मोहिनी अवतार- भगवान विष्णु के एकमात्र स्त्री अवतार की कथा

पूर्व के लेखों मे भी हमने बताया है कि भगवान विष्णु के कुल 24 अवतारों का वर्णन हम प्रमुख ग्रन्थों मे देख सकते है जिनमे से एक प्रमुख अवतार मोहिनी अवतार है। ये भगवान विष्णु का शक्ति रूप मे एकमात्र स्त्री अवतार है। जब कभी भी देवताओं इत्यादि को कोई परेशानी हुई है तो उससे मुक्ति दिलाने के लिए भगवान विष्णु ने मोहिनी अवतार धरण किया है।

आज के इस लेख मे हम आप लोगो को भगवान विष्णु के मोहिनी अवतार से जुड़ी दो प्रमुख प्रसंगो के बारे मे बताएँगे कैसे उन्होने देवताओं और स्वयं भगवान शिव की सहायता की। तो चलिये शुरू करते है।

जब मोहिनी स्वरूप ने देवताओं की सहायता की- हम सभी समुद्र मंथन के बारे मे कहीं न कहीं सुना होगा। जब देवताओं और राक्षसों ने समुद्र मे कहीं छुपे अमृत के बारे मे जाना तो उन दोनों ने ही उसे प्राप्त करने की सोची लेकिन केवल एक वर्ग के द्वारा समुद्र मंथन करना संभव नहीं था। अतः उन दोनों ने निर्णय लिया एक साथ समुद्र मंथन करने का।

समुद्र मंथन मे अन्य ने भी सहयोग किया जिसमे मंदार पर्वत श्रेणी ने मथनी का काम करने के लिए अपना सहयोग दिया और वासुकि नाग को रस्सी की जगह उपयोग किया गया। वहीं भगवान विष्णु ने भी कच्छप अवतार धरण कर मंथन हेतु एक स्थिर आधार देने मे सहयोग किया।

देवताओं और राक्षसों मे ये निर्णय हुआ कि सभी बारी बारी से निकालने वाली चीज को आपस मे बाटेंगे। जिसमे से कुल 14 दिव्य द्रव्य प्राप्त हुए और सबसे पहले हलाहल विष निकाला जिसे कोई भी लेने को तैयार नहीं हुआ अंततः स्वयं भगवान महादेव ने हलाहल को अपने कंठ मे धरण कर समस्त सृष्टि की रक्षा ही। उसी क्रम मे माता लक्ष्मी का भी उद्भव हुआ जिसे भगवान विष्णु ने अपने पत्नी के रूप मे अपनाया।

सबसे अंत मे अमृत कलश लेकर भगवान धन्वन्तरी उत्पन्न हुए और जिसे देखते ही देवताओं और राक्षसों मे उसे पाने के लिए होड मच गई। दोनों के बीच संघर्ष होने लगा अमृत ग्रहण करने के लिए। देवताओं मे डर भी था यदि राक्षस गण अमृत को ग्रहण कर लेते है तो वो और शक्तिशाली हो जाएँगे और इस सृष्टि का संचालन सही ढंग से नहीं होने देंगे।

सारी समस्या ज्ञात होने के उपरांत भगवान विष्णु ने इससे मुक्ति दिलाने हेतु मोहिनी रूप धरण किया और राक्षसों को रिझाते हुए सबको बारी बारी से अपने हाथों से अमृत पिलाने का निर्णय लिया। और उन्होने सबसे पहले देवताओं को अमृत पान कराया उन्ही राक्षसों मे एक राक्षस ने छल करके देवताओं का रूप धारण कर अमृत पान कर लिया और जैसे ही भगवान विष्णु को इस बात का संगयन हुआ उन्होने अपने सुदर्शन चक्र से उसका सिर धड़ से अलग कर दिया जिसे हम राहू केतू के रूप मे जानते है।

इस प्रकार से भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण करके देवताओं को अमृत पान करा कर उन्हे अमर बना दिया और राक्षसो को उससे वंचित कर सृष्टि मे उथल पुथल होने से बचाया।

जब मोहिनी स्वरूप ने भगवान शिव की रक्षा की- भगवान विष्णु के मोहिनी अवतार से जुड़ी एक और प्रसिद्ध कथा है जिसमे उन्होने भगवान शिव की सहायता की। हम सभी जानते है भगवान शिव अपने भक्तों से बहुत ही जल्दी प्रसन्न हो जाते है। और उन्हे कोई भी वरदान दे देते है। इसी लिए उन्हे भोले नाथ कहा जाता है।

एक समय की बात है भष्मासुर नाम का एक राक्षस था उनसे अमर होने के लिए भगवान शिव की घोर तपस्या की। उसकी तपस्या से खुश होकर भगवान शिव प्रकट हुए और उससे वरदान मांगने को कहा सबसे पहले उसने अमरता का वरदान मांगा जिसके बदले मे भगवान शिव ने कुछ और वर मागने को कहा। उसने पुनः वर मांगा कि जिस किसी के सिर पर अपना हाथ रखे वो वही भष्म हो जाये भगवान शिव ने तथास्तु कह कर उसकी इच्छा पूरी कर दी।

अब भष्मासुर ने कहा मुझे कैसे मालूम कि मेरी इच्छा पूर्ण हो गई इसका परीक्षण करना होगा जिसके लिए मै सबसे पहले आपके सिर पर हाथ रख कर देखुंगा कि मेरा वरदान सही है या नहीं। भष्मासुर की बातें सुनकर शिव जी अचंभित हुए और वहाँ से जाने लगे लेकिन भष्मासुर ने उनका पीछा नहीं छोड़ा वो भी भगवान शिव के पीछे हो लिया।

भगवान शिव को कोई भी उपाय नहीं सूझ रहा था उन्होने भगवान विष्णु का ध्यान किया और भष्मासुर से मुक्ति दिलाने को कहा। इसपर भगवान विष्णु मोहिनी का रूप धरण कर के भष्मासुर के पास आए और उसे मोहित कर लिया। मोहित कर के भगवान विष्णु ने भष्मासुर से कहा कि मुझे तुम्हारे साथ नृत्य करना है। क्या तुम तैयार हो इस पर भष्मासुर ने हामी भर दी।

मोहिनी के मोह वश भष्मासुर मोहिनी द्वारा किए जा रहे नृत्य के सभी चरणों को दोहरने लगा इसी क्रम मे एक चरण मे मोहिनी ने अपना हाथ अपने सिर पर रखा और जैसे ही भष्मासुर ने अपना हाथ अपने सिर पर रखा वो स्वयं ही भष्म हो गया। इस प्रकार से मोहिनी ने भगवान शिव को इस संकट से मुक्त किया।

एक मान्यता ये भी है कि भगवान शिव मोहिनी से इतना प्रसन्न हुए कि उनको अपने पत्नी के रूप मे अपनाने का प्रस्ताव रखा और शिव और मोहीं से एक पुत्र का जन्म भी हुआ जिसे हम भगवान अयप्पा के नाम से जानते है। जो कि दक्षिण भारतीय राज्यों मे बहुत ही पूजनीय है।

तो दोस्तों कैसे लगी आप लोगो को भगवान विष्णु के मोहिनी अवतार के दोनों प्रसंग हमे अवश्य बताए।
धन्यवाद

||इति शुभम्य||

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