राम भक्त हनुमान जी ने भी लिखी थी रामायण

hanuman-ramayan- Kissa Kahani

भारतीय सनातन परंपरा मे हमे बहुत सारी ऐसी रोचक कथा कहानियाँ सुनने को मिल जाती है जिनका कोई प्रमाण ढूँढना बहुत ही कठिन है। हाँ ये सत्य है कि वो कहीं न कहीं उल्लिखित जरूर है लेकिन हमारे संस्कृति इतनी विशाल है जिसके सभी तथ्यों का साक्ष्य ढूँढना भूसे के ढेर मे सुई ढूँढने जैसा है।

वैसे तो रामायण की कथा इतनी प्रचलित है कि इसके कई प्रारूप कई स्वरूप देखने को मिलता है लेकिन वाल्मीकि कृत रामायण और गोस्वामी तुलसीदास कृत राम चरित मानस सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है लेकिन क्या आप जानते है कि हनुमान जी ने भी एक रामायण की रचना की थी लेकिन आज आम जन के लिए वो महाकाव्य उपलब्ध नहीं तो चलिये जानते है इस प्रसंग को विस्तार से।

माना जाता है कि महर्षि वाल्मीकि ने रामायण की रचना प्रसंग घटित होने के पूर्व मे ही कर ली थी ये एक काव्य के रूप मे लिखा गया था जो संस्कृत भाषा मे था। कहते है महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण बहुत ही प्रसिद्ध काव्य संग्रह के रूप मे जानी जाती है। इस उपलब्धि के रूप मे महर्षि वाल्मीकि सभी को अपनी रचना दिखते थे और बदले मे उन्हे सभी लोगो से प्रसंसा मिलती है।

इसी कलानुक्रम मे एक बार उन्होने अपनी रचना देवर्षि नारद को दिखाई। नारद जी ने उनकी रचना देखी और बोले महर्षि आपकी रचना बहुत ही अच्छी है लेकिन एक और रचना है जो इससे भी उत्तम है। महर्षि वाल्मीकि से रहा नहीं गया उन्होने नारद मुनि से पूछा की किसकी रचना की बात कर रहे है। उन्होने बताया कि राम भक्त हनुमान ने भी एक रामायण काव्य की रचना की है।

हनुमान जी द्वारा रचित रामायण की बात सुन कर महर्षि वाल्मीकि से रहा नहीं गया और वो चल दिये उनकी रचना को देखने के लिए और उन पहाड़ियों पर पहुंचे जहां हनुमान जी सियाराम की बहलती मे लीन थे महर्षि वाल्मीकि ने हनुमान जी को नमन किया और उनसे उनकी रामायण रचना दिखने का आग्रह किया।

हनुमान जी ने अपनी रचना महर्षि वाल्मीकि को प्रस्तुत की वाल्मीकि ऋषि द्वारा वो रामायण पढ़ने के बाद उनके आँखों से आँसू की धारा बहने लगी हनुमान जी ने पूछा महर्षि आपकी आँखों मे आँसू क्यों आ गए इस पर महर्षि वाल्मीकि ने बोला हे प्रभु आपने तो बहुत ही अच्छी रचना लिखी आपकी रचना के सामने मेरी रचना को तो कोई देखेगा भी नहीं।

हनुमान जी को आभास हो गया कि महर्षि वाल्मीकि इस बात को लेकर चिंतित है कि जब उनकी रचना को कोई पढ़ेगा भी नहीं तो फिर लोग उन्हे याद क्यों करेंगे और तुरंत ही हनुमान जी ने अपने स्वलिखित रचना की मूल प्रति को नष्ट कर दिया और महर्षि वाल्मीकि को बोला अब आपकी रचना को लोग याद रखेंगे मुझे किसी नाम की आवश्यकता नहीं थी मैंने तो बस प्रेमवश ये रचना बनाई थी। मुझे तो लोग राम भक्त हनुमान के रूप मे ही लोग जानेंगे और यही मेरे लिए सौभाग्य की बात है।

एक अन्य किंवदन्ती भी है कि अपनी रचना पूरी करने के बाद हनुमान जी महर्षि वाल्मीकि के पास उसे दिखने लाते है और ईर्ष्या वश महर्षि वाल्मीकि उनकी रचना को नष्ट कर देते है। जिस कारण हनुमान जी उन्हे श्राप देते है कि जिस रामायण रचना के लिए तुमने मेरी रचना को नष्ट किया उसे सामान्य जन द्वारा कोई भी लोकप्रियता नहीं मिलेगी और मेरी कृपा उपरांत जो कोई भी रामायण की रचना करेगा उसकी रचना ही जन मानस मे लोकप्रिय होगी। और इसीलिए जब गोस्वामी तुलसीदास जी ने राम चरित मानस की रचना की तो उनकी रचना आज हर घर मे पायी जाती है।

कहानियाँ कई रूपों मे होती है लेकिन उनका सार एक ही होता है जैसे उपरोक्त दोनों कहानियों मे हनुमान जी द्वारा रामायण रचना के बारे मे हम जाने है। बाकी कथानक कुछ भी हो सकता है। तो मित्रों आज का प्रसंग आप लोगो को कैसा लगा। और भी ऐसे पौराणिक, नैतिक प्रसंग पढ़ने के लिए हमारे इस पेज से जुड़े रहें।

धन्यवाद

||इति शुभम्य||

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