सकारात्मक सोच (Positive Thinking) हमारा भविष्य निर्धारण करती हैं: प्रसंग

Positive thinking

ये बात तो हम सभी जानते है कि हमारी सोच का असर हमारे जीवन पर पड़ता है। जैसा हम सोचते है वैसा ही हमारे जीवन का निर्धारण होता है। जब कभी भी हम अपने जीवन मे किसी दुविधा या परेशानी मे पड़ते है तो लोगो अक्सर बोलते कि सकारात्मक सोच (Positive Thinking) रखो सब कुछ अच्छा होगा। तो क्या सच मे हमारी सोच इतना प्रभाव हमारे जीवन पर डालती है। तो इसका उत्तर होगा हाँ। इसे हम एक बहुत ही अच्छे प्रसंग के जरिये समझने का प्रयास करेंगे। और अगर ये प्रसंग सच मे अच्छा लगे तो अवश्य इसे दूसरे के साथ भी साझा करने का प्रयास करे।

दो भाइयों का प्रसंग- किसी नगर मे दो भाई रहते थे दोनों का परवरिश एक जैसे ही हुआ था। जैसा भोजन, वस्त्र, शिक्षा दीक्षा इत्यादि एक भाई को मिली वैसा ही सब कुछ दूसरे भाई को भी मिली युवावस्था तक उन दोनों के जीवन शैली मे कोई भी अंतर नहीं था। सिवाय उनके सोच के और आगे चलकर दोनों ही भाइयों की जीवन शैली बहुत ही भिन्न हो गई। एक भाई शहर का सबसे नकारा आदमी कहलाता था उसके जीवन मे कुछ भी अच्छा कहने को नहीं था। लोग उसके जीवन को बेकार कहते थे कोई भी समाज मे उसे इज्जत की नजर से नहीं देखते थे। लोग अपने बच्चों को उसकी मिसाल देकर उसके जैसा न बनने को सलाह देते थे।

और दूसरी तरफ दूसरे भाई का जीवन बहुत ही विपरीत था। वो नगर का सबसे अमीर आदमी, उसके पास सारी सुख सुविधाएं उपलब्ध थी लोग उसको सम्मान की नजर से देखते थे। अपने बच्चो को उसके जैसा बनने की मिसाल देते थे। इस प्रकार से दोनों ही भाइयों का पालन पोषण एक जैसा होने के बावजूद भी दोनों की जीवन शैली बहुत ही भिन्न थी। एक समाज का बहुत ही इज्जतदार व्यक्ति कहलाता था वहीं दूसरा भाई किसी काम का नहीं समाज मे लानत भरी जीवन जीने को मजबूर था।

नगर के सभी लोग इन दोनों के इतने भिन्न जीवन को देखकर बहुत आश्चर्य चकित थे। उनके मन मे हमेशा ये प्रश्न रहता था कि कैसे एक जैसी जीवन शैली होने के बावजूद भी दोनों भाइयों मे इतनी भिन्नता क्यों है। ये प्रश्न लोगो के बीच चर्चा का विषय बन गया। और एक दिन सहसा लोगो मे सोचा क्यों न इसका कारण चलकर स्वयं ही दोनों भाइयों से पूछा जाये। क्योंकि वही दोनों एकमात्र व्यक्ति है जो इस प्रश्न का सही जवाब दे सकते है।

पहले भाई की नकारात्मक सोच- सबसे पहले सभी जन पहले भाई के पास गए जो नकारा था जो जीवन मे कुछ भी अच्छा नहीं करता था। जिसका व्यक्तित्व लोगो को अखरता था। लोगो ने उससे पूछा आखिर तुम्हारे ऐसे जीवन का जिम्मेदार कौन है। उसने बोला कि मेरे पिता पैसे वाले नहीं थे किसी तरह वो अपना जीवन यापन करते थे। उन्होने मेरा पालन पोषण भी किसी तरह किया। हमारे घर मे सुख सुविधाओं की बहुत कमी थी। जब मै ऐसे परिवेश मे रहा तो मुझसे क्या आशा की जा सकती थी तो मेरा जीवन भी उसी तरह रहा। हाँ अगर मेरे पिता मेरा पालन पोषण सुख सुविधाओं से भरपूर रूप मे करते तो मै कुछ कर के दिखाता। जैसा मेरा पालन पोषण हुआ उसी के अनुरूप मै आज हूँ। यहाँ इस व्यक्ति की नकारात्मक सोच साफ साफ पता चलती है। ये अपने कर्म अपने दृढ़ निश्चय की कमी कि बात न करके संसाधनो के अभाव की बात कर रहा। और उसे ही अपने वर्तमान जीवन के लिए जिम्मेदार मानता है।

दूसरे भाई की सकारात्मक सोच- पहले भाई से जवाब मिलने के बाद सब दूसरे भाई के पास पहुँचते है। उसका चेहरा प्रसन्नता से भरा हुआ चमक लिए हुए था। लोग उसे देखकर ही आनंदित हो उठे। सभी उसके पास पहुँच कर वही प्रश्न उसे दोहराया और ये भी बताया कि आपके भाई ने संसाधनो के अभाव की बात की फिर आपने जीवन मे इतनी ऊचाई, सम्मान, धन वैभव इत्यादि कैसे प्राप्त किया इसके पीछे क्या कारण है। क्योंकि आपके भाई के तर्को से नहीं लगता इतना कुछ कर पाना आपके लिए संभव था। इसपर दूसरे भाई ने बोला कि मेरे भाई ने जो कुछ भी बताया वो शत प्रतिशत सत्य है। सच मे हमने अभाव मे अपना प्रारम्भिक जीवन जिया है। और यही मेरे आज की तरक्की का कारण है। लोग इस जवाब से अचंभित हो गए कि कैसे एक ही वजह के कारण एक भाई जीवन मे असफल है और कैसे दूसरा सफल इंसान है। इसपर दूसरे भाई ने जवाब दिया इन अभावों ने मुझे जीवन मे ये सोचने पर मजबूर किया कि ऐसा जीवन मुझे मेरे परिवार और अपने बच्चो को नहीं देना है। और मैंने दृढ़ निश्चय किया की इस अभाव की जिंदगी से बाहर निकल के ही रहूँगा। और लक्ष्य प्राप्ति हेतु लगन से लग गया। यहाँ दूसरे भाई के सकारात्मक सोच ने उसके भविष्य के जीवन को बदल कर ही रख दिया।

इस प्रकार पता चलता है कि कैसे एक जैसा प्रारम्भिक जीवन होने के बावजूद भी दोनों भाइयों का भविष्य कितना भिन्न भिन्न था। इसका सबसे प्रमुख कारण केवल और केवल एक की सकारात्मक सोच जो उसे ऊँचाइयाँ प्रदान करती है दूसरे का नकारात्मक सोच जो उसे निम्न स्तर का जीवन जीने को मजबूर करती है। तो अब हम कह सकते है कि हमारी सोच हमारे भविष्य निर्धारण हेतु बहुत ही आवश्यक तत्व के रूप मे कार्य करती है।

निष्कर्ष 

प्रायः हम लोगो की जीवनी पढ़ते है। जब कभी कोई व्यक्ति किसी ऊंचे पद या सम्मान को प्राप्त करता है तो लोग उसकी कहानी बताते है कि कैसे अभाव भरा जीवन होते हुए भी अमुक व्यक्ति ने इतनी उचाई प्राप्त की। उदाहरण बहुत सारे है इसके जिनमे से प्रमुख उदाहरण हम मिसाइल मैन अब्दुल कलाम जी का ले सकते जिन्होने कैसे गरीब परिवार से होने के बावजूद भी एक महान वैज्ञानिक और आगे चलकर देश के राष्ट्रपति बने। इसी प्रकार लाल बहादुर शास्त्री इत्यादि बहुत सारे नाम है जिन्होने अभाव की बेड़ियों को तोड़कर कितनी ऊंचाई हासिल की। और ये सब मुमकिन रहा सिर्फ और सिर्फ उनके स्वयं के सकारात्मक सोच के कारण और उस सकारात्मक सोच को दृढ़ निश्चय के द्वारा कार्यान्वित करके।

इसलिए हमे अपने जीवन मे सकारात्मक सोच को हमेशा बनाए रखना चाहिए। चाहे कैसी भी परेशानी या कठिनाई आए हम अडिग रहना चाहिए अपने दृढ़ निश्चय के द्वारा और मैन मे नकारात्मक सोच को बिलकुल भी ठहरने नहीं देना चाहिए। शुरुवात से ही बच्चों मे ऐसी भावना जागृत करनी चाहिए। उन्हे प्रेरक प्रसंग इत्यादि के जरिये महसूस करना चाहिए की जीवन मे सकारात्मक सोच का क्या महत्व है। और उसे अपने जीवन मे कैसे धरण करें।

||इति शुभम्य||

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