बच्चों में रुचि (Hobby) का उद्भव

बच्चे का मस्तिष्क कुछ भी ग्रहण करने के लिए बहुत ही उपयुक्त होता है। उसे कुछ अच्छा सिखाया जाएगा तो वो अच्छी चीजे ग्रहण करेगा। और अगर उसे कुछ गलत सिखाया जाएगा तो गलत ग्रहण करेगा।

हर व्यक्ति में कुछ न कुछ रुचि अवश्य होती है। और अगर बच्चों में रुचि को शुरू से ही विकसित किया जाये तो इसका प्रभाव बच्चे के जीवन पर बहुत ही ज्यादा पड़ता है। हर अभिभावक को अपने बच्चों मे अवश्य एक रुचि का उद्भव करना चाहिए।

वैसे तो बहुत सारी रुचियाँ है लेकिन कुछ प्रमुख रुचियों का वर्णन इस प्रकार से है जिससे उनमे उत्साह और खुशी का प्रवाह हो जी कि एक अच्छे जीवन की ओर उन्हे अग्रसर करे।

1. संगीत-

अगर बात करे रुचियों की तो संगीत का नाम सबसे ऊपर आएगा। व्यक्ति बच्चा हो, किशोर हो, युवा हो या फिर वृद्ध किसी न किसी रूप में उसे संगीत पसंद होता है। हर कोई जनता है कि संगीत हर किसी को तनाव से भी मुक्ति दिलाता है। संगीत से हमारे मन में सकारात्मकता उत्पन्न करता है।

हमारे अंदर दुख, निराशा इत्यादि को भी संगीत के द्वारा खतम किया जा सकता है। इसी लिए जब रुचि की बात आती है तो संगीत का स्थान उनमे सबसे प्रमुख स्थान है। अगर बच्चे के मन में संगीत के प्रति रुचि को उत्पन्न किया जाये तो वो उसके जीवन में बहुत ही सदुपयोगी साबित होगा।

कहते है संगीत की रुचि रखने वाले लोग बहुत ही मधुर और शांत स्वभाव के होते है। उनमे क्रोध की मात्र न के बराबर पायी जाती है। संगीत के कई आयाम होते है जिनको रुचि के रूप में धरण किया जा सकता है। जो निम्न है।

गायन, वादन एवं नृत्य-

मुख्यतः संगीत के तीन प्रमुख आयाम होते है। जो गायन वादन एवं नृत्य के रूप में जाने जाते है। अपने बच्चो में उनकी प्रतिभा के अनुसार उनके अंदर उपरोक्त संगीत के आयामों में से किसी एक या उससे अधिक आयामो के प्रति रुचि उत्पन्न किया जा सकता है।

अगर बारीकी से अपने बच्चे में संगीत के इन आयामों के मूल गुण दिखाई देते है तो हम उन्हे उसके प्रति प्रोत्साहित कर सकते है। उपरोक्त संगीत के तीनों आयाम बच्चे में जीवन के प्रति उत्साहित, ऊर्जावान बनाते है। तथा जीवन के हर पल में हर कठिनाई मे सही निर्णय लेने के लिए सही मार्ग का अनुभव करती है।

2. खेलकूद-

द्वितीय बच्चे में खेलकूद के प्रति रुचि उत्पन्न कर सकते है। अगर आपका बच्चा शारीरिक रूप से बहुत ही ऊर्जावान है। तथा वह शारीरिक श्रम करने में बहुत तेज है तो Outdoor खेलो के प्रति उसकी रुचि को बढ़ावा दे सकता है।

कहते है अगर व्यक्ति शारीरिक रूप से स्वस्थ हो तो वह मानसिक रूप से भी स्वस्थ रहेगा। और जीवन के सभी प्रमुख क्षणो में निर्णय लेने के लिए सही मार्ग का प्रयोग करेगा। दूसरा अगर बच्चा मानसिक शक्ति का प्रयोग अपने हर क्रियाकलाप में करता हो तो उसे Indoor खेलो के प्रति प्रोत्साहित कर सकते है।

किसी भी तरह के खेल कूद में रुचि लेने के कारण बच्चा शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ होगा और अपने जीवन में बहुत ही सुखद और उपयोगी पल का अनुभव करेगा।

नोट:- Indoor खेलो से मतलब आजकल के विडियो गेम इत्यादि को न समझकर शतरंज, टेबल टेनिस इत्यादि जैसे खेलो की बात की जा रही है। 

3. पढ़ाई लिखाई की रुचि-

बात अगर पढ़ाई लिखाई की रुचि की हो तो इसका मतलब इसको विद्यालयी पढ़ाई लिखाई से न जोड़ा जाये। अगर बच्चे में उपरोक्त गुण दिखाई देता है। तो उसे विभिन्न प्रकार की पुस्तकों के प्रति रुचि उत्पन्न की जा सकती है। उन्हे विभिन्न प्रकार की पुस्तकों का परिचय कराया जाये। उपयोगी विषयों का अनुभव कराया जा सकता है।

उन्हे कई विषयों के संबंध में लेख लिखने हेतु उनपर कुछ बोलने हेतु प्रेरित किया जा सकता है। अगर किसी बच्चे की रुचि अध्ययन अध्यापन के प्रति होती है तो इसके लाभों को बताने की कोई आवश्यकता नहीं है। इसके लाभ से हर कोई अवगत है। तथा इस रुचि के कारण बच्चा एक उज्ज्वल भविष्य की ओर अग्रसर होता है।

4. अन्य रुचियाँ-

उपरोक्त के अलावा बहुत सारी रुचियाँ है जो किसी बच्चे के अंदर विकसित की जा सकती है। जिनमे चित्रकारी, अच्छी प्राचीन उपयोगी वस्तुए संग्रह करने की प्रवृत्ति जैसे-डाक टिकट, पुराने सिक्के पुरानी कृतियाँ इत्यादि।

कुछ बच्चों की अपनी खुद की कुछ रुचियाँ जन्म से ही विद्यमान होती उन्हे पहचान कर लोगो के सामने प्रस्तुत करने हेतु बच्चे को प्रेरित किया जा सकता है।

रुचियों की आवश्यकता-

अब बात आती है कि इन रुचियों को प्रोत्साहित करने की क्या आवश्यकता है। तो इसका उत्तर इस प्रकार से है कि पहला ये रुचियाँ बच्चे को व्यस्त रखती है और उनका मन किसी बुरी विषय वस्तु के ओर आकर्षित नहीं होता है।

दूसरा इन रुचियों के कारण वो अपने मानसिक शक्ति या शारीरिक शक्ति का प्रयोग करते है जिससे उनका मानसिक और शारीरिक विकास होता है। तृतीय ये रुचियाँ बच्चों के मन को संतुष्टि प्रदान करती है।

जिससे समाज के प्रति उनका व्यवहार और आचरण बहुत ही शांत और शुशील रूप में प्रस्तुत होता है। लोगो के प्रति सहानुभूति और सहयोग की भावना भी उत्पन्न होती है। अतः हर किसी को अपने बच्चे के अंदर किसी न किसी रुचि के प्रति रुझान देखकर प्रोत्साहित करना चाहिए।

!इति शुभम्!

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