केरल के दर्शनीय स्थल- Kerala (God’s Own Country)

केरल भारत का ऐसा राज्य जो प्रकृतिक रूप से बहुत ही मनोरम है। यहा के Western Ghats के प्राकृतिक सौन्दर्य के आगे सभी सुंदरता नगण्य है। पर यहाँ हम बात करेंगे केरल के प्रमुख दर्शनीय स्थलो की जो आस्था के प्रमुख केंद्र है साथ ही साथ उनकी सुंदरता और भव्यता देखने लायक है।

भगवान अय्यपा मंदिर सबरीमाला-

केरल राज्य के पथानामथिट्टा जिले में प्रसिद्ध भगवान अय्यपा मंदिर सबरीमाला स्थित है। इस मंदिर की प्रसिद्धि पूरी दुनिया में है। प्रसिद्ध मंदिर भवन Periyar Tiger Reserve वन क्षेत्र में स्थित है। जो कि समुद्र ताल से लगभग 3000 फीट ऊपर पहाड़ी पर स्थित है यहाँ से बहुत ही मनोरम दृश्य भी देखने को मिलते जो कि आस्था और प्रकृति का अद्भुत समावेश है। मान्यता के अनुसार भगवान अय्यपा को भगवान शिव और विष्णु अवतार मोहिनी के पुत्र माना जाता है। जिसे उत्तर भारतीय कार्तिकेय भगवान के रूप में भी जानते है।

गुरुवायुर-

गुरुवायुर श्री कृष्णा मंदिर केरल राज्य के थ्रिसूर जिले में स्थित है। थ्रिसुर जिले को केरल राज्य की सांस्कृतिक राजधानी भी माना जाता है। गुरुवायुर मंदिर श्री कृष्ण का प्रसिद्ध मंदिर है। यहा अन्य भी कई मंदिर है। गुरुवायुर मंदिर का सबसे प्रमुख केंद्र है यहा की तुलाभारम की प्रथा जिसमे लोग अपने वजन के हिसाब से फल, अनाज तथा बहुमूल्य वस्तुए दान करते है। साथ ही साथ गुरुवायुर मंदिर का दीप स्तम्भ का दृश्य भी बहुत मनमोहक है। चूंकि थ्रिसुर जिला राज्य की सांस्कृतिक राजधानी है तो कई मंदिर इस जिले में स्थित है जिनमे से कुछ इस प्रकार से है। विल्वद्रीनाथ मंदिर, मम्मियूर महादेव मंदिर, लक्ष्मी नारायण मंदिर पांजाल, कूडालमन्निकय्यम मंदिर, परमेक्कावू भगवती मंदिर इत्यादि।

पद्मनाभ स्वामी मंदिर-

पद्मनाभ स्वामी मंदिर पिछले कुछ वर्षों से बहुत ही ज्यादा समाचारों इत्यादि में बना रहा। पद्मनाभ स्वामी मंदिर केरल राज्य के तिरुवनंतपुरम जिले में स्थित है। प्रसिद्ध मंदिर में सबसे ज्यादा दर्शनार्थी दर्शन हेतु आते है। पद्मनाभ स्वामी मंदिर में भगवान विष्णु के विग्रह की पुजा आराधना होती जिसमे भगवान विष्णु सायन करते स्वरूप में विग्रहित है। साथ ही साथ वहाँ नरसिम्हा भगवान और गज लक्ष्मी का विग्रह भी स्थापित है। October-November एवं march-April के महीने में होने वाले 2 प्रमुख देव त्योहारों में वहाँ बहुत ज्यादा संख्या में दर्शनार्थियों की भीड़ होती है।

थिरुनेल्ली मंदिर-

केरल राज्य के वायनाड जिले में थिरुनेल्ली महाविष्णु मंदिर स्थित है। प्रसिद्ध मंदिर ब्रहमगिरी की पहाड़ियों पर स्थित है। ये महाविष्णु के प्राचीनतम मंदिरों में से एक है। इसे श्यामला क्षेत्रम या फिर दक्षिण भारत के काशी के नाम से भी जाना जाता है। प्रसिद्ध मंदिर गया और हरिद्वार की तरह दक्षिण भारतियों के लिए पुरखों के पिंड दान के स्थान के रूप में भी प्रसिद्धा है। जो की पापनशीनी नदी के तट पर पूर्णाहुत किए जाते है। प्रसिद्ध मंदिर वायनाड स्टेशन से केवल 900 मीटर की दूरी पर स्थित है।

एत्तुमन्नूर महादेव मंदिर-

केरल राज्य के कोट्टयम जिले में स्थित एत्तुमन्नूर महादेव मंदिर शिव के प्राचीनतम मंदिरो मे से एक है। प्राचीन शैली में निर्मित मंदिर परिसर और गोपुरम का दर्शन बहुत ही मनोरम है। प्राचीनतम मंदिर होने के नाते महादेव मंदिर की मान्यता दक्षिण भारतीयों में बहुत ही ज्यादा है। प्रसिद्ध मंदिर में भगवान महादेव की मूर्ति पश्चिम दिशा की ओर मुख किए विराजमान है। फरवरी माह में होने वाले वार्षिक महोत्सव का अनुभव बहुत ही मनोरम है।

जनार्दन स्वामी मंदिर-

तिरुवनन्तपुरम जिले में वरकल समुद्र तट के निकट स्थित जनार्दन स्वामी मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। मंदिर का वर्णन वेदों मे भी देखने को मिलता है। मंदिर प्रांगड़ बहुत ही मनोरम और पुरानी दक्षिण भारतीय शैली के द्वारा निर्मित है। जिसमे प्रमुख रूप से भगवान विष्णु का विग्रह स्थापित है। साथ ही साथ हनुमान, गरुण, महालक्ष्मी इत्यादि का विग्रह भी स्थापूत है। फरवरी और मार्च में होने वाले मंदिर के वार्षिकोत्सव देखने लायक है। इसके साथ ही साथ इस मनोरम स्थल पर पहुँचने हेतु भी संसाधन बहुत आसानी से मिल जाते है।

श्री वल्लभा मंदिर-

केरल राज्य के पथानामथिट्टा जिले में स्थित श्री वल्लभा मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। प्राचीनतम मंदिर पौराणिक दक्षिण भारतीय शैली में निर्मित है। गरुण की विशाल प्रतिमा मंदिर की शोभा बढ़ाते है। मान्यता है कि प्रसिद्ध मंदिर में प्रतिदिन रात्रि 12 बजे स्वयं ऋषि दुर्वाषा और सप्तऋषि प्रभु विष्णु की आराधन और पुजा अर्चना करने आते है।

अम्बालापुझा श्री कृष्ण मंदिर-

प्रसिद्ध कृष्ण मंदिर अलप्पुजा जिले में स्थित है। यहाँ भगवान कृष्ण की आराधना पार्थसारथी के रूप में होती है। जिसमे बहगवान श्री कृष्ण ने महाभारत में अर्जुन के रथवाहक के रूप में ग्रहण किया था। मान्यता है कि मंदिर का निर्माण लगभग 600 वर्ष पूर्व वह की महान राजा द्वारा की गई थी। मंदिर का प्रसिद्ध दुग्ध निर्मित भोग प्रसाद बहुत ही प्रसिद्ध है। अलप्पुजा जिले के अन्य प्रसिद्ध मंदिर कांदियूर महादेव मंदिर, चेंगनूर महादेव मंदिर, मुलक्कल राजराजेश्वरी मंदिर इत्यादि।

निष्कर्ष

केरल प्राकृतिक और आस्था दोनों के रूप में बहुत ही वैभवशाली है। यहाँ के मंदिरों के निर्माण प्राचीनतम दक्षिण भारतीय शैली में किए गए है। प्रत्येक मंदिर के आस पास का क्षेत्र एक प्रमुख पर्यटक स्थल के रूप में विकसित है जहां पहुंचा बहुत ही आसान रेल मार्ग, हवाई मार्ग, या फिर सड़क मार्ग सभी तरीको से हर क्षेत्र में पहुँचना बहुत ही सुगम है। इन क्षेत्रों में यात्रा से पहले कुछ बाते जानना बहुत जरूरी है जैसे कि कुछ मंदिरों में दर्शन हेतु कुछ नियम बनाए गए है जिनका पालन करना अति आवश्यक है। और हम सभी को इन दर्शनीय स्थलो का अनुभव अवश्य लेना चाहिए। हम इन क्षेत्रो की यात्रा के द्वारा आध्यात्मिक शांति, और पूर्णता का अनुभव करेंगे।

||इति शुभम्य||

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *