महाभारत: श्रीकृष्ण द्वारा कलियुग का वर्णन

बात उन दिनों की है जब पांडवों ने कौरवो के साथ चौपड़ खेला था और अपना सबकुछ उसमे गवा दिया। द्रौपदी का चीरहरण हुआ। और पांडवों को बारह वर्ष का वनवास और एक वर्ष का अज्ञातवास की सजा मिली। सबकुछ हारने के बाद पांडव वनवासी का वेश लेकर अपने पत्नी और माँ के साथ वन की ओर प्रस्थान करने लगे। वन गमन से पहले उन्होने श्री कृष्ण से विदा लेने को उनके पास गए। श्री कृष्ण के पास पहुँचकर उन्होने उन्हे प्रणाम किया और उनसे प्रश्न किया कि हे माधव हमे क्यों इतना कष्ट का सामना करना पड़ता है। हमने ऐसे क्या बुरे कर्म किए है कि आज हमे बारह वर्ष वनवास की और एक वर्ष अज्ञात वास की सजा मिली है।

इसपर श्री कृष्ण बोलते है। इसमे तुम्हारा कोई दोष नहीं है। बल्कि ये सबकुछ कलियुग के प्रभाव के कारण है। हम लोग अभी द्वापर युग के अंतिम चरण मे है। और इसपर कलियुग का प्रभाव दिखना शुरू हो गया है। इसपर पांडवों ने कहा कि कलयुग का प्रभाव इतना बुरा होता है कृपया हमे विस्तार से कलयुग के बारे में बताए। श्री कृष्ण बोलते है कि कलियुग में सत्य असत्य, उचित अनुचित, ज्ञानी मूर्ख इन सब की परिभाषा बादल जाएगी। आज समय के अनुसार ना होकर कलियुग में सबकुछ दिखावे के रूप में होगा। और यदि विस्तार के साथ कलियुग के बारे में जानना है तो तुम पांचों भाई वन में जाओ। और वहाँ से वापस आकार जो कुछ भी तुम पांचों भाई को आश्चर्यजनक लगे वो मुझे बताओ उसके आधार पर मै तुम्हें कलियुग का वर्णन करूंगा।
श्री कृष्ण से आज्ञा पाकर पांचों भाई वन की ओर प्रस्थान करते है। और अपने अपने मार्ग की ओर आगे बढ़ते है। उन पांचों भाइयों को अपने अपने मार्ग पर कुछ ना कुछ आश्चर्यजनक दिखता है। और वापस आकार श्री कृष्ण से उसका वर्णन करते है जिसके आधार पर माधव कलियुग के प्रभावों का विस्तार से वर्णन उन लोगो को करते है।


1. दो शुंडो वाला हाथी (Elephant with two trumpet)


सर्वप्रथम युधिष्ठिर ने मादव को प्रणाम किया और उनके द्वारा देखी गई आश्चर्यजनक चीज का वर्णन किया। बोला हे केशव जब मै वन मे गया तो कुछ दूरी पर मुझे एक हाथी दिखाई पड़ा जिसके दो शुंड थे ये बहुत ही आश्चर्यजनक था। इसका क्या तात्पर्य है। इसपर श्री कृष्ण ने बोला हे धर्मराज दो सूंडों वाला हाथी कलियुग का इस प्रकार वर्णन करता है सुनो! हाथी विशालता और मजबूती का प्रतीक है एवं उसका सूंड शोषण का प्रतीक है। अतः कलियुग के प्रभाव के कारण समाज में जो भी वर्ग प्रतिष्ठित एवं सत्ताधारी होगा। वो अपने से नीचे तबके के व्यक्ति का भला ना करके बल्कि दुगनी रफ्तार से उनका शोषण करेगा। सत्ताधारी व्यक्ति अपनी प्रतिष्ठा एवं सम्मान की परवाह किए बगैर ही अपने से निम्न श्रेणी के व्यक्तियों का समाज में शोषण करेगा और उसे ग्लानि नहीं होगी बल्कि उसे प्रसन्नता का अनुभव होगा।


2. मीठे स्वरों वाला पक्षी (Bird with sweet voice)


इसके बाद अर्जुन की बारी आती है। उन्होने बोला हे माधव मैंने तो और भी आश्चर्यजनक चीज देखी। मैंने देखा एक कोयल जोकि बहुत ही मीठे सूरो में कुहूंक रहा है। उसके स्वरों से वेद मंत्रो का संचार हो रहा है। लेकिन उसके साथ ही देखा वो एक जिंदा खरगोश के मांस का बकषण कर रहा है। इसपर श्री कृष्ण बोलते है हे पार्थ तुमने जो देखा वो इस प्रकार कलियुग के प्रभावों का वर्णन करता है। यहा पर वो कोयल विद्वान और समाज में अच्छी बाते बोलने वाले लोगो का प्रातीक है। कलियुग का प्रभाव इस प्रकार से होगा कि जो व्यक्ति समाज में अच्छी अच्छी बातों के जरिये समाज में ज्ञान बाटने का प्रयास करेंगे वो अपने जीवन में ही उन बातों का अनुशरण नहीं करेंगे। उनकी बुद्धिमता उन व्यभिचारों दुर्व्यश्नों के सामने काम नहीं करेगी समाज को तो लगेगा की अमुक व्यक्ति बहुत ही ज्ञानी है। और समाज के अच्छे अनुचरण करने हेतु ज्ञान की बातें बताता है परंतु स्वयं ही उन बातों का अनुशरण वो नहीं करेगा और अपने इंद्रियों के वश में अनुचित मार्ग का ही चयन करेगा।


3. खाली कुआं (Well with no water)


तत्पश्चात भीम कहते है हे माधव मैंने तो बहुत ही आश्चर्यजंक चीज देखी। मैंने देखा एक स्थान पर बहुत सारे कुएं है। उनमे खूब सारा पानी भरा हुआ है। परंतु उनके मध्य एक कुआं स्थापित है। जिसने नाम मात्र भी जल नहीं है। और वो कुआं पूरी तरह से सूखा हुआ है। इसपर श्री कृष्ण बोलते है। हे महाबली भीम वो आस पास के भरे हुए कुएं हमारे सहयोगी और स्वजनो के प्रतीक है। जो तुमने देखा उसके अनुसार कलियुग के प्रभाव के कारण हमारे साथी हमारे रिश्तेदार, हितैषी हमारे मित्र समाज में कितने भी समृद्ध क्यों न हो। बिना किसी स्वार्थ के वो किसी का भी सहयोग नहीं करेंगे। वो अपने धन बल का प्रयोग दिखवे इत्यादि के लिए करेंगे लेकिन आवश्यकता होने पर किसी भी जरूरत मंद का सहयोग बिना किसी स्वार्थ के नहीं करेंगे। अर्थात जो भी धन समृद्धि लोगो के पास होगी उसका वो प्रयोग सद्मार्ग या किसी की सहता हेतु नहीं करेगे भले ही जरूरतमन्द व्यक्ति उनका कितना भी निकटतम ही क्यो न हो। लेकिन उस धन समृद्धि को वो अपने ऐशों आराम के लिए बिना विचारे ही दिखवे के लिए व्रत नष्ट करेंगे। या कहे लोग उनही को अपना मानेंगे जो उनके पद प्रतिष्ठा के बराबर या फिर उनकी स्वार्थों को पूरा करेंगे। किसी के अच्छे आचरण, बुद्धिमता, ईमानदारी, सदचरित व्यवहार का समाज में कोई भी महत्व नहीं होगा।


4. गाय और बछड़ा (Cow with calf)


इसके बाद नकुल श्री कृष्ण को प्रणाम करके अपनी बात रखते है। हे केशव मैंने जो देखो वो तो बहुत ही आश्चर्यचकित करने वाला दृश्य था। मैंने देखा एक गाय अपने बछड़े को इतना चाटती है की उसके शरीर से रक्त का शराव हो रहा होता है लेकिन वो गाय उसे चाटना बंद नहीं करती। इस पर श्री कृष्ण बोलते है हे नकुल कलयुग मे इस दृश्य पर आश्चर्यचकित होने की आवश्यकता नहीं। वो गाय कलियुग के माता पिता की द्योतक है। और बछड़ा उनकी संतानों का प्रतीक है। कलियुग के प्रभाव के कारण उस समय में माता-पिता अपने संतानों को इतना लाड़ प्यार देंगे की कब वो उनका अहित करने लगेंगे उन्हे पता ही नहीं चलेगा। जिसे वो अपना प्रेम समझ रहे होगे वो अंत में उनके संतानों को अहित के मार्ग पर ले जाएँगे। कलियुग में लोग अपनी संतानों की इच्छा पूर्ति हेतु उचित अनुचित का बिलकुल ध्यान नहीं देंगे। उन्हे अपने संतानों में कोई बात बुरी नहीं लगेगी। जो आगे चलकर उनके संतानों को हठी, दुर्व्यवहारी, दुश्चरित इंसान बनाएगी। और उनके जीवन को अंधकार की ओर ले जाएगी जो आदर्श जीवन शैली के मार्ग से विमुख हो जाएँगे।


5. गिरती चट्टान और छोटा पौधा (Falling rock and small plant)


अंत में बारी आती है सहदेव की। वो बोलते है हे कृष्ण मैंने देखा एक बहुत ही विशाल चट्टान ऊपरी पर्वत से गिर रही है। और रास्ते में आते हुए सभी विशाल वृक्षों इत्यादि को नष्ट करते जा रही है। उसके रास्ते में जो कुछ भी आता है। उसका सर्वनाश हो जा रहा है। लेकिन आश्चर्यजनक बात ये होती है कि अंत मे एक छोटा पौधा उस विशालकाय चट्टान को रोक देती है। इसपर श्री कृष्ण बोलते है। सहदेव तुमने जो देखा वही कलियुग का अंतिम सत्य है। चट्टान को विशालकाय वृक्ष नहीं रोक पाते है। और नष्ट हो जाते है। जबकि एक छोटा पौधा उन्हे रोक देता है। इसका मतलब जब अंत समय आएगा लोगो का धन समृद्धि, पद प्रतिष्ठा, उन्हे मुक्त नहीं कर पाएगा लेकिन समाज में जो व्यक्ति जिसके पास धन समृद्धि पद प्रतिष्ठा कुछ भी नहीं रहेगा और यदि वो व्यक्ति सद्मार्ग का अनुशरण किया रहेगा। उसे ही अंत समय में मुक्ति मिलेगी। दिखावे की दुनिया से अलग रहकर ईमानदारी, अच्छे आचरण, और सत्य के साथ जीवन यापन करने वाला व्यक्ति ही अंत में भगवत प्राप्ति का भागीदारी होगा। और वो छोटा पौधा इसका भी द्योतक होगा की कलयुग भले ही कितना प्रभावशाली होगा लेकिन कुछ व्यक्ति समाज में ऐसे अवश्य मिलेगे जिनपर कलियुग का प्रभाव काम नहीं करेगा।


निष्कर्ष


उपरोक्त विविरणों के आधार पर श्री कृष्ण ने जो व्याख्या कलियुग की बताई है। उसे आज के समय में हम पूर्णतया देख सकते है। और इतना सब कुछ जानने के बाद भी हम अपने अंदर यदि बदलाव नहीं कर पा रहे तो कही न कही कलियुग का प्रभाव हम पर हावी हो रखा है। आज के समय में हम केवल पद प्रतिष्ठा मान सम्मान को ही सर्वस्व समझते है। धन समृद्धि हमारी प्राथमिकता है। आफ्नो के प्रति भी स्वार्थ वश ही लगाव है। रिश्तो का अहमियत्त केवल आपके ओहदे के अनुसार ही है। समाज में विभेद है। लोगो के प्रति हमारा व्यवहार उनके सामाजिक स्थिति के आधार पर तय होती है। ज्ञान, बुद्धि इन सब की परिभाषा बदल गई है। आप तब तक समाज में सम्मान पाने लायक नहीं है जब तक आपका कोई सामाजिक स्थिति न हो। लेकिन फिर भी इन सब की परवाह किए बगैर आप दिखावे की जिंदगी से दूर ज्ञान प्राप्ति के मार्ग पर अग्रसर है। और समाज की परवाह किए बगैर सद्मार्ग का अनुशरण कर रहे है तो कही न कही आप सही राह पर है। और आप पर कलियुग का प्रभाव काम नहीं कर रहा।

!इति शुभम्!

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