जीवन आदर्श सिखाती गुरु नानक देव के कुछ प्रेरक प्रसंग- गुरु नानक देव जयंती विशेष

गुरु नानक जयंती- Kissa Kahani

कार्तिक मास की पुर्णिमा तिथि जो कि सनातन धर्म मे बहुत महत्वपूर्ण तिथि है इस दिन पवित्र मास कार्तिक क्का समापन होता है। और इसी दिन देव दीपावली एवं कार्तिक पुर्णिमा स्नान का महत्व है उसी प्रकार इसी दिन सिखों के प्रथम गुरु गुरु नानक देव जी का जन्म दिवस भी बहुत ही धूम धाम से मनाया जाता है।

एक शब्द मे कहे तो सिख धर्म का मूल उद्देश्य जन मानस के मध्य प्रेम एक दूसरे की बीच सेवा भाव और एक परम सत्ता के अस्तित्व को मानना है। लेकिन यदि सही मायने मे सिख धर्म को समझना है ये हमे जीवन के कौन कौन से आदर्शों को सिखाता है तो हमे गुरु नन्न्क देव के कुछ प्रेरक प्रसंगों को जानना आवश्यक है।

गुरु नानक देव का संक्षिप्त परिचय

गुरु नानक देव का जन्म अभी के पाकिस्तान मे तलवंडी नामक स्थान मे कार्तिक पुर्णिमा के दिन 1469 ईस्वी में हुआ था। इनके पिता का नाम मेहता कालु और माता का नाम तृप्ति देवी था। वर्तमान समय मे इनके जन्म स्थान को इनके नाम के आधार पर ननकाना साहिब के नाम से जाना जाता है।

गुरु नानक देव एक महान संत थे। इन्होने लोगो के मध्य संभाव की भावना विकसित की लोगो के बीच प्रेम का प्रचार प्रसार एक साथ मिलजुल कर रहते हुए जीवन के आदर्शों के आधार पर जीवन यापन करने का विचार व्यक्त किया।

सच्चा सौदा-

इनका विवाह 16 साल के उम्र मे हो गया था। एक बार की बात है। जीवन यापन करने के लिए इनके पिता ने इनको कुछ कार्य करने के लिए कुछ आर्थिक सहयोग किया और व्यापार के लिए इन्हे प्रेरित करने का प्रयास किया।

लेकिन इन्होने उन पैसों को साधु संतों की सेवा मे खर्च कर दिया और जब इनके पिता ने इनसे पूछा कि इन्होने इन्होने व्यापार और सौदे मे खर्च करने के बजाय ये क्यों किया तो इन्होने बोला लोगो की सेवा ही सच्चा सौदा है। और तब से ही सिख धर्म मे सेवा भाव को सबसे सर्वोत्तम कार्य माना जाता है।

दूध और खून की रोटी-

गुरु नानक देव ज्ञान प्राप्ति हेतु फकीर का जीवन अपनाया था। और फकीरों की तरह घुमक्कड़ का जीवन व्यतीत करते थे। एक बार ज्ञान प्राप्ति के उपरांत गुरु नानक देव एक गाँव मे गए और वह एक व्यापारी जो बहुत अमीर था जिसका नाम मालिक बागो था उसने इनके सत्कार का जिम्मा उठाना चाहा लेकिन गुरु नानक देव एक गरीब सच्चे इंसान लालो के घर पर प्रवास किया।

जब मालिक बागो ने इसका कारण पूछा तो उन्होने कहा दोनों अपने अपने घर से एक एक रोटी लेकर आओ लालो ने अपने घर की रूखी सुखी रोटी लाया और मालिक बागो ने अपने घर से घी से चुपड़ी रोटी मंगाई। गुरु नानक देव ने दोनों रोटी को एक एक हाथ मे लेकर उसे निचोड़ा तो लालो के रोटी से दूध निकला और बागो के रोटी से खून निकाला।

इस पर गुरु नानक देव ने बोला बागो भले ही एक बहत सम्पन्न व्यक्ति है लेकिन इसकी कमाई सूद के पैसे और लोगो के शोषण से की गई है और लालो की कमाई भले ही कम है लेकिन इसने सब कुछ मेहनत और सच्चाई से प्राप्त किया है अतः मैंने इसके घर प्रवास का निर्णय लिया।

मेरा पैर उधर कर दो जिधर तेरा काबा न हो-

एक बार की बात है गुरु नानक देव भ्रमण करते हुए काबा के शहर पहुँच गए और आराम करने के लिए काबा की तरफ मुह करके लेट गए। लोग उनसे नाराज हुए और उनसे काबा की तरफ पैर करके सोने से माना किया इसपर नानक देव ने कहा कि ठीक है मेरा पैर उधर कर दो जिधर तेरा काबा न हू। इसपर लोगो ने उनके पैर दूसरी तरफ कर दिया लेकिन जब देखा फिर भी काबा भी उसी तरफ था ऐसा लोगो ने कई बार किया लेकिन हर बार काबा उसी तरफ हो जाता।

इस पर लोगो को एहसास हुआ कि ये कोई आम इंसान नहीं बल्कि कोई दिव्य पुरुष है। फिर उन लोगो ने नानक देव से क्षमा मांगा और उनके इस चमत्कार का कारण पूछा तो गुरु नानक देव ने बोला कि ईश्वर तो सर्वत्र है और इस संसार की हर वस्तु हर व्यक्ति और सभी चीजों मे ईश्वर है हम किसी एक स्थान को ईश्वर को समर्पित नहीं कर सकते है सबको ईश्वर क्का अंश मानकर उससे प्रेम पूर्वक व्यवहार करना चाहिए।

नवाब और दशांश की सीख-

कुच्छ समय के लिए गुरु नानक देव अपने जीवन यापन के लिए एक रियासत के नवाब के यहाँ लेखकर का काम किया और उन्होने अपने काम के साथ साथ नवाब के कमाई का कुछ हिस्सा लोगो के सेवा और उनकी सहायता मे भी खर्च किया नवाब के अन्य कर्मचारियो को ये बात नागवारा लगी और उन्होने नवाब से इसकी शिकायत की इसपर नवाब ने लेखा जोखा का हिसाब खुद देखा लेकिन उनको हिसाब मे कोई कमी नहीं दिखी।

इसपर गुरु नानक देव ने बोला अपने कमाई का कुछ हिस्सा लोगो के सेवा और सहायता मे लगाने से कोई हानि नहीं होती बल्कि इससे उन्नति का मार्ग ही प्रसस्त होता है अतः हम सभी को अपने कमाई का दशवा भाग सेवा के लिए लगा चाहिए।

सार-

गुरु नानक देव एक मानववादी संत थे इन्होने सिख संप्रदाय का निर्माण कर लोगो के बीच मानव के प्रति प्रेम लोगो के प्रति सेवा भाव का उद्भव करने का प्रयास किया। अगर सही रूप मे सिख धर्म को देखे तो इनके द्वारा भाईचारे का भाव और लोगो के प्रति प्रेम और एक दूसरे के बीच सद्भाव की बहवना ही इंका प्रमुख गुण है। एक ईश्वरवाद का विचार मानने वाले और सभी को एक ईश्वर का ही अंश मानकर सबके मध्य उंच नीच की भावना न रखना ही इनकी सही सोच प्रदर्शित करती है।

तो आइये इस कार्तिक पुर्णिमा के दिन गुरु नानक देव के विचारो का अनुशरण करते हुए मानवतावादी उनके उद्देश्य की पूर्ति करते हुए उनको याद करते है और उनके जन्म दिवस की लोगो को बधाइयाँ देते है।

||इति शुभम्य||

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