सनातन और समाज- 2 महाभारत के कुछ किरदार और आज के समय मे उनसे लेने लायक सीख

sanatan aur samaj bhag 2- Kissa Kahani

दोस्तों आज सनातन और समाज के दूसरी कड़ी मे महाभारत के उन कुछ किरदारों की बात करेंगे जिनसे हम सीख लेकर अपने जीवन में अनुसरण कर सकते है। महाभारत एक वृहद कथा सागर है जहां हर दिन कुछ न कुछ हमे सीखने को मिलता है। अच्छे बुरे सभी तरह के किरदारों से भरा हुआ है आज उन्ही की चर्चा हम लोग करेंगे।

1- शांतनु- सर्व प्रथम हम बात करेंगे शांतनु की जिनके एक स्त्री के प्रति प्रेम के करण ही महाभारत की युद्ध की वजह मानी जा सकती है। सत्यवती से विवाह का प्रस्ताव रखना जो भविष्य मे राज पाट के उत्तराधिकार को लेकर चिंतित हो जिसके लिए राज्य के प्रति प्रेम द्वितीय प्राथमिकता हो उस स्त्री से राज्य का मोह ही कहीं न कहीं इस महाभारत युद्ध का एक करण माना जा सकता है।

2- भीष्म- कहा जाता है पूरे महाभारत के सभी किरदारों मे भीष्म से ज्यादा ज्ञानी कोई भी नहीं था उन्हे सभी विद्याओं मे महारत हासिल थी लेकिन इतना ज्ञानी होते हुए भी गलत का विरोध न करना सही नहीं मन जा सकता है अगर द्रौपदी के चीर हरण का विरोध किया होता या फिर परिवार के वरिष्ठ होने के नाते अपने नीतियों के आधार पर पांडवों को राज्य मे कुछ हिस्सा देने की बात राखी होती तो शायद महाभारत युद्ध नहीं हुआ होता।

3- पांडव- पांचों भी किसी न किसी विद्या मे महारती से साथ ही उनके अंदर बहुत सारे अच्छे गुण थे लेकिन चौपड़ की लत के करण उन्हे ये भी एहसास नहीं हुआ कि अपनी स्त्री को दांव पर लगाना नीति के खिलाफ है। उनकी इस लत के करण कहीं न कहीं महाभारत युद्ध शुरुआत की एक सूचक है।

4- द्रौपदी- द्रौपदी जिसे पांचाली भी कहते है उनके द्वारा एक व्यक्ति का उपहास करना किसी न किसी कारण से दुर्योधन के अंदर बदले की भावना को भड़काती है जिसके उपरांत महाभारत युद्ध की नीव जमी।

5- धृतराष्ट्र- एक पिता का कार्य होता है कि वो अपने संतान को सही गलत की राह का ज्ञान दे उनके गलत कार्यों पर उन्हे टोके लेकिन धृतराष्ट्र एक पिता के साथ साथ राजा होने के उपरांत भी अपने पुत्रों के गलत कार्यों पर कभी भी न ही रोक और न ही टोका जो कि आगे चल कर एक महायुद्ध का करण बना। पुत्र मोह के चक्कर मे उन्होंने अपने सभी संतानों को खो दिया।

6- शकुनि- शकुनि जो कि चाल की महारत रखता था लेकिन उसके कुटिल चालों के करण उसके ही भांजों का नाश कर दिया। उसकी बुद्धिमता का उसने गलत रास्ते पर प्रयोग किया कौरवों को हमेशा ही गलत सलाह देना जिसके कारण वो गलत रास्ते की ओर बढ़ते गए। किसी भी प्रकार से सही गलत का ध्यान रखे बगैर अपने भाँजो के राज पाट दिलाने के चक्कर मे उसने उनका सर्वनाश कर दिया।

7- गांधारी- गांधारी की अनकहे होने के बाद भी अपने पट्टी के अंधे पान के करण उन्होंने जीवन पर्यंत अपने आँखों पर पट्टी बांध कर रखा और इसी जिद के कारण उन्होंने भी अपने पुत्रों की गलतियों को नजरअंदाज कर दिया उनको अपनी सही आँखों का प्रयोग कर अपने बच्चों की गलतियों को देखने पर उनके टोकन चाहिए था और उन्हे अच्छी राह पर चलने की सीख देनी चाहिए थी लेकिन जिद के आगे उन्होंने अपनी पत्तियां कभी नहीं उतारी और कौरवों ने बिना किसी के विरोध के अपने दुर्व्यवहार के कारण महाभारत युद्ध का बिगुल बजाय।

महाभारत मे बहुत से ऐसे किरदार है जिनसे कुछ न कुछ सीखने को मिलता है। और हमारे बड़े बुजुर्ग हमेशा ये कहते है कि महाभारत हमे ये सिखाती है कि जीवन मे हमे क्या नहीं करना है। ऊपर बताए गए किरदारों के उनके व्यवहार और आचरण इत्यादि से हम ये सीख सकते है कि जीवन मे किन चीजों से हमे दूर रहना चाहिए और जैसे किसी चीज की लत जैसे पांडवों को चौपड़ की लत थी। या फिर सही सही गलत का ज्ञान होते हुए भी गलत का विरोध न करना जैसे भीष्म पितामह ने किया ऐसे व्यवहार और आचरण से हमे बच कर रहना चाहिए।

धृतराष्ट्र जो कि कौरवों के पिता होने के साथ साथ राज्य भी थे उन्होंने द्रौपदी के साथ बीच सभा मे हो रहे दुर्व्यवहार का विरोध नहीं किया और एक पिता होने के नाते अपने बच्चों को गलत कार्य पर टोका नहीं ऐसी आदतों से हमे बच कर रहना चाहिए।

तो दोस्तों कैसे लगा आज का हमारा सनातन और समाज की कड़ी आगे भी ये शृंखला जारी रहेगी और ये जानकारियाँ आपके आज के आधुनिक जीवन मे एक अच्छा इंसान बनने मे सहायक साबित होंगी तो जुड़े रहिए हमारे साथ साथ ही औरों को भी ये जानकारी शेयर करें जिससे उनको भी इसका लाभ मिल सके।

॥ इति शुभम॥

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