पाँच तत्व अथवा पंच महाभूत क्या हैं- दार्शनिक विवेचना

संसार के सारे महान वैज्ञानिक एवं तत्वशास्त्री संसार और जगत के रहस्यों को जानने हेतु जिज्ञासु रहते है। और कई वैज्ञानिकों ने हमारा जगत मे तीन मूल तत्वों के बारे मे बताया है। जो कि ठोस, द्रव और गैस के रूप मे जाने जाते है। लेकिन सनातन परंपरा के दार्शनिको और तत्व मीमांसियों ने कुल पाँच तत्वों के बारे मे बताया है।

आज के इस लेख मे हम उनही पाँच तत्वों के बारे मे जानने का प्रयास करेंगे जिनहे पंच महाभूत के नाम से भी जाना जाता है। और मान्यता है कि इस जगत की समस्त विषयों का निर्माण इनहि पाँच तत्वों या फिर पंच महाभूतों से हुआ है।

भारतीय दार्शनिक जगत को दो मूल भागों मे बांटा गया है जिन्हे आस्तिक और नास्तिक दर्शन के रूप मे जाना जाता है। आस्तिक दर्शन वो हैं जो वेदों को मूल साक्ष्य के रूप मे मानते है वहीं नास्तिक दर्शन वो है जो वेदों को साक्ष्य नहीं मानते लेकिन बात जब तत्वों के विवेचना की आती है तो भारतीय दर्शन की दोनों ही शाखाओं मे पंच तत्वों या फिर पंच महाभूतों की मान्यता है।

पाँच तत्व या पंच महाभूत कौन कौन से है और इनकी गुणधर्मिता क्या है-

1- पृथ्वी- पहला मूल तत्व है पृथ्वी या फिर कुछ लोग इसे मिट्टी के रूप मे जानते है। पृथ्वी को मूल तत्व मानने के पीछे का कारण है हमारे भौतिक संरचना का निर्माण का आधार। कोई भी चीज हमे तभी दिखती है जब उसका भौतिक स्वरूप हो। या फिर ये कहे कोई विषय अथवा वस्तु को दृश्यमान बनाने के लिए पृथ्वी मूल तत्व के रूप मे जानी जाती है। यहाँ तक की आस्तिक दर्शन शाखा के विद्वानों का मानना है कि भले ही सम्पूर्ण सृष्टि परमात्मा का अंश है लेकिन जब तक इसका एक भौतिक स्वरूप होता है उसके लिए किसी तत्व की आवश्यकता अवश्य है जो कि पृथ्वी है।

2- जल- दूसरा मूल तत्व अथवा महाभूत है जल। हम मानते है कि जल तो पृथ्वी का ही एक अंश है लेकिन इसकी गुणधर्मिता के आधार पर इसे अलग तत्व के रूप मे मान्यता देना उचित है। बगैर जल के किसी भी विषय वस्तु का स्वरूप भिन्न होता है। और इसके संकर से उसके स्वरूप मे बहुत ही ज्यादा परिवर्तन देखने को मिलता है।

3- वायु- तीसरा सबसे प्रमुख तत्व है वायु। जिस प्रकार से पृथ्वी और जल हमारे भौतिक स्वरूप के निर्माण मे सहायक सिद्ध होती है उसी प्रकार से वायु हमारे संचालन मे बहुत ही उपयोगी है। विज्ञान के विशेषज्ञों का भी मानना है कि वायु के बगैर हमारे जीवन का कोई अस्तित्व ही नहीं रहेगा। और दर्शन शास्त्रियों का भी मानना है कि वायु को हम केवल पावन से ही नहीं बल्कि हमारे प्राणो के रूप मे देखते है जिसे हम प्राण वायु बोलते जो हमारे जीवन लीला की प्रमुख डोर होती है।

4- अग्नि- विज्ञान की धारा के विचारको ने अग्नि को अलग तत्व नहीं माना है। लेकिन सनातन भारतीय दर्शन की शाखा के लोगो ने इसे ऊर्जा के रूप मे परिभाषित किया है चूंकि ऊर्जा के वगैर सम्पूर्ण जगत मृत रूप माना जाएगा। कोई भी क्रिया ऊर्जा के बगैर सम्पन्न नहीं की जा सकती है। अतः अग्नि ऊर्जा के मूल तत्व के रूप मे मान्यता प्राप्त करता है।

5- आकाश- और अंतिम पंच तत्व है आकाश ऊपर लिखित तत्वों के द्वारा हम किसी विषय वस्तु के भौतिक संरचना उनके संचालन और ऊर्जा से संबन्धित तत्व को जाना और आकाश तत्व का संबंध देश (Space) अर्थात स्थान से है बिना space के हम किसी भी वातावरण की कल्पना नहीं कर सकते है इसी लिए आकाश तत्व के जरिये हम किसी विषय वस्तु को एक स्थान प्रधान करते है।

पाँच तत्व अथवा पंच महाभूत का हमारी आध्यात्मिक शास्त्रों मे भी बहुत ही बड़ा महत्व है। हमारे शरीर की सम्पूर्ण संरचना और इसका संचालन इन पंच महाभूतों के द्वारा ही संभव है। इसीलिए जब सनातन परंपरा मे किसी व्यक्ति का निधन होता है तो उसके मृत शरीर का दाह संस्कार करके पंच महाभूतों मे उन्हे वापस मिला दिया जाता है।

जब कभी भी किसी प्रकार की पूजा अथवा किसी प्रकार के यज्ञ हवन मे इन पंच महाभूतों का विशेष पूजन किया जाता है हमारे संस्कृति हर किसी जिससे हमे कुछ प्राप्त होता है उनके प्रति अपनी श्रद्धा प्रस्तुत करने का रिवाज है इसीलिए इन पंच महाभूतों का पूजन का महत्व बहुत अधिक है। जिससे हमारे इस शरीरी की रचना हुई और इस संसार के सभी संसाधनों एवं विषय वस्तुओं का निर्माण हुआ।

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