रथ यात्रा 2020 विशेष: चमत्कारिक जगन्नाथ पूरी

आदि शंकराचार्य ने सम्पूर्ण भारत के चार दिशाओं में चार धाम की स्थापना की उनमे से पूर्व दिशा में प्रभु जगन्नाथ धाम स्थित है। मान्यता है कि भगवान श्री कृष्ण की आराधना  जगन्नाथ  प्रभु के रूप में होती है। ओडिसा राज्य के पूरी जिले में समुद्र तट के निकट भगवान जगन्नाथ का मंदिर स्थापित है। यहाँ पर भगवान कृष्ण, बलराम और सुभद्रा की काष्ठ निर्मित मूर्तियाँ स्थापित है। भगवान जगन्नाथ का मंदिर कई रहस्यों एवं चमत्कारों से भरा हुआ है। मान्यता ये भी है कि प्रभु श्री कृष्ण प्रतिदिन भोजन ग्रहण करने हेतु जगनाथ पूरी आते है और शयन हेतु द्वारका पूरी जाते है। कई सारी पौराणिक कहानियाँ जगन्नाथ पूरी से जुड़ी हुई है। तथा कई चमत्कार आज भी इस मंदिर से जुड़े हुए है।

15 days quarantine और रथयात्रा

वैसे तो जगन्नाथ पूरी की रथयात्रा से कई कहानियाँ जुड़ी हुई है लेकिन जो प्रमुख रूप से प्रचलित है उसके अनुसार। ज्येष्ठ मास की पुर्णिमा के दिन श्री कृष्ण को दिव्य स्नान कराया जाता है जिसके कारण उन्हे ज्वर (Fever) आ जाता है जिसके उपरांत उन्हे 15 दिनो के लिए एकांतवास में रखकर उन्हे काढ़ा औषधि इत्यादि देकर उनका इलाज कराया जाता है। 15 दिनो के Quarantine के उपरांत जब उनका ज्वार समाप्त हो जाता है। तो प्रभु जगन्नाथ, सुभद्रा और बलराम के साथ नगर भ्रमण के लिए निकलते है। जिसे आज भी आषाढ़ माष की शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि के दिन बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। Corona महामारी के कारण इस वर्ष भले जगन्नाथ भगवान की रथयात्रा माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के आधार पर होगी पर भव्यता, भक्ति, अलौकिकता में कोई भी कमी नहीं रहेगी।
वैसे तो भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा पूरे विश्व में विख्यात है लेकिन इसके साथ ही साथ कुछ आश्चर्यजनक बाते जो की केवल प्रभु जगन्नाथ के मंदिर में ही देखने को मिलती है जो किसी भी व्यक्ति को आश्चर्य चकित कर देती है। जिनमे से कुछ इस प्रकार से है।

1. मंदिर ध्वज (Flag)

वैसे तो सामान्य रूप में कोई भी ध्वज, पताका हमेशा हवा की गति की दिशा में लहराता है लेकिन श्री जगन्नाथ पूरी में एक आश्चर्यजनक घटना देखने को मिल जाती है जब भी पताका लहराएगी हमेशा हवा के विपरीत दिशा में लहराएगी। साथ ही साथ प्रतिदिन मंदिर का ही अर्चक बिना किसी सहायता के लगभग 48 मंजिली भवन के बराबर उचाई पर स्थिति पताका स्तम्भ पर पताका फहराएगा।

2. उड़ान निषेध (No Fly Zone)

उड़ान वर्जित से तात्पर्य ये नहीं की सरकारी या किसी वैधानिक आदेश के अनुसार निषेध है। बल्कि प्रकृतिक रूप से कोई भी विमान या फिर किसी भी प्रकार का पक्षी मंदिर परिसर के ऊपर उड़ान नहीं भर सकता अब इसे चमत्कार ही माना जाएगा कि जिस प्रकार से प्रभु जगन्नाथ के नाम का शाब्दिक अर्थ होता है समस्त संसार के स्वामी उसी प्रकार से स्वामी से उच्च कोई भी जीव इत्यादि उड़ नहीं सकते। ये प्रभु जगन्नाथ के नाम की प्रभुता को सर्वमान्य करता है।

3. भोग प्रसाद

बात जगन्नाथ पूरी की हो और भोग प्रसाद की न हो ऐसा हो ही नहीं सकता। मान्यता है प्रभु जगन्नाथ कहीं भी हो लेकिन भोग तो जगन्नाथ पूरी में ही लगते है। यहाँ का छप्पन भोग भगवान जगन्नाथ को अर्पित किया जाता है। और रोज आने वाले भक्तो को भी प्रसाद के रूप में दिया जाता है। लेकिन आश्चर्य करने वाली बात ये है कि प्रभु जगन्नाथ की कृपा से जीतने भी श्रद्धालु आते है उन्हे भोग प्रसाद भी मिल जाता है साथ ही साथ अन्न का एक दना भी बेकार नहीं जाता है।
साथ ही आज भी प्रभु जगन्नाथ का भोग प्रसाद वहाँ के प्रमुख रसोई महाराज द्वारा बनाया जाता है। जो कि पुरानी रीतियों से ही भोग प्रसाद तैयार करते है। जिसमे आज भी मिट्टी के बर्तनो का प्रयोग किया जाता है। और आश्चर्य की बात ये है कि उन मिट्टी के बर्तनों को एक के उपार एक रख के पकाया जाता है और सबसे ऊपर रखा पात्र का भोजन सबसे पहले पकता है और क्रमशः सबसे नीचे के पात्र का भोजन सबसे अंत में पाक कर तैयार होता है।

4. मौन समुद्र 

जिस प्रकार प्रभु जगन्नाथ को जगत का करता धर्ता माना जाता है उसी प्रकार से प्रकृति भी इस नाम को सर्वमान्य बनती है। चूंकि प्रभु जगनाथ का मंदिर समुद्र के तट पर है लेकिन एक आश्चर्य जनक घटना देखने को मिलती है। मंदिर द्वार के बाहर जितना भी शोर समुद्र का हमे सुनने को मिल जाये लेकिन द्वार प्रवेश के बाद समुद्र की तनिक भी आवाज हमारे कानों को सुनने को नहीं मिल सकती है।

5. अंधकार रहित मंदिर प्रांगण

एक और चमत्कारिक घटना से आप अवगत होंगे जब आप मंदिर परिसर में प्रवेश करेंगे और वो है। बिना किसी मानव निर्मित प्रकाश के भवन परिसर में प्रकाश विद्यमान रहेगा साथ ही साथ हमे अपना प्रतिबिंब अथवा परछाईं भी देखने को नहीं मिलेगी। इसे प्रभु जगन्नाथ का चमत्कार मान सकते है तथा इस संकेत के रूप में भी देख सकते है कि ईश्वर शरण में कहीं भी अंधकार का नामों निशान नहीं रहता उनके सानिध्य में प्रतिबिंब रूप में भी अंधकार नहीं देखने को मिलता क्योंकि हमारे आत्म को मालूम है कि हम स्वयं में उस परम के प्रतिबिंब अथवा परछाईं स्वरूप है हमारे व्यक्तिगत रूप से कोई पहचान नहीं है।

6. सुदर्शन चक्र दर्शन

जब भी हम जगन्नाथ पूरी यात्रा पर जाये तो ये गौर करेंगे कि मंदिर स्तम्भ के ध्वज के नीचे लगे सुदर्शन चक्र का हमे दर्शन होगा। और आश्चर्य की बात ये देखने को मिलेगी कि नगर के किसी भी कोने में चले जाये हमे सुदर्शन चक्र का दर्शन एक ही रूप में होगा। भले ही सुदर्शन चक्र केवल द्विआयामी होता है लेकिन हर दिशा से हमे उसके सम्पूर्ण दर्शन प्राप्त होते है। इससे हमे ईश्वर की कृपा की सम्पूर्ण व्यापकता का एहसास होता है।

निष्कर्ष

वैसे तो प्रभु जगन्नाथ के संबंध में बहुत सारे तथ्य और कथाएँ प्रचलित है जिसमे से कुछ का वर्णन हमने इस लेख के जरिये किया है। लेकिन अगर सही रूप में जगन्नाथ पूरी के रहाशयों को देखना या समझना है तो एक बार वहाँ का दर्शन करने पर हमे उसकी दिव्यता समझ आएगी और जो हमारे मानस में जीवन पर्यंत तक स्मरण रूप में बनी रहेगी। वैसे तो इस बार की रथयात्रा में कई प्रतिबंध माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा लगाए गए है जिसमे पूरे शहर में Curfew लगा रहेगा तथा केवल 500 लोगो को रथयात्रा में शामिल होने की अनुमति है। लेकिन जब फिर कभी मौका मिले तो अवश्य एक बार रथयात्रा के प्रत्यक्ष दर्शन का लाभ उठाए उस भव्यता का स्मरण आपके मानस से कभी भी हट नहीं पाएगा।

||इति शुभम्य||

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