पंचामृत पंचगव्य और चरणामृत क्या होते है और इनका महत्व क्या है।

panchamrit panchgavya charnamrit- Kissa Kahani

सनातन समाज में ईश भक्ति के लिए बहुत तरह के विधि विधानों का प्रयोग होता है। हम अपने ईश्वर को की तरह के भोग लगते है उनका शृंगार करते है और एक मानव की तरह या फिर एक बालक की तरह ही उनका सम्पूर्ण पूजन किया जाता है जिसमे भोग के साथ चरणामृत पंचामृत और पंचगव्य का प्रयोग बहुत ही प्रमुख है।

खासकर वैष्णव संप्रदाय के लोगों के लिए इसका महत्व तो बहुत ही अधिक होता है। प्रायः लोगों को लगता है ये तीनों चीजें एक ही रूप मे है लेकिन इनमे अंतर होता है इनमे मिलायी जाने वाली सामग्री भी अलग होती है तो चलिए जानते है इन तीनों महाप्रसाद के बारे में।

पंचामृत- वैसे तो नाम से ही पता चल जाता है कि इनमे किन्ही पाँच पदार्थों का प्रयोग करके बनाया जाता है। पंचामृत का प्रयोग हम प्रायः सत्यनारायण कथा के समय या फिर किसी उत्सव के समय प्रसाद के रूप मे प्रयोग करते है। अब हम जानते है इनमे मिलने वाले पाँच पदार्थों की।

1- शहद- शहद एक प्राकृतिक शर्करा होता है इसकी शुद्धता इतनी होती है कि ये कभी भी खराब नहीं होता है। वैज्ञानिकों ने भी इस बात को सिद्ध किया है कि पुरातन पिरामिड मे ममी के पास मिलने वाले पदार्थों मे शहद है जो आज भी उपयोग किया जाता है।

2- शर्करा- शर्करा का प्रयोग पंचामृत मे प्राकृतिक मिठास के साथ उपयोग किया जाता है। शर्करा के रूप मे हम चीनी का प्रयोग करते है लेकिन पुरातन काल मे गुड का प्रयोग किया जाता था जो कि ज्यादा अधिक शुद्ध करने के बाद प्राप्त गुड होता था जो हमे पंचामृत मे अतिरिक्त मिठास देता है।

3- दुग्ध- सनातन संप्रदाय मे गाय से मिलने वाले पदार्थों का प्रयोग बहुत ही आवश्यक माना जाता है जिसे सबसे शुद्ध भी माना जाता है। पंचामृत मे तीसरा सबसे जरूरी पदार्थ गाय का दूध होता है।

4 एवं 5- दही एवं घी- पंचामृत मे चौथा आवश्यक तत्व गाय के दूध से बना दही होता है साथ ही पंचवा पदार्थ गाव के दही से ही बना घी होता होता है। घी को दूध का अंतिम शुद्ध रूप मम जाता है धरती पर सबसे शुद्ध पदार्थ घी को माना जाता है। और इन पांचों पदार्थों का प्रयोग करके इनके मिश्रण के जरिए पंचामृत बनाया जाता है।

पंचगव्य- पंचगव्य मे गव्य शब्द के प्रयोग से समझा जा सकता है कि इसमे पांचों पदार्थ गाय के द्वारा ही प्राप्त हुआ है। जिसमे ऊपर बताए गए गाय के घी दूध दही के साथ गौमूत्र और गोबर के कुछ अंश का प्रयोग होता है।

पंचगव्य का प्रयोग किसी विशेष आयोजन पर किया जाता है। जिसमे सब कुछ देशी गाय से उत्पन्न पदार्थों का प्रयोग होता है। गाय से उत्पन्न पदार्थ के उपयोग के पीछे बहुत ही अच्छा कारण है गाय मे सभी देवताओं का वास है और इसी करण गए सबसे शुद्ध मानी जाती है और इससे मिलने वाले पदार्थ भी।

चरणामृत- चरणामृत की बात करें तो रोज प्रभु के विग्रह को स्नान के बाद प्राप्त जो जल होता है उसे चरण मृत कहते है वही कुछ लोग पंचामृत से भी विग्रह स्नान कराते है किसी विशेष आयोजन पर तो इस प्रकार से चरणामृत का प्रयोग रोज किया जाता है।

पंचामृत पंचगव्य और चरणामृत भगवान की आराधन के उपरांत प्राप्तप्रसाद स्वरूप है इनमे प्रयोग होने वाले पदार्थ भी बहुत ही शुद्ध रूप और हमारे स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी होते है।

तो दोस्तों आज हमने पंचामृत चरणामृत और पंचगव्य के बारे मे जाना जिनका प्रयोग बहगवां के प्रसाद और स्नान हेतु दोनों के लिए होता है जिसे बाद मे हम प्रसाद रूप मे ग्रहण करते है। जिससे हमारे अंदर एक आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है तो आज का लेख आप लोगों को कैसा लगा हमे जरूर बताए और अन्य को भी ये अद्भुत जानकारी शेयर जकरे और इस आने वाले जन्माष्टमी मे भगवान कृष्ण को पंचामृत और पंचगव्य का भोग लगाना न भूले।

॥ इति शुभम॥

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