श्रावण मास में शिव आराधना से करें अपनी मनोकामना पूर्ति

shravan maas shiv aradhna- Kissa Kahani

वर्षा ऋतु मे श्रावण मास पूर्ण रूप से भगवान शिव को समर्पित है। सभी सनातन धर्मी बड़े ही हर्षोल्लास के साथ इस सम्पूर्ण महीने में भगवान भोले नाथ की आराधना पूजा अर्चना करते है।

देवाधिदेव शिव बहुत ही जल्दी प्रसन्न हो जाते है भक्त की समर्पण की भावना मात्र से इन्हे प्रसन्न किया जा सकता है। हम इन्हे वो चीजें अर्पित करते है जो कोई भी ग्रहण करने से मना कर दे समुद्र मंथन के समय भी जब हलाहल विश को ग्रहण करने की बात आई तो महादेव ने समस्त सृष्टि के लिए विश को ग्रहण किया।

आज इस लेख के जरिये हम आपको शिव की आराधना के बारे मे बताएँगे जिससे आप अपनी समस्त मनोकामनाएँ पूर्ण कर सकते है। शिव की कृपा जिस किसी पर हो गई उसका कोई भी अहित नहीं कर सकता है और उस जीव का समस्त जीवन धन्य और सुखमय हो जाता है।

जिस प्रकार श्रावण मास शिव आराधना को समर्पित होता है उस प्रकार से किसी विशेष आराधना की आवश्यकता नहीं होती है शिव को प्रसन्न करने के लिए। बल्कि सच्चे मन और श्रद्धा के साथ यदि हम भोले भण्डारी का नाम भी लेते है तो हमारी सम्पूर्ण पुजा सफल होती है। लेकिन फिर भी इस लौकिक संसार मे महत्वपूर्ण प्रयोजन के जरिये श्रावण मास मे शिव की आराधना की जाती है। जिसका उल्लेख इस लेख मे हम करेंगे।

सोमवार व्रत- श्रावण मास मे पड़ने वाले सोमवार के व्रत का बहुत ही अधिक महत्व होता है। सोमवार व्रत मुख्यतः कन्याएँ करती है जिससे उनको अच्छा वर मिलता है साथ ही सुहागिन औरतें भी सोमवार का व्रत करती हैं। जिससे उनका वैवाहिक जीवन सुखमय रहता है। इसके अलावा भी शिव के उपासक भी शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए सोमवार का व्रत करते है। सोमवार का व्रत दो तरह से होता है एक तो केवल श्रावण मास मे पड़ने वाले व्रत का पालन अथवा श्रावण मास से शुरू करके कुल 16 सोमवार तक व्रत रहने का नियम है।

सोमवार व्रत हो या फिर कोई ही व्रत सबमे ईश्वर के प्रति सच्ची श्रद्धा उनके प्रति भक्ति भाव का होना अति आवश्यक है। तभी कोई व्रत सफल मना जा सकता है।

कावड़ यात्रा- श्रावण मास मे कावड़ यात्रा का भी बहुत महत्व है। जिसमे किसी खास पवित्र नदी से जल को कावड़ मे भरकर पैदल यात्रा करते हुए किसी शिवलिंग पर जल चड़ाने का प्रावधान है। कावड़ यात्रा मुख्यतः बाबाधाम का प्रमुख है जो कि झारखंड के देवघर नमक स्थान पर बाबा बैद्यनाथ धाम के नाम से मशहूर है। इसके अलावा दक्षिण भारत मे भी कावड़ यात्रा होती जिसे बहुत ही कम लोग जानते है जहां कावेरी या अन्य पवित्र नदी का जल लेकर पवित्र पर्वत पर स्थित कार्तिकेय या फिर मुरूगन के मंदिर मे चड़ाया जाता है।

अभिषेक- महादेव को अभिषेक बहुत ही पसंद है खासकर श्रावण मास मे मान्यता है कि शिव का रुद्रभिषेक करने से इसका फल और भी अत्यधिक बढ़ जाता है। अभिषेक कई प्रकार के द्रव्यों के द्वारा होता है। जिसमे अपने सामर्थ्य अनुसार सम्पन्न कराया जाता है इसके अंतर्गत पूजन करने वाला व्यक्ति संकल्प लेने के उपरांत द्रव्य की एक अटूट धार से भगवान शिव की आराधना करता है जिसमे रुद्राष्टाध्यायी का वाचन पुरोहित लोग करते है। अभिषेक के द्रव्य के रूप मे जल, गन्ने का रस, दूध, घृत दधि इत्यादि का प्रयोग किया जाता है।

शिव आराधना का सही तरीका- यदि आप हमारे लेखों को पढ़ते है तो आप जानते होंगे हम हमेशा से किसी प्रकार की आराधना हेतु किसी विशिष्ट नियम को नहीं मानने की बात करते है। जो भी श्रद्धालु है बस उसके मन मे अपने इष्ट के प्रति सच्ची श्रद्धा और भक्ति भाव होना ही आवश्यक है।

और बात जब शिव आराधन की आती है तो शिव तो केवल अपने भक्त के भाव से ही प्रसन्न होते है। जैसे एक शिकारी ने अज्ञानता वश श्रावण मास मे शिवलिंग पर बेल पत्र फेंकता गया और शिव ने उससे प्रसन्न होकर उसे मुक्ति प्रदान की उसके समस्त पापों से उसे मुक्त कर दिया। या फिर बाबा बैद्यनाथ की बात करें जिनके अपने नियम पर अधिग होने के कारण उनको आज अमर कर दिया उनके नाम के पवित्र शिवलिंग पर लाखों लोग कावड़ लेकर जाते है।

शिव को भोले नाथ इसीलिए कहा जाता है। उनका भोलापन ही है कि वो अपने भक्तों के निष्कपट मन और उनके सच्ची भक्ति से ही प्रसन्न हो जाते है। श्रावण मास मे यदि एक सच्चा भक्त एक लोटा सुद्ध जल भी हमारे भोले बाबा को पूरे श्रद्धा और भक्ति से अर्पण करता है तो महादेव उसपर भी अपनी कृपा बनाए रखटे है।

श्रावण मास की सच्ची आराधना बस उसे ही कहा जा सकता है जहां आप सम्पूर्ण मास सच्चे मन से महादेव के भक्ति मे लीन रहे और जीवन पर्यंत सत्य, कर्तव्यनिष्ठा, लोगो के प्रति प्रेम इत्यादि का अनुशरण करे। यही सच्चा अर्पण है भोले बाबा के प्रति।

||सत्यम शिवम सुंदरम||

!!इति शुभम्य!!

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