तुलसीदास की रचना और हनुमान जी की कृपा आपका भाग्य बदल सकती है

हम सभी जानते है देश के और सनातन समाज के मन मे तुलसीदास जी ने अपनी रचनाओं के जरिये जो भक्ति भाव का उद्भव किया है वो कोई और नहीं कर सकता है। स्वयं आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने भी भक्ति आंदोलन मे तुलसीदास जी की महिमा का जो वर्णन अपने लेखों के जरिये किया है ये उसका उदाहरण है।

आज हम भी बात करेंगे तुलसीदास की उन रचनाओं का जिनके कारण आम जनमानस मे भक्ति का भाव वैष्णव अनुयायी के मध्य उत्पन्न हुआ और इन रचनाओं के जरिये आप अपने दिन, भाग्य इत्यादि मे भी परिवर्तन कर सकते है। तो शुरू करते है इस लेख के मुख्य उद्द्येश्य की बातों को।

हनुमान चालीसा-

हनुमान चालीसा तुलसीदास जी की महान रचनाओं मे से एक है। सरल और सटीक भाषा मे हनुमान जी के समस्त प्रसंगों का संग्रह इस रचना के द्वारा प्राप्त होता है कहते है कि यदि हनुमान चालीसा के चौपाइयों का सुमिरन बहुत ही मन से किया जाये तो हमारी समस्त मनोकामना पूरी हो सकती है।

यदि हनुमान चालीसा का चालीस बार सुमिरन पूरी श्रद्धा भाव से किया जाये तो हमारी समस्त मनोकामना की पूर्ति स्वयं भगवान हनुमान जी हमारी सहायता करते है। कहते है जिनके कुंडली मे शनि ग्रह का दुष्प्रभाव देखने को मिलता है तो हनुमान चालीसा के स्मरण मात्र से ही हम इससे मुक्ति प्राप्त कर सकते है।

हनुमाष्टक-

अब हम बात करेंगे गोस्वामी तुलसीदास की अगली रचना हनुमाष्टक की इसके अनुसार यदि हम हनुमाष्टक का पाठ पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ करते है तो हमारे ज्वेवन के समस्त कष्टों का नाश हो जाता है।

हम एक सुव्यवस्थित जीवन का निर्वाह करते है हनुमाष्टक के नित्या पाठ से हमारे जीवन मे आने वाली बाधाएँ हमारे जीवन मे हमारा कुछ भी नहीं बिगाड सकती है।

सुंदर कांड-

अब बात करे सुदर कांड की तो इसके नाम से ही पता चलता है कि इसके पाठ मात्र से ही हमारे जीवन मे सब कुछ सुंदर अथवा सुभ की प्राप्ति होती है। सुंदर कांड के बारे मे बताया जाता है कि यदि मंगलवार और शनिवार को भी इस सुंदर कांड का पाठ किया जाये तो हमारे जीवन की समस्त परेशानियों का नाश स्वयं हनुमान जी करते है।

हमारे जीवन को सुफल बनाते है। सुंदर कांड को रामचरित मानस का सबसे गुणकारी कांड के रूप मे माना जाता है सात कांडों मे से इस कांड के पाठ मात्र से समस्त दुखों का नाश होता है। मान्यता है कि इस कांड मे ऐसे प्रसंगों का वर्णन है जिसके अनुसार सब कुछ अच्छा ही हुआ है।

जिसके अनुसार श्री हनुमान जी द्वारा माता सीता की खोज और लंका दहन इस प्रसंग मे हुआ है। और समुद्र पर सेतु के निर्माण हेतु भी इसी प्रसंग मे वर्णन है इस लिए इसे सुंदर कांड के रूप मे जाना जाता है इसीलिए इस प्रसंग का पाठ करने मात्र से ही समस्त दुखों का नस्श होता है।

हनुमान बाहुक-

अब हम बात करेंगे हनुमान बाहुक की मान्यता है कि एक बार गोस्वामी तुलसीदास के शरीर मे बहुत सारे फोड़े फुंसी हो जाते है और इनका दर्द बहुत ही असहनीय हो जाता है इसके उपाय के रूप मे तुलसीदास महाराज द्वारा हनुमाक बाहुक का निर्माण किया जाता है,

और इसके पाठ के उपरांत उनके दर्द और हुए व्याधि समाप्त हो जाते है इसलिए अगर हम हनुमान बाहुक का पाठ करते है तो हम शरीर की भौतिक व्याधियाँ हमारा कुछ भी बिगाढ़ नहीं सकती है।

बजरंग बाण-

जिस किसी मनुष्य के जीवन मे शत्रु का भाय बना रहता हो अथवा जिस किसी को अपने आस पास के लोगो से परेशानियों का सामना कर पड़ रहा हो उनके लिए तुलसीदास बाबा कृत बजरंग बाण बहुत ही उपयोगी साबित हो सकता है। जैसा कि इसके नाम से ही प्रतीत होता है।

बजरंग बाण शत्रु के नाश उसपर विजय प्राप्त करें के लिए बहुत ही उपयोगी है। प्रतिदिन यदि व्यक्ति अपने दिन की शुरुआत बजरंग बाण के पाठ के साथ शुरुआत करे तो दिन भर उसके जीवन मे आने वाली बढ़ाएँ उसका कुछ भी बाल बांका नहीं कर सकती है।

संपुट-

अब हम बात करेंगे संपुट की संपुट से तात्पर्य उन चौपाइयों से है जिंका प्रयोग हम किसी दोहे अथवा जाप इत्यादि के शुरुआत और अंत मे करते है। सनातन वैष्णव धर्म के अनुसार संपुट के प्रयोग से हम अपनी इच्छाओं की पूर्ति की कामना करते है।

और तुलसीदास कृत रामचरित मानस की चौपाइयों का प्रयोग संपुट के रूप मे करने से हम अपनी समस्त कामनाओं की पूर्ति कर सकते है। ऐसी बहुत सारी चौपाइयाँ है जिंका प्रयोग हम संपुट के रूप मे कर सकते है। आने वाले लेखों के जरिये हम एक लेख इन संपुट और उनकी उपयोगिता के बारे मे बताएँगे।

इनका प्रयोग आप सुंदर काण्ड के आठ के समय अथवा रामचरित मानस के पाठ के समाया प्रत्येक दोहे के शुरुआत और अंत मे प्रयोग करके उनका कई गुना ज्यादा फल प्राप्त कर सकते है। हर मनोकामना हेतु भिन्न भिन्न संपुट का प्रयोग किया जाता है।

निष्कर्ष

बाबा तुलसीदास ने रामचरित मानस और अन्य रचनाओं के जरिये जन मानस तक साधना को सुलभ कराया है। जन सामान्य की भाषा मे ईश्वर आरधना का जो सुगम मार्ग इन्होने प्रदान किया है ऐसा कार्य किसी के बस की बात नहीं थी।

तभी तो इनको जन मानस का कवि कहा जाता है। हनुमान जी कृपा प्राप्त करने हेतु न जाने कितने रचनाओं का निर्माण तुलसीदास जी ने किया है और मंत्रो की कठिनाई उनके उच्चारण मे होने वाली अशुद्धता जिससे हमे लाभ नहीं मिलता उससे मुक्ति दिलाई है।

सामान्य भाषा मे जन मानस को ये रचनाएँ एक वरदान के रूप मे प्राप्त हुई है। अगर कोई भी व्यक्ति पूरे सच्चे मन से और श्रद्धा एवं विश्वास के साथ इन रचनाओं का पाठ करता है और हनुमान जी को याद करते हुए अपनी इच्छा अथवा कठिनाइयाँ बतलाता है।

तो उस जातक का भला स्वयं भगवान हनुमान जी अवश्य ही करते है। तो आइये इन रचनाओ के लाभकारी फल का लाभ उठाए और अपने दैनिक जीवन मे इनका अनुशरण करें।

||इति शुभम्य||

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