जब हनुमान जी भूल गए अपनी शक्तियाँ- किस्सा कहानी

hanuman-ramayan- Kissa Kahani

हम सभी जानते है सनातन धर्म परंपरा मे भगवान हनुमान महा बलशाली और महा शक्ति शाली माने जाते है। और उनके बहुत सारे प्रसंग है जहां वो अपनी शक्तियों का प्रयोग करते है।

चाहे बचपन मे सूर्य को अपने मुख मे रख लेना हो या फिर लंका का दहन की कथा अपनी शक्ति और बुद्धिबल से उन्होने सभी कार्य कुशलता से किए। एकिन क्या आप जानते है भगवान महाबली हनुमान ने अपनी श्कटीयन भुला दी थी और पुनः सीता की खोज से पूर्व उन्हे उनकी शक्तियाँ याद दिलाई गई।

प्रसंग इस प्रकार से है कि बचपन से ही हनुमान जी बहुत ही नटखट थे दिन भर वो कोई न कोई बालकों जैसे शरारतें करते रहते थे। वृक्षासूर के संहार हो या फिर सूर्य को मुह मे रखना या फिर अपने मटा पिता के सम्मुख ऐसे कार्य करना जिससे हर माता पिता परेशान हो जाये।

एक बार की बात है। हनुमान जी अपने मित्र को साथ खेल रहे थे। प्रायः वो लोग जंगलों मे जाकर मुनियो ऋषियों के आश्रम के पास खेलते थे क्योंकि वहाँ अच्छे उपवन और प्यारे प्यारे जीवों का निवास होता था।

और खेलते खेलते वो सभी मिलकर वहाँ के ऋषि मुनियों के स्थान पर बाल उपद्रव करते थे कभी उनकी साधना मे शरारते करते तो कभी उनके भोग इत्यादि को खा लेते इस शरारत से ऋषि मुनि नाराज हो गए और उन्होने क्रोधवश हनुमान जी को श्राप दे दिया।

उन्होने बोला सभी देवी देवताओं से, पवन देव, इंद्रा राज, सूर्यदेव से जो शक्तियाँ तुमने प्राप्त की है उन सारी शक्तियों को तुम भूल जाओगे और तुनहे अपनी शलतियों का कोई ज्ञान नहीं रहेगा। जिससे तुम उसका प्रयोग नहीं कर पाओगे।

श्राप देनने के पश्चात जब उन ऋषि मुनियों का क्रोध शांत हुआ तब उन्हे एहसास हुआ कि उन्होने बहुत बड़ी गलती कर दी, आखिर हनुमान जी स्वयं प्रभु महादेव के अवतार है और जन कल्याण के लिए ही इस पृथ्वी पर अवतरित हुए है। यदि वो अपनी शक्तियाँ भूल जाएँगे तो हम सभी मानव जाति का जन कल्याण नहीं होगा और रावण जैसे राक्षस का नाश नहीं होगा।

अगर भगवान हनुमान को ये श्राप नहीं मिला होता तो बालि के संहार और रावण द्वारा माता सीता का अपहरण हनुमान जी द्वारा रोक दिया जाता। लेकिन कहते है जिस निमित्त उनका अवतार हुआ था उसी समय उनकी शक्तियों का प्रयोग होना था इसी लिए उन्हे ऋषियों मुनियों के निमित्त श्राप दिया गया।

तत्पश्चात उन्होने बोला ये श्राप तब समाप्त हो जाएगा जब कभी किसी जन कल्याण के कार्य के लिए आपको आपकी शक्तियों का कोई याद दिलाएगा।

इस प्रकार जब प्रभु श्री राम माता सीता की खोज करते हुए किष्किंधा पर्वत पर पहुंचे और सुग्रीव से मित्रता करने के पश्चात वानर सेना को सीता की खोज मे भेजा तब सभी वानर उनकी खोज मे जाने को तैयार थे लेकिन सबसे कठिन कार्य समुद्र को पार करके सीता की खोज करने जाना था।

चूंकि गिद्धराज जटायु के भाई संपाती ने अपनी दृष्टि के शक्ति से देखकर बताया था कि सीता माता समुद्र के उस पार है तो उस पार जाना अति आवश्यक था। हनुमान जी को अपनी शकतीयों का एहसास नहीं था तब रीछ राज जामवंत ने प्रभु हनुमान को उनकी शक्तियों का याद दिलाते है। और जब उनको अपनी शक्तियों का पुनः ज्ञान होता है तब वो विशाल रूप धारण कर समुद्र के उस पार गए और रास्ते मे आ रही समस्त बाधाओं को अपनी बल बुद्धि के साथ समाप्त कर माता सीता का पता लगाया और लंका दहन कर रावण के अभिमान नाश भी किया।

उपरोक्त कथा से सीख भी मिलती है कि आप के पास भले ही कितनी शक्ति हो यदि आपको उसका एहसास नहीं हो तो वो आपके किसी काम के नहीं है। जब कोई प्रबुद्ध जन आपको आपकी क्षमता और सकती का एहसास दिलाते है तो आप उसका सही प्रयोग करके समाज मे प्रतिष्ठित हो सकते है।

हनुमान जी को बहुत सारी शक्तियाँ हमारे देवताओं से प्राप्त हुई है और साथ ही माता सीता से उन्हे अमर होने का वरदान प्राप्त है साथ उनकी सबसे बड़ी शक्ति प्रभु श्री राम की भक्ति है जिसस्के बल पर वो कुछ भी कार्य कर सकते है। तो फिर हम भी प्रभु श्री राम और उनके परम भक्ति हनुमान जी की आराधना और भक्ति करके अपने सभी कष्टों को समाप्त कर सकते है और एक सुखमय जीवन व्यतीत कर सकते है।

तो दोस्तों आज की ये कथा कैसी लगी ऐसे ही धर्म, दर्शन, संस्कृति और सभ्यता से जुड़ी लेखों को पढ़ने के लिए आप हमारे इस पेज से जुड़े रहे।

!!इति शुभम्य!!

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