रिद्धी सिद्धि बुद्धि दाता प्रथम पूज्य गणेश- गणेशोत्सव विशेष

भाद्रपद शुक्ल पक्ष चतुर्थी तिथि को सनातन धर्म के लोगो के लिए बहुत ही विशेष दिन है। इस दिन को प्रथम पूज्य गणेश के जयंती के रूप मे मनाया जाता है। चतुर्थी तिथि से लेकर चतुर्दशी तिथि तक दश दिवसीय उत्सव बड़े धूम धाम से मनाया जाता है। खासकर महाराष्ट्र मे ये त्योहार बड़े ही धूम धाम से मनाया जाता है। लोग अपने घरो में गणपती की प्रतिमा की स्थापना करते है। और दश दिवसीय पूजन उत्सव का अपनी क्षमता के अनुसार आयोजन करके चतुर्दशी तिथि को उनका विसर्जन करते है। इस कोरोना काल मे तो इस उत्सव की तैयारी मे तो कमी हो सकती है, लेकिन गणपति के पूजन, भक्ति मे वही उत्साह रहेगा जैसा पहले के वर्षों मे होता था।

गणपति का जन्म- भगवान गणेश देवाधिदेव शिव और माता पार्वती की संतान है। मान्यता है एक बार माता पार्वती ने देवाधिदेव से बोला कि उनके स्वयं प्रभु तो ध्यान इत्यादि की अवस्था मे रहते है इसलिए उनके लिए भी कोई साथ होना आवश्यक है। इसपर स्नान करते समय माता पार्वती अपने शरीर के मैल से एक शरीर का निर्माण किया और उसमे जीवन शक्ति प्रदान की। और उन्हे अपने पुत्र गणेश के रूप मे स्वीकार किया। देवाधिदेव को इस बात का पता नहीं था। और माता पार्वती अपने कक्ष मे थी और उन्होने गणेश को द्वार पर रखवाली करने को कहा और किसी को अंदर ना आने से माना किया था।
भगवान शिव के गण और स्वयं शिव भी जब माता पार्वती से मिलने का प्रयास करने लगे तो गणेश ने माता का आज्ञा का पालन करते हुए उन्हे रोक दिया। इस पर क्रोधित होकर शिव ने गणेश का शिर उनके धड़ से अलग कर दिया। और जब माता पार्वती को इसका पता चला तो उन्होने शिव को बताया कि उन्होने अपने ही पुत्र का शिर धड़ से अलग कर दिया। जब शिव को पता चला तो उन्होने हाथी का सिर गणेश के धड़ को लगाया। तब से गणेश को गजानन के रूप मे भी जाना जाता है।

मातृ पितृ भक्त गणेश- हम सभी जानते है कि भगवान गणेश को प्रथम पूज्य के रूप मे जाना जाता है। और किसी भी प्रकार का अनुष्ठान या पूजन हो हम सबसे पहले स्वयं गणेश का आह्वाहन करते है और उनका पूजन करते है तत्पश्चात ही हम अपने अनुष्ठान या पूजन को आरंभ करते है। लेकिन इसके पीछे एक प्रसंग है कि क्यों उनको प्रथन पूज्य देव का स्थान प्राप्त हुआ। एक बार की बात है कि कार्तिकेय और गणेश तय हुआ कि कौन सबसे पहले समस्त ब्रह्मांड की परिक्रमा पूरा करता है। वही सर्वश्रेष्ठ माना जाएगा। कर्तिकेय तो समस्त ब्रह्मांड की परिक्रमा हेतु निकले लेकिन गणेश ने भगवान शिव और माता पार्वती की परिक्रमा करने लगे। और जब उनसे ऐसा करने का कारण पुच्छा गाय तो उन्होने बताया कि मेरे माता पिता ही मेरे लिए सम्पूर्ण संसार है। और इनकी परिक्रमा सम्पूर्ण संसार की परिक्रमा करने के बराबर है। और तबसे भगवान गणेश को सभी देवों मे प्रथम पूज्य होने की उपाधि प्राप्त हुई।

रिद्धी सिद्धि और वैभव के दाता- भगवान गणेश सभी प्रकार की सिद्धियों और रिद्धिओन के दाता है। साथ ही साथ वैभव प्रदान करने वाले देव के रूप मे जाने जाते है। इसके पीछे का कारण है कि भगवान गणेश का विवाह स्वयं रिद्धी और सिद्धि से हुआ है। मान्यताओं के अनुसार रिद्धी सिद्धि स्वयं भगवान विश्वकर्म की पुत्रियाँ है। और रिद्धी और सिद्धि से दो पुत्र हुआ जिंका नाम क्षेम और लाभ है। साथ ही साथ भगवान गणेश को जन्म तो माता पार्वती ने दिया लेकिन माता लक्ष्मी ने इन्हे अपने पुत्र के रूप मे अपनाया। अतः इन कारणो से बहगवान गणेश के दर्शन पूजन से हम रिद्धी सिद्धि लाभ वैभव सभी चीजों को प्राप्त कर सकते है।

महाराष्ट्र का गणेश उत्सव- बात गणेश चतुर्थी पर्व की हो और महाराष्ट्र राज्य के गणेश उत्सव की बात न हो, सही नहीं होगा। वैसे तो महाराष्ट्र का गणेश उत्सव बहुत ही प्रसिद्ध है। और आज भी लोग दूर दूर से इस उत्सव की भव्यता को देखकर प्रफुल्लित हो जाते है। इस सार्वजनिक उत्सव की शुरुवात बाल गंगाधर तिलक ने की थी। जब हमारा देश अंग्रेज़ो का गुलाम था तो इस आयोजन के जरिये बाल गंगाधर तिलक ने इसके जरिये लोगो को, जन मानस को एक जुट करने का प्रयास किया जिससे स्वतन्त्रता आंदोलन मे उनकी एकजुतता से ताकत मिल सके।
बाल गंगाधर तिलक के इस प्रयास के उपरांत गणेश उत्सव का आयोजन हर वर्ष महाराष्ट्र राज्य मे मनाया जाता है। और उसकी भव्यता हर वर्ष बढ़ जाती है। अभी इस आयोजन का विस्तार कई अन्य राज्य जैसे मध्य प्रदेश और तमिलनाडू इत्यादि राज्यों मे भी देखने को मिलता है। मुंबई शहर के लालबाग के राजा (लालबाग च्या राजा) की प्रसिद्धि तो बहुत ही अधिक है। हर वर्ष इनके दर्शन हेतु बहुत ही दूर दूर से लोग आते है। जिस प्रकार से कोलकाता का दुर्गापूजा बहुत ही प्रसिद्ध है। उसी प्रकार मुंबई का गणेश उत्सव बहुत ही जायदा प्रसिद्ध उत्सव है।

निष्कर्ष

भगवान गणेश की कई ऐसी शक्तियाँ और प्रसंग है जो हमे जीवन मे सच्ची राह और मार्ग प्रशस्त करते है। प्रथम पूज्य देव होते हुए भी उन्होने एक चूहे को अपनी सवारी बनाया। ये हमे सिखाती है कि हम कितने भी बड़े हो हमे अपनी शक्ति को अपने नियंत्रण मे रखना चाहिए। और इस चीज का अहम नहीं होना चाहिए और सर्व समाज के हितों के बारे मे सोचना चाहिए। इस गणेश उत्सव पर्व मे हम सबको मिलकर भगवान गणेश की आराधन और बहकती करनी चाहिए और जिससे समस्त इच्छाओं की पूर्ति कर सकते है। भगवान गणेश किसी गरीब को वैभव प्रदान करते है। एक विद्यार्थी को बुद्धि और विवेक प्रदान करते है। इच्छित व्यक्ति को रिद्धी सिद्धि प्रदान करते है। प्रथम पूज्य गणेश को उनके जन्म आज भाद्रपद शुक्ल पक्ष चतुर्थी को उनकी सच्चे मन से आराधना और पूजन के जरिये उनकी कृपा प्रपट कर सकते है। और चतुर्दशी तिथि तक होने वाले गणेश उत्सव मे सम्मिलित होकर इसका आनंद ले सकक्ते है। हमारी यही कमाना है कि भगवान गणेश की कृपा दृष्टि आओ सभी पर बनी रहे, सभी सुखों की प्राप्ति हो और आपको सद्मार्ग पर चलने का वरदान प्राप्त हो।

||इति शुभम्य||

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