नर सेवा करने वाला ही असली नायक (Real Hero)

मानवता के कुछ प्रमुख गुणो की बात की जाये तो उनमे सबसे प्रमुख कारक है सेवा भाव और सेवा भाव ही हमे असली मानव के स्वरूप को पहचान देती है। किसी साधु की बात हो या फिर कोई भी महापुरुष …

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जन जन को राम नाम सुलभ कराया महाकवि तुलसीदास ने- जयंती विशेष

जन जन के मन मस्तिष्क मे राम की कथा कंठस्थ है और अगर बोला जाये इसका प्रमुख कारण महाकवि तुलसीदास (Tulsidas) है तो ये कोई अतिस्योक्ति नहीं होगा। आज श्रावण मास के शुक्ल पक्ष के सप्तमी तिथि को जन कवि …

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क्या होता है कर्म योग (Karm Yog): कर्म योगी (Karma Yogi) के लक्षण

भारतीय सनातन धर्म मे हमारे जीवन में कर्म की बहुत ही ज्यादा प्रधनता है। गीता मे भी कर्म की सम्पूर्ण और विस्तृत व्याख्या की गई है। अतः कर्म की प्रधानता हमारे जीवन मे आवश्यक तत्व के रूप में है। कर्म …

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मानसिक मजबूती से शारीरिक मजबूती- दार्शनिक विवेचना

आज की दौड़ भरी जिंदगी में मानव सब कुछ पाने में सक्षम है। तकनीकी और नए संसाधनो के जरिये मानव के पास हर तरह की सुख सुविधाएं उपलब्ध है। लेकिन जो उसके लिए अति आवश्यक है केवल उसी की उसके …

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रामायण (Ramayan) में भाइयों के चरित्र का दार्शनिक समालोचना

भारतीय सनातनी परिवार में हर Member (चाहे वो Literate हो या Illiterate ) रामायण (Ramayan) और महाभारत (Mahabharat) की कथा को अवश्य जानता है चाहे विस्तार रूप में या फिर सामान्य रूप में। लेकिन इन दो कथाओं से कोई अपरिचित …

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बुद्ध पुर्णिमा 2020 (Buddha Purnima): वर्तमान समय मे बुद्ध के बताए 12 भवचक्रों (दुःख समुदय) का महत्व

वैशाख मास की पुर्णिमा तिथि को बुद्ध पुर्णिमा (Buddha Purnima) के रूप मे भी जाना जाता है। आज ही के दिन महात्मा बुद्ध की जयंती के रूप मे मनाया जाता है। और आज ही के दिन महात्मा बुद्ध ने काशी …

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अच्छे कर्म होते हुए भी क्यों होती है निराशा: दार्शनिक विवेचना

प्रायः हम देखते है जब किसी के साथ कुछ गलत होता है। तो वो कहते पाये जाते है कि उन्होने जीवन में कुछ गलत नहीं किया फिर भी उनके साथ बुरा क्यों हुआ। कुछ लोग तो ऐसे होते है। जो …

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हिग्स बोसान (गॉड पार्टिकल): आध्यात्मिक और दार्शनिक विवेचना

स्विट्ज़रलैंड की CERN नामक संस्था ने 2012-2013 में परम तत्व अथवा गॉड पार्टिकल को खोजने की घोषणा की। वैसे तो गॉड पार्टिकल की अवधारणात्मक व्याख्या 1960-70 के दशक में ही कर दी गई थी परंतु इसका प्रयोगात्मक विवेचना एवं सत्यता …

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मानव और अन्य जीवों में भिन्नता तथा उनके गुण दोष

हमारे पृथ्वी पर जीवों को कई श्रेणियों में विभक्त किया गया है। जो जीवाणु, कीटाणु से लेकर अन्य पशु पक्षी और मनुष्य जैसे श्रेणियों में बंटे हुए है। लेकिन अगर देखा जाये तो मनुष्य इन सभी जीवों से बहुत ही …

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योग से योगा: दार्शनिक युग से आधुनिक युग तक की यात्रा

योग भारतीय संस्कृति की प्राचीनतम विधाओं में से एक है। भारतीय आस्तिक षड्दर्शन में योग का बहुत ही महत्वपूर्ण है। योग दर्शन का विचार महर्षि पतंजलि द्वारा प्रतिपादित किया गया है। योग दर्शन का मूल उद्द्येश्य भौतिक जगत में रहते …

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