आज की तकनीकी कैसे हमारे विचारों को सीमित कर सकती है।

technology and thoughts- Kissa Kahani

इस तकनीकी के संसार मे हमारे लिए किसी भी प्रकार की जानकारी समाचार इत्यादि प्राप्त करना बहुत आसान हो गया है कुछ वर्ष पहले जहां हमे किसी विषय के बारे मे कुछ जानने के लिए जहां ढेर सारी किताबें खंगालनी पढ़ती थी और कई पुस्तकालयों के चक्कर लगाने पढ़ते थे वही आज केवल एक क्लिक के जरिये किसी एक विषय पर लाखो उत्तर प्राप्त हो जाते है।

लेकिन जबसे तकनीकी उन्नत हुई है हमारे सूचना प्राप्त करने की शैली मे एक प्रकार का अतिक्रमण हुआ है। हम जिन विषय वस्तु की खोज करते है वही विषय वस्तु ही हमारे तकनीकी उपकरणो मे देखने को मिलते है, और इसके परिणाम स्वरूप हम सीमित रूप से सूचना से साक्षात्कार कर पाते है। चलिये इसे विस्तार से समझने का प्रयास करते है।

सबसे पहले हम उदाहरण लेते है किसी एक बहु चर्चित social media platform की जहां पर हम एक बार को अपने email अथवा फोन नंबर के जरिये login करते है और उनके द्वारा दिखाये जा रहे कुछ images या फिर videos अथवा किसी लेख को हम कुछ देर तक पढ़ते है अब वो social media को लगता है की हमे बस इतने ही विषयों पर ही जानकारी चाहिए, और वो फिर उससे संबन्धित विषय वस्तु की सामाग्री ही हमे उपलब्ध कराती है।

अब जब कभी हम अपने device पर या फिर किसी अन्य device पर अपने login id के जरिये उस social media platform पर प्रवेश करते है। तो वो पुनः उन्ही विषयो से संबन्धित, जिसे हमने पहले देखा था, सामाग्री प्रदान करती है।

अब यही बात अगर किसी search engine के साथ लागू किया जाए तो ये भी उसी प्रकार से होता है। जब भी हम अपने email या फिर किसी फोन नंबर लॉगिन के साथ किसी सर्च इंजिन मे कुछ भी search करते है तो धीरे धीरे हमारे सर्च करने की प्रक्रिया को देखते हुए सर्च इंजिन मे भी हमे उस प्रकार की सामाग्री परोसने लगता है।

हम कह सकते है कि तकनीकी के Artificial Intelligence और machine learning के कारण ये बहुत ही अच्छे सर्विस है जो हमारे interest को जान कर हमे उस प्रकार की सामाग्री प्रस्तुत करती है लेकिन ये तभी तक सही और उपयुक्त है जब तक हम किसी अच्छे विषय इत्यादि के बारे मे जानने का interest रखते है।

लेकिन जब हम किसी विचारधारा इत्यादि से संबन्धित सामाग्री इन ऑनलाइन platform पर देखते है तो बार बार इस तरह की सामाग्री प्रस्तुत होना हमे दूसरे पक्ष के बारे मे समझने मे कठिनाई प्रदान करती है।

इसका जीता जागता उदाहरण है राजनीति, पहले भी एक घर मे दोस्तों इत्यादि के मध्य भिन्न भिन्न राजनीतिक विचारधारा के प्रति लगाव रहता था लेकिन वो किसी एक विचार के प्रति अडिग और दूसरे की प्रति घृणा नहीं रखते थे क्योंकि उनके सामने दोनों ही पक्ष प्रस्तुत होते रहते थे।

लेकिन वही आज के बारे मे बात करे तो पाएंगे कि दो भिन्न प्रकार की राजनीतिक विचारधारा होने पर बहुत ही अच्छे दोस्त या फिर एक दूसरे के खास परिवारी जन अथवा रिश्तेदार द्वेष और क्लेश की भावना रखते है।

और इसका सबसे बड़ा कारण है हम जिस माध्यम से सूचना प्राप्त कर रहे है वहाँ केवल एक ही पक्ष के बारे मे अच्छी अच्छी बातें बताई जाती है। यहाँ तक तो ठीक है कि अच्छी अच्छी बाते बताए लेकिन इसके साथ ही दूसरे पक्ष के प्रति घृणा उत्पन्न की जाती है।

और तो और इस तकनीकी के विकास मे हम अब सही और गलत सूचना का निर्धारण करने मे भी कठिनाई पाते है। क्योंकि इतनी सूचनाए उपलब्ध है कि उनमे से कौन सी सूचना सही और कौन सी सूचना गलत है इसके लिए भी अलग से रिसर्च करना पड़ सकता है और उसके लिए आपको दोनों पक्षों को देखना पड़ेगा। किसी एक के प्रति ही आँख मूँद कर विश्वास कर लेना हमारे लिए घातक साबित हो सकता है।

और यही सभी परेशानियाँ हमे केवल राजनीतिक क्षेत्र मे ही नहीं बल्कि सभी क्षेत्रों मे देखने को मिल रही है। जिससे लोगो मे मध्य विद्वेष की भावना बढ़ती जा रही है। धर्म, जाति, रंग, क्षेत्र इत्यादि के आधार पर लोगो के मध्य भेद देखने को मिल रहा है।

लेकिन इस सबके पश्चात भी हम तकनीकी को गलत नहीं कह सकते यहाँ दोष सिर्फ और सिर्फ हमारा है हमे कोई भी विचारधारा हो उसके उलट पक्ष को देखना भी बहुत जरूरी है। जैसे पहले के समय मे debate प्रतियोगिता होती थी। जहां किसी विषय पर पक्ष और विपक्ष दोनों के मत सुनने को मिलते थे वैसे ही हमे भी तकनीकी के जरिये दोनों ही पक्षो के विचार जानने के बाद ही अपने स्वविवेक के आधार पर एक निश्चित परिणाम को ग्रहण करना चाहिए।

साथ ही इन तकनीकी माध्यमों के Artificial Intelligence तकनीकी मे भी कुछ ऐसे बदलाव आने चाहिए जिसमे किसी व्यक्ति के interest या फिर उत्सुकता के दोनों पक्षों से संबन्धित सूचना प्रदान की जाये। तभी मानव अपने इस प्रकृतिक स्वविवेक के आधार पर उनमे सही और गलत का निर्धारण कर सके।

!!इति शुभम्य!!

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