ही प्रसिद्ध है। इन्होने अपनी रचनाओं के जरिये ईश वंदना का स्वरूप ही परिवर्तित कर दिया जिस कठिन संसस्कृत भाषा का प्रयोग करना बहुत ही कठिन होता था उसे समनाया भ्श मे बनाकर इन्होने बहुधा लोगो को लाभ पहुंचाया है।

निष्कर्ष-

पंद्रह सै चौवन विषै,कालिंदी के तीर,
सावन शुक्ला सप्तमी,तुलसी धरेउ शरीर।

प्रस्तुत चौपाई मे गोस्वामी तुलसीदास के जन्म का वर्णन है। कैसे एक सामान्य से व्यक्ति के मानस मे प्रभु के प्रति आसक्ति उत्पन्न होती है और वो अपना हृदय परिवर्तन के साथ साथ जन मानस को भी भक्ति का मार्ग दिखते है। एक महान कवि जिसके लिए हिन्दी के महान आलोचक आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने स्वयं कहा ये जन के कवि थे इन्होने अपनी रचनाओ से सामान्य जन को जोड़ा। भक्ति के सही विस्तार मे इनके योगदान को कभी भी माना किया जा सकता है। तो आज वो पावन तिथि है जिस दिन गोस्वामी तुलसीदास का जन्म हुआ था। जिन्होंने हम सभी को राम का साक्षात्कार कराया। घर घर मे राम नाम को प्रसारित किया। हर घर मे आज रामचरित मानस और हनुमान चालीसा जैसी रचनाए सुलभ है। और लोगो को उनके प्रति श्रद्धा और भक्ति के विस्तार मे सहयोग किया। आइये हम आज याद करे गोस्वामी तुलसीदास को और उन्हे धन्यवाद करे कि उनके कारण हर घर मे राम के जीवन गाथा का विस्तार हुआ।

||इति शुभम्य||

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