कोरोना महामारी एवं जीवनशैली मे बदलाव

आज का विषय बहुत ही ज्वलंत विषय है। Covid-19 या आम बोलचाल की भाषा मे बोले तो कोरोना वाइरस ने सम्पूर्ण विश्व मे अपना कहर बरपा रखा है। कोई भी देश इससे अछूता नहीं है। ये महामारी अभी कितने समय तक हमारे जन जीवन को अस्त व्यस्त रखेगी, ये बताने का काम तो चिकित्सा विशेषज्ञों का है लेकिन सामान्य भाषा मे बोले तो जब तक कोई Vaccine या कोई दवा नहीं बन जाती तब तक इस महामारी से हमे डरने की आवश्यकता है। और बचाव ही एक मात्र साधन है इस महामारी से दूर रहने की। तो अब हम आते है अपने विषय पर कि इस महामारी के हमारे जीवन शैली पर क्या प्रभाव होगा और हम सब जानते है कि ये हमारे जीवन मे एक गहरा प्रभाव बनाएगी जिसका असर बहुत ही अधिक समय तक देखने को मिलेगा। और पूर्व मे चली आ रही हमारी जीवन शैली आगे आने वाली हमारी जीवन शैली से बहुत ही ज्यादा प्रभावित होगी। इस परिवर्तन को जानने के लिए हम दो पक्षों को देखेंगे एक तो समाज के द्वारा हमारे जीवन पर प्रभाव और द्वितीय हमारे द्वारा हमारे जीवन मे बदलाव।

सामाजिक परिवर्तन

Corona Virus के प्रभाव के कारण जो परिवर्तन समस्त विश्व मे देखने को मिलता है वो है हमारे सामाजिक जीवन मे बदलाव पिछले 1 से 2 महीने के मध्य जो बदलाव हम देख रहे है उसके बारे मे हमने कभी सोचा भी नहीं होगा। क्योंकि ऐसी जीवन शैली की हमने कभी कल्पना भी नहीं किया होगा। हमारा सामाजिक जीवन जिस प्रकार से परवर्तित हुआ है वो हमारे द्वारा खुद से परिवर्तित नहीं हो सकती थी कई छोटे छोटे पहलू है जिनमे बलाव देखने को मिल रहा है। कुछ सामाजिक परिवर्तन तो ऐसे भी है जिनहे कभी हम अपनाने को तैयार नहीं थे और आज उसे खुशी खुशी या फिर मजबूरी वश अपनाने को विवश है। जिनमे से कुछ इस प्रकार से है।

अपनों की पहचान: इस महामारी ने जिस प्रकार से लोगो पर परेशानियों की वर्षा की है। उससे तय है कि लोगो को एक दूसरे की मदद की आवश्यकता रही है। चाहे मानसिक रूप से, आर्थिक रूप से या फिर किसी अन्य रूप से। और इस जरूरत ने लोगो को बताया की कौन अपना है और कौन पराया आज इस मुश्किल वक्त मे जिन लोगो ने एक दूसरे की मदद की और जो लोग मदद करने से मुकर गए उनकी पहचान हो गई। कितने ही उदाहरण देखने को मिलता है कितने ही लोगो ने मानवता का धर्म दिखते हुए समाज को सहायता देने मे बहुत ही योगदान दिया। चाहे वो पुलिस के लोग हो जिन्होने कानून व्यवस्था बनाए रखते हुए लोगो को आवश्यक वस्तुए भी पहुंचाई बुजुर्गो को दवाइयाँ इत्यादि पहुंचाई या फिर वो स्वास्थ्यकर्मी हो जिन्होने अपने जीवन की परवाह न करते हुए अपने परिवार से दूर रहते हुए अपनी सेवाए देते रहे। वही उन लोगो की भी पहचान हुई जिन्होने विशेषज्ञ होते हुए भी अपनी सेवाए देने से दूरी बना लिए और समाज का बिलकुल भी नहीं सोचा।

दिखावे की दुनिया की पहचान: आज इस मुश्किल दौर मे सभी जानो को पता चल गया कि जिस दिखावे की दुनिया की तरफ हम आकर्षित होते थे उनसे हमारा मोहभंग हो चुका है। जिस चमकीली दुनिया को देखकर हम उसे अपने जीवन की आवश्यकता समझते थे आज हमे समझ आ रहा है कि ये चमकीली दुनिया हमारी आवश्यकता नहीं थी। बस एक मोह वश हम इसके जाल मे फंसे हुए थे। जो आडंबरी जीवन हमे बहुत ही सभ्य और सुव्यवस्थित समाज की परिभाषा के रूप मे बताई जाती थी आज हमे समझ आ रहा है। वो आडंबरी जीवन केवल और केवल भ्रम मात्र है उसके बगैर भी बहुत ही अच्छी जीवन शैली हम जी सकते है।

शहरीकरण से मोहभंग: इस महामारी ने जो बदलाव सबसे ज्यादा हमारे मन मस्तिष्क मे लाया है। वो है शहरीकरण से हमारे अंदर मोहभंग से। पिछले कुछ दिनों से जो कुछ भी हमारे देश मे देखने को मिल रहा है। बड़े बड़े शहरो और महानगरो मे रहने वाले लोग किस प्रकार से इन शहरो से अपने गाँव जाने के लिए आतुर है। और जिस प्रकार के सपने लेकर यहा आए थे उनको इस मुश्किल घड़ी मे टूटते हुए नजर आ रहे है। अपना जीवन अच्छे जीवन शैली की तलाश मे यहा आए थे और आज यहा सर्वश्व खत्म होता नजर आ रहा है और उन्हे अपनी गाँव की तरफ जाने को विवश कर रहा है। इससे लग रहा है कि इनका इस शहरीकरण मे कोई मोह नहीं बच पा रहा है। और आने वाले कई वर्षो तक इन्हे इस परिवेश से दर लगता रहेगा। जिस जीवन शैली को उत्तम जीवन शैली समझ कर हजारों किलोमीटर दूर इन शहरों मैं ये आए आज यही महानगर और शहर इनको दो जून की रोटी के लिए मोहताज रख रही है और उस साधारण ग्रामीण जीवन कि याद साता रही है।

पारंपरिक जीवन शैली की ओर पलायन: आने वाले समय मे हम पुनः अपनी पारंपरिक जीवन शैली की ओर जाएँगे और इस आधुनिक जीवन शैली को हम त्यागने का प्रयास करेंगे। आज पुनः हम योग कि ओर बढ़ रहे। खाने पीने मे भी हम आधुनिक और पश्चिमी खाद्य पदार्थों को त्याग देंगे और पारंपरिक खाद्य पदार्थो को अपने जीवन मे अपनाएँगे। सामाजिक सम्मेलनों मे भी Buffet सिस्टम को छोडकर लोग बैठकर खाने की परंपरा को अपना सकते है। दिखावे के कारण विवाह इत्यादि जैसे सामाजिक समारोहो मे अथाह धन खर्च करने की परंपरा का त्याग करेंगे। इस महामारी ने परिवार के सदस्यों को एक दूसरे को समझने का समय दिया है जो की पहले नहीं था लोगो के पास। लोग एक दूसरे से भावनात्मक रूप से जुड़ेंगे। जीवन मे असल मे किन चीजों का महत्व है उन्हे समझेंगे। जिस प्रकार आज तक लोग केवल भौतिक संसाधनो को ही खुशी के रूप मे देखते थे वो भी आज परिवार, समाज, प्रेम, एकजुटता इत्यादि के महत्व को अनुभव करेंगे।

आर्थिक परिवर्तन

सामाजिक परिवर्तन के बाद यदि जो सबसे बड़ा परिवर्तन इस वैश्विक महामारी के कारण देखने को मिलेगा तो वो होगा आर्थिक परिवर्तन। आज जिस प्रकार से वैश्वीकरण के कारण समस्त विश्व के अर्थ जगत मे बदलाव और गिरावट देखने को मिल रहा है, वो अब एक नए बदलाव की मांग कर रहा है। जिस प्रकार से हम देख रहे है कि लोग आर्थिक रूप से टूटते जा रहे है, अर्थ जगत एक बड़े भँवर मे फंस चुका है। उसमे एक परिवर्तन की आवश्यकता है। इसके लिए हमे अपनी आत्मनिर्भरता को बढ़ाने की आवश्यकता होगी किसी अन्य देशों पर निर्भरता को कम करने की जरूरत होगी। देशी तकनीकी, देशी संसाधनों इत्यादि को बढ़ावा देने की आवश्यकता होगी। जिस प्रकार से इस देश के करोड़ो जनसंख्या आने वाले समय मे रोजगार से वंचित होगी उससे हमे सीखना होगा कि लोगो को प्रवासी बनाने के बजाय समस्त राज्य अपने नागरिकों को उनके क्षेत्र मे ही आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास करें। कुछ महानगरो मे ही समस्त परिवर्त्तन और विकास करने के बजाय देश के हर छोटे से छोटे क्षेत्र मे विकास करने की आवश्यकता है।

राजनीतिक परिवर्तन

हम एक लोकतन्त्र मे रहते है और सरकार ही हमारे अच्छे बुरे का ख्याल रखती है। और जहां बात सरकार की हो वहाँ राजनीति की बात करना अनिवार्य है। और इस वैश्विक आपदा हमारे समाज मे कुछ राजनीतिक परिवर्तन भी लाने का प्रयास करेगी। आज के समय को देखते हुए हम देख सकते है कि आज एकजुटता दिखने की आवश्यकता है और यह आवश्यकता हमारे राजनीतिक जीवन मे के लिए भी आवश्यक तत्व है। हमारी सरकार को इस देश के समस्त जन समूह के हितों के बारे मे सोचना पड़ेगा। उन्हे आत्मनिर्भर बनाने की आवश्यकता होगी। समस्त राजनीतिक पार्टियों को आपसी मतभेद को भूलकर जन मानस के हित और कल्याण के बारे मे सोचना पड़ेगा। रोजगार की व्यवस्था, लोगो के अपने गृह नगर से पलायन को रोक्न होगा जिसके लिए देश के हर क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने की आवश्यकता होगी। यह महामारी हमे अपनी कमियाँ दिखाने का कार्य भी कर रही है। और इन कमियों को सहर्ष अपना कर इनको दूर करने का प्रयास करना होगा। तभी हम एक नए भारत की ओर बढ़ पाएंगे।

अन्य महत्वपूर्ण परिवर्तन

उपरोक्त परिवर्तनों के साथ साथ हमे कुछ महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिलेगा अथवा परिवर्तन की आवश्यकता है। इस मुश्किल दौर ने हमारे तीन महत्वपूर्ण क्षेत्रों की कमियों को हमारे सामने ला दिया है। जो है रोजगार, शिक्षा व्यवस्था, और चिकित्सा व्यवस्था। बात करें रोजगार की तो अगर बड़े महानगरों को छोड़ दे तो बहुत सारे क्षेत्र है जहां न तो शिक्षक विद्यार्थी के औसत का पालन हो रहा है और न ही शिक्षण के आदर्शों का प्रयोग हो रहा है। कहीं शिक्षकों की कमी है तो कहीं बहुत सारे राज्यों मे पुस्तकालय, प्रयोगशाला जैसे महत्वपूर्ण शिक्षण के संसाधनो की कमी है। लोग डिग्रियाँ इत्यादि तो बड़ी आसानी से प्राप्त कर रहे है लेकिन बहुत सारी कमियों के साथ कैसे प्राप्त कर रहे है इस पर एक सवाल बन सकता है। अब बात करे रोजगार का तो हमारे देश की बहुत सारी जनसंख्या गरीबी मे जी रही है। लोग अपने मूल निवास से पलायन को मजबूर है। कृषि के महत्व को हम नहीं समझ रहे है जबकि हमारी सबसे प्रमुख आवश्यकता खाद्यान है। अब बात करे यदि चिकित्सा व्यवस्था की तो हमारी जनसंख्या के हिसाब से हमारे देश मे चिकित्सा सुविधा बहुत ही बुरे हालत मे है। जिस प्रकार से आज के समय मे संसाधनो की कमी दिख रही है। सारी आत्मनिर्भरता सरकारी सुविधाओं पर है हम देख सकते है की इसमे बहुत ही ज्यादा परिवर्तन करने की आवश्यकता है। जिससे आने वाले समय मे हम आज जैसी परिस्थिति से निपटने मे सक्षम रहे।

निष्कर्ष

इंसान अपने को सर्वशक्तिशाली समझते आया है लेकिन उसे समझना चाहिए कि जिस पारिस्थितिकी मे वो रहता है। वही सबसे शक्तिशाली है जिसे प्रकृति कहते है। आज प्रकृति ने हमे समझा दिया यदि उसे आवश्यकता होगी तो वो कभी भी परिवर्तन कर सकती है। इंसान के सभी कार्य प्रकृति से विरुद्ध रही है। कहीं न कहीं वो खुद को इस सर्वश्रेष्ठ मानता है। और प्रकृति के विरुद्ध ही अपनी कार्यशैली रखता है। इसका दुष्परिणाम आज उसे देखने को मिल रहा है। और समस्त विश्व जिसमे अपने आप को सर्वश्रेष्ठ मानने वाले देश भी अपने आप को लाचार स्थिति मे देख रहे है। तो हम इंसानों को समझना होगा कि हमे अपनी जीवन शैली प्रकृति के अनुरूप रखना होगा। जिस प्रकार कहा गया है कि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है उस प्रकार से इस समाज को सुव्यवस्थित रूप मे ही हमे इस समाज का संचालन करना होगा। तभी हम एक खुशहाल जीवन और समृद्ध समाज की परिकल्पना कर सकते है। हमे अपने अंदर बदलाव लाना होगा दिखावे की दुनिया से मुंह मोड़ना होगा। और आदरश पारंपरिक जीवन को अपनाना होगा तभी हम इस प्रकृति द्वारा अपनाए जाएँगे और हमे इस सुंदर और समृद्ध धरती पर जीवन यापन का अधिकार प्राप्त होगा।

||इति सुभम्य||

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