हरिद्वार कुम्भ मेला 2021- आध्यात्मिक साक्षात्कार की यात्रा

सनातन धर्म मे कुम्भ मेले एवं स्नान का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है। 4 वर्ष के अंतराल पर देश के 4 प्रमुख तीर्थ स्थलों पर कुम्भ मेले का आयोजन होता है। इस बार भी उत्तराखंड राज्य के हरिद्वार में कुम्भ मेला 2021 का आयोजन होगा।

आज हम बात करेंगे इस कुम्भ मेले की इसके स्वरूप इतिहास और इससे प्राप्त होने वाले शुभ फलों के बारे में तो शुरू करते है अपनी इस यात्रा को।

कुम्भ मेला-

मान्यता है कि देवताओं और असुरों द्वारा जब समुद्र मंथन किया गया तो उनका उद्देश्य था अमृत की प्राप्ति करना यही अमृत कलश से कुछ बूंदे इस धरती पर गिरी और ये चार जगह प्रसिद्ध हो गई और हर चार वर्ष पर इन जगह पर क्रमानुसार कुम्भ मेले का आयोजन होता है। और 12 वर्ष पूर्ण होने के उपरांत महाकुम्भ का आयोजन होता है। 

कहाँ कहाँ होता है कुम्भ- 

अब हैम बताएंगे वो 4 कौन सी जगहें है जहां कुम्भ मेले और स्नान का आयोजन किया जाता है। 

इनमे सबसे प्रथम स्थान है संगम नगरी प्रयाग जिसे इलाहाबाद के नाम से भी जाना जाता है यहां गंगा यमुना (जमुना) सरस्वती नदी के संगम स्थान पर इसका आयोजन किया जाता है। 

दूसरा स्थान है उज्जैन महाकाल की नगरी जो कि मध्य प्रदेश राज्य में स्थित है यहां क्षिप्रा नदी के तट पर कुम्भ मेले का आयोजन होता है। 

तीसरा स्थान है नासिक जो कि महाराष्ट्र राज्य में स्थित है। यहां पवित्र गोदावरी नदी के तट पर इस कुम्भ मेले का आयोजन किया जाता है।

और चौथा स्थान है हरिद्वार जहां मां गंगा अथवा भागीरथी के तट पर इसका आयोजन होता ये उत्तराखंड राज्य में स्थित है। 

कुम्भ का महत्व- 

कुम्भ मेले का आयोजन प्रत्येक 4 वर्ष में माघ मास में किया जाता है। महीने भर चलने वाले इस स्नान और मेले में बहुत ही अलग अनुभव प्राप्त किया जा सकता है। 

इस मेले की सबसे प्रमुख विशेषता है इसमें आने वाले महान साधु संत जो हमे एक आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान करते है। जो अलौकिक और परमात्मा की सत्ता का अनुभव हम इस मेले में कर सकते है। उससे हमारा जीवन धन्य हो सकता है।

कुम्भ के प्रमुख स्नान तिथियां- 

वैसे तो कुम्भ मेले का आयोजन अनवरत रूप से महीने भर चलता रहता है लेकिन कुछ खास तिथियां है जिनमे खास स्नान या शाही स्नान का अलग ही महत्व है ये तिथियां है।

मकर संक्रांति

पौष पूर्णिमा

मौनी अमावस्या 

बसंत पंचमी

माघ पूर्णिमा

महाशिवरात्रि

उपरोक्त कुछ खास शाही स्नान पर्व होते है, लेकिन कभी कभार शाही स्नान की तिथियों में परिवर्तन देखने को मिल सकता है।

इस बार हरिद्वार कुम्भ स्नान-

वर्ष 2021 में इस बार हरिद्वार में कुम्भ स्नान का आयोजन होगा और यहां दूर दूर से साधु संत नागा साधु इस स्नान और मेले के पर्व में भाग लेंगे। एक आध्यात्मिक शांति का अनुभव करने के लिए आप भी इस कुम्भ स्नान का हिस्सा बन सकते है।

यदि आप इस अनुभव को प्राप्त करना चाहते है तो कुछ आवश्यक बाते जरूर जानिए। 

हरिद्वार कुम्भ 2021 शाही स्नान तिथि-

इस बार की शाही स्नान की तिथियां घोषित हो चुकी है जो इस प्रकार से है।

11 मार्च 2021 महाशिवरात्रि

12 अप्रैल 2021 सोमवती अमावस्या

14 अप्रैल 2021 मेष संक्रांति 

27 अप्रैल 2021 चैत्र मास की पुर्णिमा 

इसके अलावा कुछ प्रमुख स्नानों की तिथियाँ भी घोषित हुई है जो इस प्रकार से है। 

14 जनवरी 2021 मकर संक्रांति

11 फरवरी 2021 मौनी अमावस्या

16 फरवरी बसंत पंचमी 

27 फरवरी माघ पुर्णिमा 

13 अप्रैल 2021 चैत्र शुक्ल प्रतिपदा

21 अप्रैल 2021 रामनवमी 

कुम्भ मे व्यवस्था- 

कोई भी कुम्भ स्नान हो तो वहाँ के स्थानीय प्रशासन द्वारा बहुत ही उत्तम व्यवस्था की जाती है जिनमे अस्थायी टेंट रहने की व्यवस्था, खान पान की सुविधा स्नान घाटों के सुगम व्यवस्था यातायात के लिए विशेष ट्रेन और बसों का संचालन और आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त करने मे आपको कोई असुविधा न हो इसके लिए सभी प्रकार के प्रबंध किए जाते है। 

हरिद्वार भ्रमण भी साथ-

इस आध्यात्मिक अनुभव के साथ आप लोग हरिद्वार की और प्रसिद्ध स्थानो का भी अनुभव कर सकते है। जिनमे प्रमुख स्थानों मे हरी की पैड़ी, ऋषिकेश दर्शन, मनसा देवी मंदिर, लक्ष्मण झूला, गायत्री शक्ति पीठ के साथ साथ न जाने कितने पवित्र और आध्यात्मिक स्थलों का अनुभव कर सकते है। और ये अनुभव आपके मानस जगत को अभिभूत कर देंगी। 

उत्तर की चार धाम यात्रा सोने पर सुहागा- 

अगर इस कुम्भ मे आप हरिद्वार जाने का विचार बना रहे है तो उसी समय के आस पास लगभग मई के महीने मे आप लोग उत्तर भारत के चार धाम की यात्रा का भी अनुभव कर सकते है। गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट प्रति वर्ष अक्षय तृतीया के दिन खुलते है।  

और बद्रीनाथ एवं केदारनाथ के कपाट खुलने के लिए विशेष तिथि का निर्धारण किया जाता है लेकिन फिर भी ये मई महीने मे खोले जाते है तो कुम्भ मेले के आयोजन के उपरांत आप लोग इन चार धाम के दर्शन लाभ प्राप्त कर सकते है। अपने आने वाले लेखों मे हम हरिद्वार के सम्पूर्ण दर्शन का विस्तारित वर्णन करेंगे। 

सार- 

कुम्भ मेले के सम्पूर्ण अनुभव को शब्दों मे बयान नहीं किया जा सकता है। इसके साक्षात अनुभव के आधार पर ही हम इसकी महिमा को समझ सकते है। दूर दूर देशों से लोग बड़े बड़े सेलेब्रिटी तक इस मेले मे आध्यात्म के अनुभव के लिए आते है। दूर दूर देशों से कई रिसर्च स्कॉलर इस मेले के सम्पूर्ण स्वरूप इसके थीम और इसके भव्यता पर अपनी स्टडि करने के लिए आते है। 

हम बहुत ही भाग्यशाली है कि इस पुण्य सलिला भूमि पर जन्म लिया और इन अनुभवों को प्राप्त करने का अवसर प्राप्त हुआ। तो इस बार के हरिद्वार कुम्भ मेला 2021 मे आप एक आध्यात्मिक अनुभव को प्राप्त करने का लाभ ग्रहण करे। 

||इति शुभम्य||

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