मानसिक मजबूती से शारीरिक मजबूती- दार्शनिक विवेचना

आज की दौड़ भरी जिंदगी में मानव सब कुछ पाने में सक्षम है। तकनीकी और नए संसाधनो के जरिये मानव के पास हर तरह की सुख सुविधाएं उपलब्ध है। लेकिन जो उसके लिए अति आवश्यक है केवल उसी की उसके पास कमी है। हम बात कर रहे है। मानसिक मजबूती …

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रामायण में भाइयों के चरित्र का दार्शनिक समालोचना

भारतीय सनातनी परिवार में हर Member (चाहे वो Literate हो या Illiterate ) रामायण और महाभारत की कथा को अवश्य जानता है चाहे विस्तार रूप में या फिर सामान्य रूप में। लेकिन इन दो कथाओं से कोई अपरिचित नहीं है। रामायण और महाभारत हर दिन कोई न कोई नई सीख …

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बुद्ध पुर्णिमा 2020: वर्तमान समय मे बुद्ध के बताए 12 भवचक्रों (दुःख समुदय) का महत्व

वैशाख मास की पुर्णिमा तिथि को बुद्ध पुर्णिमा के रूप मे भी जाना जाता है। आज ही के दिन महात्मा बुद्ध की जयंती के रूप मे मनाया जाता है। और आज ही के दिन महात्मा बुद्ध ने काशी के सारनाथ मे अपना प्रथम उपदेश भी दिया था। महात्मा बुद्ध का …

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अच्छे कर्म होते हुए भी क्यों होती है निराशा: दार्शनिक विवेचना

प्रायः हम देखते है जब किसी के साथ कुछ गलत होता है। तो वो कहते पाये जाते है कि उन्होने जीवन में कुछ गलत नहीं किया फिर भी उनके साथ बुरा क्यों हुआ। कुछ लोग तो ऐसे होते है। जो जीवन में हमेशा सद्मार्ग का पालन करते हुए जीवन यापन …

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हिग्स बोसान (गॉड पार्टिकल): आध्यात्मिक और दार्शनिक विवेचना

स्विट्ज़रलैंड की CERN नामक संस्था ने 2012-2013 में परम तत्व अथवा गॉड पार्टिकल को खोजने की घोषणा की। वैसे तो गॉड पार्टिकल की अवधारणात्मक व्याख्या 1960-70 के दशक में ही कर दी गई थी परंतु इसका प्रयोगात्मक विवेचना एवं सत्यता की पुष्टि 2012-13 में CERN के लैब मे हुई। इस …

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मानव और अन्य जीवों में भिन्नता तथा उनके गुण दोष

हमारे पृथ्वी पर जीवों को कई श्रेणियों में विभक्त किया गया है। जो जीवाणु, कीटाणु से लेकर अन्य पशु पक्षी और मनुष्य जैसे श्रेणियों में बंटे हुए है। लेकिन अगर देखा जाये तो मनुष्य इन सभी जीवों से बहुत ही भिन्न और अलग जीवन शैली का जीने वाला प्राणी है। …

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योग से योगा: दार्शनिक युग से आधुनिक युग तक की यात्रा

योग भारतीय संस्कृति की प्राचीनतम विधाओं में से एक है। भारतीय आस्तिक षड्दर्शन में योग का बहुत ही महत्वपूर्ण है। योग दर्शन का विचार महर्षि पतंजलि द्वारा प्रतिपादित किया गया है। योग दर्शन का मूल उद्द्येश्य भौतिक जगत में रहते हुए अलौकिक जगत का अनुभव करना है द्वितीय हमारी आत्मा …

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यात्रा (अथातो घुमक्कड़ जिज्ञासा): दार्शनिक प्रासंगिकता

उपरोक्त शीर्षक में दी गई लाइन अथातो घुमक्कड़ जिज्ञासा महान दार्शनिक, लेखक राहुल सांकृत्यायन जी के एक निबंध से लिया गया इस निबंध को जब मैंने सर्वप्रथम पढ़ा था तब से ही मैंने इसे अपने जीवन शैली का एक अभिन्न अंग मान लिया। देखा जाये तो यह सही ही है …

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