मर्यादा पुरुषोत्तम राम: एक आदर्श पुरुष की परिभाषा

भारतीय हिन्दू संस्कृति में मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम (Maryada purushottam ram) एक पूजनीय नाम है। राम को भारतीय समाज में एक आदर्श पुत्र, आदर्श राजा, आदर्श भाई, आदर्श पति (कुछ अपवादों को छोडकर) के रूप देखा जाता है।

केवल भारतीय समाज में ही नहीं बल्कि अन्य कई देशों में भी राम के स्वरूप एवं रामायण के विषय पर आधारित कई कहानियाँ, और ग्रंथ विख्यात है। तो यही हम जानने की कोशिश करेंगे कि क्या कारण है जो राम को मर्यादा पुरुषोत्तम एवं आदर्श पुरुष की परिभाषा के रूप में जाना जाता है।

विष्णु अवतार: राम और कृष्ण-

हम सभी जानते हैं कि राम (maryada purushottam ram) भगवान विष्णु के सातवें अवतार के रूप में जाने जाते है, भगवान विष्णु के कुल 10 अवतारों का वर्णन तमाम धार्मिक ग्रन्थों के द्वारा हमें प्राप्त होता है। पर इन 10 अवतारों में केवल राम और कृष्ण के अवतार ही आज हमारे भौतिक जगत में ज्यादा लोकप्रिय है।

ये दो अवतार ही सर्व समाज से जुड़े हुए दिखते है। अब अगर बात करें इन दो अवतारों की तो राम और कृष्ण के जीवन शैली में बहुत ही अंतर देखने को मिलता है। राम जिनका स्वभाव बहुत ही शांत होता है जबकि कृष्ण बहुत ही नटखट, चंचल स्वभाव के माने जाते है।

ऐसे ही बहुत ही अंतर इन दोनों ही स्वरूपों में देखने को मिलता है। अगर कृष्ण के जीवन शैली में देखा जाये तो वो हमेशा चंचलता से भरे हुए गायन नृत्य इत्यादि मे मग्न, गोकुल वासियों के साथ मिलकर एक सामान्य जन के गुण दिखाई देते है वहीं राम (maryada purushottam ram) का जीवन गंभीर स्वभाव के व्यक्ति का गुण दिखाई देता है।

कृष्ण कि लीलाओं में हमे देखने को मिलता है कि वह छल इत्यादि का भी प्रयोग किया करते थे। लेकिन राम एक व्यक्ति को जीवन में जिन आदर्शों का पालन करना होता था उसका पालन करते थे, इन्ही आदर्शो का पालन करते हुए इनके लिए गए कुछ निर्णयों के कारण इनमें कमियाँ ढूंढते है।

यहाँ मै राम (maryada purushottam ram) और कृष्ण के जीवनशैली कि तुलना करके किसी की कमियाँ नहीं दिखा रहा दोनों लोगो का जीवन जन कल्याण के लिए ही था। बल्कि मै दिखाना चाहता हूँ कि किस प्रकार राम हमेशा एक आदर्श पुरुष के जीवन शैली का अनुशरण करते थे इसीलिए इन्हे आदर्श पुरुष के रूप मे देखा जाता है।

राम का मर्यादित आदर्श जीवन काल-

सर्व प्रथम गोस्वामी तुलसीदास जी ने श्री राम को मर्यादा पुरुषोत्तम (maryada purushottam ram) कहा। तो आइये देखते है श्री राम के जीवन के ऐसे प्रसंग जिसके द्वारा उनको मर्यादा पुरुष के रूप में देखा जाता है। हम इसे क्रमानुसार देखेंगे।

बाल्यकाल से शुरू करें तो जब ब्रह्मर्षि विश्वामित्र उनके द्वारा किए जा रहे यज्ञों इत्यादि की रक्षा के लिए श्री राम को लेने आए तो महाराज दसरथ एवं स्वयं श्रीराम (maryada purushottam ram) ने बिना कुछ सोचे विचारे उनके साथ जाने को तैयार हो गए। इसके बाद जनकपुरी में बिना गुरु की आज्ञा के धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाने हेतू नहीं आगे बढ़े। एक मर्यादित पुरुष के अनुरूप न तो इन्होने अपने अदम्य साहस का प्रदर्शन और न ही घमण्ड किया।

श्रीराम जब विवाह उपरांत अयोध्या पहुंचे तो उनके राज्याभिषेक होना तय हुआ तथा रानी कैकेयी अपनी दासी मंथरा के बहकावे में आकार राम के लिए 14 वर्ष का वनवास और अपने पुत्र के लिए राजगद्दी की मांग की इस प्रसंग में भी राम ने एक मर्यादित पुरुष का आचरण रखते हुए बिना किसी झिझक के सहर्ष वनवास के तैयार हो गए। वन गमन उपरांत भी ऐसे कई प्रसंग है जैसे निषाद राज गुह से विनम्रता पूर्वक गंगा के उसपार जाने हेतु निवेदन एवं एक सच्चे मित्र जैसे सुग्रीव जैसे मित्र का सहयोग दिया।

शबरी के जूठे बेरों को सप्रेम ग्रहण करना, समुद्र के उस पार जाने हेतू समुद्र से निवेदन करना, एक शत्रु के भाई को जिसे शरण की आवश्यकता थी उन्हे प्रेम पूर्वक अपना लिया जाना और रावण के वध उपरांत लक्ष्मण को उनके पास भेजकर एक महान पंडित से ज्ञान ग्रहण करने को कहना। उपरोक्त उदाहरण के अतिरिक्त ऐसे बहुत सारे प्रसंग हैं जो श्रीराम को एक मर्यादित पुरुष सिद्ध करते है।

वर्तमान समय में मर्यादा पुरुषोत्तम राम (maryada purushottam ram) के जीवन आदर्श की प्रासंगिकता-

वर्तमान समय में यदि देखा जाये तो लोगो के मध्य प्रेम, सद्भावना, आदर, सम्मान इत्यादि का निर्णय लोगो के पद, प्रतिष्ठा, धन-वैभव आदि के आधार पर किया जाता है। श्री राम (maryada purushottam ram) ने मर्यादित पुरुष का आचरण करते हुए लोगो में विभेद नहीं किया।

तो यह कहना गलत नहीं होगा कि वर्तमान समय में बहुत ही अधिक आवश्यकता है, लोगो के बीच जिस प्रकार से असहिष्णुता पनप रही है, लोभ इत्यादि में बंधे हुए लोग जो जीवन जी रहे है। उसके लिए मर्यादा पुरुषोत्तम राम के जीवन का अनुशरण बहुत ही आवश्यक हो गया है। राम को जानने के लिए उनके जीवन के आदर्शों को जानना बहुत ही आवश्यक है और तो और राम की सच्ची भक्ति उनके प्रति सच्ची श्रद्धा उनके आदर्श जीवन का अपने जीवन में अनुशरण करने से होगा।

!इति शुभम्!

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