Immunity Boost ही Corona प्रतिरोध के लिए आखिरी कदम

Corona Virus का कहर पूरी दुनिया मे छाया हुआ है। और हम सभी देख रहे है की सभी प्रयास किसी न किसी रूप में विफल होते जा रहे है। चूंकि ये Virus बहुत ही नए किस्म का है अतः सभी Researcher इसका तोड़ ढूँढने मे प्रयासरत होते हुए भी सफलता की तरफ नहीं पहुँच पा रहे है। लेकिन कुछ है जो हमे इस वियशविक महामारी का तोड़ तो नहीं लेकिन इसका बचाव करने मे समर्थ है।

हम बात कर रहे है Immunity Boost की Govt of India की आयुष मंत्रालय अपनी आधिकारिक वैबसाइट पर इसके बारे मे बहुत ही प्रचार प्रसार कर रही है कि अगर हम अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत कर ले तो कही न कही इस Virus के प्रकोप से अपने आप को बचा सकते है। तो सबसे पहले हम जानने का प्रयास करते है रोग प्रतिरोधक क्षमता के बारे में।
हम बात करेंगे आयुर्वेद की तो भारतीय आयुर्वेद शास्त्र के अनुसार तीन तरह के विकारों कि बात की गई वात, कफ और पित्त। और यही तीन प्रमुख विकार हमारे शरीर में रोगो का निर्माण करते है। इसके संबंध में आयुर्वेद और योग शास्त्र दोनों ने ही रसायनो (Medicine) से ज्यादा शरीर के रोग प्रतिरोधक क्षमता के सुदृढ़ रखने की बात कि है।
मूलतः रोग प्रतिरोधक क्षमता दो तरह की होती है। प्रथम आंतरिक जो कि हमारे शरीर में जन्म से रहती है जो Protein इत्यादि के रूप मे हमारे शरीर में जन्म से मौजूद रहती है तथा सामान्य वात, कफ और पित्त के विकारो को विकसित होने से रोकती है। Second Immunity होती है ग्रहणशील प्रतिरोधक क्षमता। इसको इस प्रकार से परिभाषित कर सकते है कि देश काल परिस्थिति के अनुसार हम अपनी जीवन शैली मे ऐसा बदलाव करे जो हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को उस काबिल बनाए जिससे हम आने वाले नए विकारो को समाप्त कर सके।
अब हम बात करेंगे कि किस प्रकार से हम नए विकारों जैसे Covid19 इत्यादि से अपने शरीर का बचाव कर सके तो सामान्य शब्दों हम ये कह सकते है कि हम अपनी जीवनशैली में बदलाव लाकर इन आने वाले नए विकारो से बच सकते है। अब इसको विस्तार से जानने का प्रयास करते है। अगर हमारे शरीर में किसी प्रकार का विकार उत्पन्न होता है तो इसका सीधा सा कारण यही होगा कि कही न कही हमारे जीवनशैली में ही वो कामिया है जिससे हम इन विकारों के दुष्प्रभाव से बच सकते है।

1. खानपान

सर्वप्रथम हमे यही देखना होता है कि हमारा खान पान दैनिक जीवन में कैसा है। प्रायः हम देखते है जब किसी शारीरिक पीड़ा इत्यादि पर हम Doctor के पास जाते है तो उनका First Question यही होता है कि आपने खाने में क्या खाया था। तो यदि हम अपने खान पान के स्वरूप में बदलाव या सुधार कर लें तो कही न कही हम अपने शरीर में होने वाले विकारों से अपना बचाव कर सकते है। तो प्रश्न ये उठता है कि किस प्रकार का भोजन हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत कर सकती है।

यहाँ हम आपको कोई Diet Chart नहीं दूंगा बल्कि आप अपने स्वविवेक से उस तरह के भोजन का चयन करें जिनमे सभी प्रकार से Vitamins, Minerals इत्यादि आवश्यक तत्व सही मात्रा में मिल सके तथा इसके साथ ही साथ वो भोजन आसानी से सुपाच्य हो। गरिष्ठ भोजन कितने भी पोषक तत्वों से भरपूर हो लेकिन उनकी उपयोगिता वही समाप्त हो जाती है जब वो आसानी से पचाने योग्य नहीं होते है। आयुर्वेद भी तामसिक भोजन का निषेध करता है क्योंकि ये हमारे पाचनतंत्र के लिए सही नहीं होते है।
अब बात करें पेय पदार्थों की तो आयुष मंत्रालय के Website पर दिये क्वाथ (काढ़ा) का सेवन अवश्य करें। जिसे दालचीनी, कालीमिर्च, सोंथ, तुलसी, गुड़, मुनक्का इत्यादि के मिश्रण को पानी में उबाल कर बनाया जाता है। साथ ही साथ दूध में हल्दी मिश्रण के साथ उसे पीने की आदत डालनी पड़ेगी। इसके साथ निषेधित पेय पदार्थों के सेवन से दूरी या फिर कमी लाने की आवश्यकता भी है।

2. दिनचर्या

खान पान के बाद यदि सबसे प्रमुख अवयव की बात की जाये तो हमारी दिनचर्या कहीं न कहीं हमारे शरीर को कमजोर और मजबूत बनाने मे आवश्यक तत्व है। हमारे सोने खाने पीने सभी दैनिक कृत्य कहीं न कहीं हमारे शरीर पर प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से प्रभाव डालते है। यदि है भरपूर नींद ले समय से सोकर उठे तो ये सारे दैनिक कृत्य हमारे रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाते है। आज के भाग दौड़ भरी जिंदगी में हम अपनी दिनचर्या का ख्याल नहीं रखते है और इसका प्रभाव हमारे शरीर में विकारों के रूप में देखने को मिलता है।

3. शारीरिक श्रम

शारीरिक श्रम से तात्पर्य ये नहीं कि हम भारी भरकम कार्य करे बल्कि हम अपनी दिनचर्या में रोज थोड़ा बहुत पैदल चलने का प्रयास करे। साइकिल चलाने की आदत को विकसित करें कम हम देखते है अक्सर लोग कम दूरी के लिए भी जैसे यदि दूध, फल सब्जी इत्यादि दैनिक उपयोग की वस्तुएं लाने के लिए पास के बाज़ार में जाना है उस पर भी हम मोटर बाइक इत्यादि का प्रयोग करते है। इस आदत का त्याग करते हुए हम पैदल चलने और साइकिल से इन कामो को पूरा करने का प्रयास करे इतना ही शारीरिक श्रम करना ही बहुत उपयोगी साबित होगा। अगर इसके साथ हम दिनचर्या मे योग को भी महत्व दे तो वो फिर सोने पे सुहागा साबित होगा। योग के लिए ज्यादा कुछ सोचने कि आवश्यकता नहीं बल्कि केवल सूर्य नमस्कार ही सभी प्रकार के योग का एक मिश्रण है है और प्रातः काल कम से कम 5 बार सूर्य नमस्कार करें तो बहुत ही लाभदायक साबित होगा।

निष्कर्ष

इस लेख के जरिये हम किसी भी रूप में Corona जैसी महामारी का इलाज बताने का प्रयास नहीं कर रहे बल्कि हम ये कहना चाह रहे है कि यदि हम अपने जीवन शैली में थोड़े बहुत बदलाव ला सके तो हम Corona जैसी महामारी से अपना बचाव कर सकते है तथा इसके प्रभाव से अपने शरीर को सुरक्शित रख सकते है। साथ ही साथ सरकार द्वारा दिये गए Guideline का भी हमे पालन करना है जो कि बचाव के क्रम मे हमारा और सहयोग करेगा। आप सभी स्वस्थ रहे और सुरक्षित रहे।

||इति शुभम्य||

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