चिरंजीवी का क्या अर्थ है। और वो सात लोग जो आज भी है अमर।

immortality- Kissa Kahani

भारतीय सभ्यता मे जब भी हम अपने बड़ों का अभिवादन करते है तो उनमे से कुछ लोग हमे चिरंजीवी होने का आशीर्वाद देते है। तो फिर आखिर इसका अर्थ क्या है। चिरंजीवी शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है चिर और जीवी जिसका मतलब लंबे समय तक जीवन से है। और अगर देखा जाये तो इस आशीर्वाद का अर्थ अमरता से से है।

हमारी सनातन परंपरा मे अमरता की व्याख्या देखने को मिलती है। यानि जिन चीजों का अस्तित्व ना खत्म हो उन्हे अमर माना गया है। वहीं ये भी माना जाता है कि इस धरती पर जिसने भी जन्म लिया है उनकी मृत्यु निश्चित है। तो क्या सच मे क्या कुछ लोग है जो आज भी अमर है या फिर उन्हे अमरता का वरदान प्राप्त है।

तो इस प्रश्न का उत्तर है हाँ सनातन भारतीय संस्कृति मे 7 ऐसे लोगो का नाम आता है जिन्हे अमर माना जाता उन्हे अमरता का वरदान या श्राप मिला हुआ है। और इसका साक्ष्य हमारे धर्म ग्रन्थों मे भी देखने को मिलता है तो आइये चलिये देखते है कौन है वो 7 सात लोग जिन्हे अमर माना जाता है।

अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनुमांश्च बिभीषणः।
कृपः परशुरामश्चैव सप्तैते चिरंजीविनः॥

उपरोक्त श्लोक मे सात लोगो का नाम वर्णित है जिन्हे चिरंजीव अथवा अमर माना गया है तथा कुछ लोगो को तो इंका साक्षात्कार भी हुआ है।

अश्वत्थामा- महाभारत काल के, पांडवों और कौरवों को धनुर्विद्या और युद्ध कला सीखाने वाले महर्षि द्रोणाचार्य के पुत्र का नाम अश्वत्थामा है। और इन्हे उपरोक्त श्लोक के जरिये अमर माना गया है। कुछ लोगो की मान्यता है कि अश्वत्थामा के मस्तक मे एक मणि लगा हुआ था जिसके कारण वो अमर था वहीं कुछ लोगो का मानना है कि महाभारत युद्ध समाप्त होने के बाद बदला लेने के लिए अश्वत्थामा ने पांडवों के पाँच पुत्रों का सिर काट लिया जिसके उपरांत उसे श्राप मिला की उसकी मृत्यु नहीं होगी और आजीवन इसका प्रायश्चित करना होगा।

अगर कुछ किंवदंतियों की माने तो आज भी हिमालय की पहाड़ियों मे तमसा नदी के किनारे किसी गुफा मे आज भी अश्वत्थामा शिव की आराधना करने रोज सुबह आता है कुछ लोगो को तो उसके होने के साक्ष्य भी मिले है।

राजा बलि- असुरों के राजा बलि जो की महान विष्णु भक्त प्रहलाद के पोते है तथा महान दानी की श्रेणी मे भी आते है। जब देवताओं को लगा की राजा बलि के तप दान के कारण कहीं वो स्वर्ग का राज्य भी न प्राप्त कारले तो उन्होने भगवान विष्णु से सह्यता मांगी और भगवान विष्णु ने वामन स्वरूप धारण कर के राजा बलि से तीन पग मे सारे लोकों को दान स्वरूप प्राप्त कर लिया भगवान ने उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हे अमरता का वरदान दिया।

व्यास- महर्षि व्यास जिन्हे कृष्ण द्वैपायन के नाम से भी जाना जाता है, जो कि महाभारत जैसे महाकाव्य की रचना भी की। उन्हे भी अमरता का वरदान प्राप्त है। सनातन परंपरा मे व्यास की उपाधि उन लोगो को दी जाती है जो हमे पौराणिक ज्ञान की व्याख्या करते है। और महर्षि व्यास भी उन्ही मे से एक है। इन्हे ब्रह्म वाक्य वेद के श्रेणी बद्ध निर्माण कर्ता के रूप मे भी जाना जाता है।

हनुमान- रामभक्त हनुमान जो भगवान शिव अथवा रुद्र के ग्यारहवे अवतार के रूप मे भी जाने जानते है जब माता सीता की खोज मे भगवान हनुमान लंका गए और माता सीता को भगवान राम का संदेश दिया और लंका दहन किया तो स्वयं माता सीता ने हनुमान जी को अमरता का वरदान दिया। और इसके साक्ष्य हनुमान भक्तों को मिलता रहता है। स्वयं बाबा तुलसीदास को कलियुग मे रामभक्त हनुमान जी के दर्शन प्राप्त हुए और उन्ही की कृपा से उन्होने रामचरित मानस जैसे महाकाव्य की रचना की।

विभीषण- रावण के भाई और लंका के अंतिम राजा महाराज विभीषण को भी अमर होने का वरदान प्राप्त है। भगवद भक्ति और सत्य का साथ देने के लिए अपनो से वैर किया और श्री राम की भक्ति मे अपनी संपूर्णता देने के कारण महाराज विभीषण को अमरता का वरदान प्राप्त हुआ।

कृपाचार्य- महाभारत काल मे इन्हे अश्वत्थामा के मामा और कौरवों के गुरु के रूप मे जाना जाता है। महाभारत के युद्ध मे इनहोने कौरवों का साथ दिया था और सेनापति के रूप मे कौरवों की सेना का नियंत्रण का भर भी इनहोने संभाला मान्यता है कि अपने तप बल के जरिये इन्होने अमर होने शक्ति प्राप्त कर ली थी।

परशुराम- भगवान विष्णु के 6ठें अवतार और महान तपस्वी भगवान परशुराम को भी अमरता का वर प्राप्त था। मान्यता है कि अपने पिता से वर के रूप मे इन्हे ये अमरता प्राप्त हुई थी। और जनकपुरी मे धनुष भाग के समय त्रेता युग के बाद इन्हे द्वापरयुग मे महाभारत काल मे भी कई प्रसंगो मे देखा जाता है। जिनमे सबसे प्रमुख रूप से इनकी भीष्म पितामह से युद्ध का प्रसंग बहुत ही विख्यात है।

उपरोक्त सात लोगो को हमारे सनातन धर्म मे अमर प्राणी के रूप मे जाना जाता है। इनकी अमरता के बारे मे देखे तो ज्यादा तर अपने ईश भक्ति और अच्छे तप बल के आधार पर ही इन्होने अमरता का वर प्राप्त किया है। वैसे तो मान्यता है इस धरती पर जन्म लेने वाला हर व्यक्ति को अपना शरीर त्याग कर मृत्यु को प्राप्त करना ही होता है। लेकिन इन सात लोगो को अपवाद स्वरूप मे माना जाता है।

तो दोस्तों आज का ये लेख आप लोगों को कैसा लगा हमे comment कर के अवश्य बताए और ऐसे ही रोचक और पौराणिक प्रांगोन के लिए हमारे इस blog से जुड़े रहे।

धन्यवाद!

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