महाकाल नगरी उज्जैन दर्शन- प्रमुख दर्शनीय स्थल

मध्य प्रदेश राज्य के उज्जैन जिला जिसे महाकाल की नगरी के नाम से भी जाना जाता है। भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों मे प्रमुख श्री महाकाल प्रभु ज्योतिर्लिंग के कारण इसे महाकाल नगरी का नाम प्रदान किया गया। उज्जैन नगरी का नाम सप्त पूरियों मे से भी एक है। जिसे अवंतिका के नाम से जाना जाता है।

जो कभी महाराजा विक्रमादित्य की राजधानी के रूप मे भी जानी जाती है। मंदिरों और घाटों से जुड़ी हुई इस धार्मिक नगरी मे एक शांति और सुकून का एहसास होता है। आज हम बात करेंगे महाकाल नगरी उज्जैन के प्रमुख दर्शनीय स्थलों की जहां जाकर आप आध्यात्मिक और आत्मिक शांति का अहसास करेंगे। तो फिर शुरू करते है अपने इस वर्चुअल आध्यात्मिक सफर को।

सर्वप्रथम महाकाल दर्शन-

उज्जैन नगरी की यात्रा का प्रथम और मूल उद्द्येश्य ही होता है बाबा महाकाल के दर्शन करने का। वैसे तो हमे महाकाल का दर्शन पूरे दिन मिलना सुलभ रहता है लेकिन सुबह की भस्मार्ती का सम्पूर्ण दर्शन बहुत ही दिव्य और अलौकिक होता है।

चूंकि वहाँ सीमित जगह होती है इसलिए प्रशासन द्वारा रोज कुछ लोगो को ही ये दर्शन सुलभ होता है इसके लिए हमे एक दर्शन पर्ची कटानी होती है जिसे आप मंदिर प्रांगण मे भी कटा सकते है लेकिन अच्छा होगा आप अपनी यात्रा आरंभ करने से पहले ही वो पर्ची बनवा ले।

उसके लिए आप उनकी ऑफिसियल वैबसाइट पर जाकर बुक कर सकते है। भस्मार्ती के दर्शन हेतु कुछ निर्देश होते है जिसका पालन करना अति आवश्यक होता है। प्रातः काल स्नान उपरांत ये दर्शन बहुत ही मनमोहक होता है।

रामघाट दर्शन-

महाकाल मंदिर से कुछ ही दूरी पर पैदल यात्रा के जरिये हम रामघाट के दर्शन कर सकते है ये वही घाट है जहां सुप्रसिद्ध उज्जैन के महाकुंभ स्नान का आयोजन किया जाता है। क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित रामघाट मनमोहक खूबसूरती देखने ही लायक है।

शाम को होने वाली क्षिप्रा आरती भी बहुत ही दिव्य है। और पूरे दिन नदी के बीच मे बने नदी को छूते हुए छोटे  छोटे पुल पर विचरण बहुत ही आनंद दायक होता है। यहाँ पर विहार के उपरांत मन प्रफुल्लित हो जाता है।

हरसिद्धि माता दर्शन-

महाकाल मंदिर से लगभग 200 मीटर की दूरी पर हरसिद्धि माता का मंदिर बहुत ही प्रसिद्ध है। यहाँ माता अन्नपूर्णा के रूप मे विराजमान है इनके साथ ही माता लक्ष्मी और सरस्वती की प्रतिमा भी विराजमान है। साथ ही साथ मंदिर प्रांगण मे श्री यंत्र की भी स्थापना की गई है।

शाम को यहाँ की आरती का दर्शन देखते ही बनता है। शाम की आरती मे मंदिर प्रांगण मे स्थित दो विशाल दीप स्तम्भ मे हजारो दीप का प्रज्ज्वलन किया जाता है जो हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करता है। हरसिद्धि माता की गणना प्रमुख शक्ति पीठों मे भी होती है। यहाँ माता सभी भक्तों को सुख समृद्धि का वरदान प्रदान करती है।

बड़ा गणेश मंदिर-

बड़ा गणेश मंदिर महाकाल मंदिर के बगल मे ही स्थित है। यहाँ भगवान गणेश की विशाल प्रतिमा स्थित है। जो भी भक्त भगवान महाकाल का दर्शन करता है उसके पश्चात बड़ा गणेश मंदिर के दर्शन अवश्य करता है। इस मंदिर की स्थापत्य और यहाँ की प्रभु की प्रतिमा मनमोहक है।

इस मंदिर मे ज्योतिष और संस्कृत विद्या भी वैदिक रीति रिवाजो से प्रदान की जाती है। और यहाँ हम बहुत सारे बटुक जिन्हे यहाँ के विद्यार्थी के रूप मे जाना जाता है, को संस्कृत और ज्योतिष की शिक्षा प्राप्त करते हुए देख सकते है।

चिंतामन गणेश-

महकाल मंदिर से करीब 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। चिंतामन गणेश का मंदिर मान्यता है इस मंदिर मे भगवान गणेश की प्रतिमा स्वयं स्थापित हुई थी। और दूर दूर से भक्त इनके दर्शन करने के लिए आते है।

बुधवार के दिन विशेष पूजन हेतु लोग इस मंदिर मे अपनी चिंता के निवारण हेतु आते है। यहाँ पर भगवान गणेश की 3 प्रतिमाएँ स्थापित है। जिनमे प्रथम चिंतामन गणेश स्वरूप, द्वितीय इच्छामन गणेश स्वरूप और तृतीय सिद्धिविनायक गणेश स्वरूप स्थापित है। जैसा की इनके नाम से ही पता चलता है इनके दर्शन मात्र से भक्त चिंतामुक्त हो जाते है।

मंगलनाथ मंदिर-

उज्जैन नगरी के बाहरी छोर पर स्थित मंगलनाथ मंदिर गृह शांति पूजन  इत्यादि के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ जाने के लिए ऑटो इत्यादि बुक करके जाया जा सकता है। यहाँ श्रद्धालु ग्रह पूजन और शांति के लिए बड़े दूर दूर से आते है।

नव ग्रहों के पूजन इत्यादि का यहाँ विशेष प्रावधान है। जिनके जीवन मे ग्रह इत्यादि से कोई अडचन या परेशानी आ रही होती है वो यहाँ आकार पूजन उपरांत अपने कष्टों का निवारण करते है।

काल भैरव मंदिर-

महाकाल मंदिर के बाद अगर सबसे प्रसिद्ध मंदिर की बात की जाये तो काल भैरव मंदिर का नाम आता है। यहाँ रविवार का दर्शन सबसे प्रमुख दर्शन के रूप मे माना जाता है। काल भैरव को भगवान शिव के ही अवतार के रूप मे जाना जाता है।

और यहाँ के दिव्य दर्शन हेतु बहुत दूर दूर से श्रद्धालु आते रहते है। काल भैरव मंदिर महाकाल मंदिर से लगभग 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और यहाँ बाबा काल भैरव को मदिरा चड़ाने का प्रावधान है। काल भैरव के दर्शन मात्र से मान्यता है कि आपके समस्त कष्टो का नाश हो सकता है और जीवन मे आ रही परेशानियाँ दूर हो जाती है।

अन्य स्थल-

उपरोक्त प्रमुख स्थानो के अलावा बहुत सारे स्थान है जो देखने लायक है। जिनमे सबसे प्रसिद्ध है जंतर मंतर जिसे महाराजा सवाई जय सिंह ने बनवाया था। ये देश के चार प्रमुख जंतर मंतर मे से सबसे प्राचीन जंतर मंतर मे से एक है। इसके साथ ही कई नये मंदिर जिनमे शनि मंदिर कई घाट इत्यादि के दर्शन का अलग ही महात्म्य है। और उज्जैन भ्रमण मे इन सभी प्रमुख स्थलो के दर्शन से एक आध्यात्मिक शांति की प्राप्ति होगी।

निष्कर्ष 

महाकाल नगरी उज्जैन के दर्शन को प्रति वर्ष दूर दूर से लोग आते है। और आत्मिक शांति की प्राप्ति करते है। 12 ज्योतिर्लिंगों मे से एक मात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग के दर्शन यहाँ प्राप्त होता है। यहाँ प्रति वर्ष श्रावण मास मे दर्शन पूजन का अलग ही महात्मय है तथा प्रति वर्ष इसे उत्सव के रूप मे मनाया जाता है।

साथ ही चार प्रमुख कुम्भ स्नानों मे से एक स्नान का आयोजन भी उज्जैन नगरी मे क्षिप्रा के तट पर होता है जिसमे विश्व भर से श्रद्धालु और आगंतुक आनंद और आध्यात्मिक ज्ञान की प्राप्ति हेतु आते है। साथ ही साथ महाकाल की सवारी और काल भैरव की सवारी उत्सव का आयोजन प्रति वर्ष बड़े धूम धाम से मनाया जाता है।

तो एक बार अवश्य इसका अनाद ले। सभी प्रमुख रेल स्टेशन से यहा के लिए ट्रेन उपलब्ध है तथा रहने हेतु भी यहाँ सुविधाए उपलब्ध है। एक बार के दर्शन मात्र से दुबारा यहाँ अवश्य आने का मन करेगा। और एक आध्यात्मिक अनुभव का लाभ प्राप्त होगा।

||इति शुभम्य||

Leave a Comment