ग्रहों की दृष्टि से बचने के सामान्य उपाय

ग्रहों की दृष्टि

ग्रहों की दृष्टि- सनातन धर्म एवं ज्योतिष शस्त्र के अनुसार प्रत्येक जीव के जन्म से लेकर मृत्यु पर्यंत ग्रहों की दृष्टि का प्रभाव बना रहता है। कुछ ग्रह हमारे जीवन को बहुत ही खुशहाल बना देते है।

कुछ ग्रह अपनी कुदृष्टि एवं नीच भाव के कारण हमारे जीवन मे परेशानियाँ और कठिनाइयों का अंबार लगा देते है। आज इस लेख के जरिये हम जानने का प्रयास करेंगे की किस प्रकार हम इन ग्रहों की कुदृष्टि एवं अशुभ प्रभाव से अपना बचाव कर सकते है।

ग्रहों का प्रभाव-

ज्योतिष शस्त्र के अनुसार ग्रहों की गणना करने के कई तरीके है उनके अनुसार हम उनका हमारे जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव का अनुमान लगते है। लेकिन मूल रूप से सबसे प्राची तरीका है।

भृगु संहिता के अनुसार ग्रहों की स्थिति का अनुमान लगाना। जीव जब जन्म लेता है उस समय के नक्षत्र उस समय के लग्न भाव और ग्रहों के गृह स्थान का निर्धारण करके एवं आने वाले समय मे उनके महादशा एवं अंतर्दशा के आधार पर हम ग्रहों के प्रभाव का वर्णन करते है।

तो हम जानने का प्रयास करेंगे कि कैसे इन ग्रहों की कुदृष्टि के प्रभाव को निष्क्रिय एवं लाभकारी बनाया जा सकता है।

सूर्य-

सूर्य को ग्रहों का राजा माना जाता है। एवं इनके पंच देवों की श्रेणी मे भी रखा जाता है। अगर किसी जातक के कुंडली मे सूर्य नीच भाव मे विद्यमान है। अथवा उसकी कुदृष्टि एवं उसके महादशा मे उसका दुष्प्रभाव मिलने का अनुमान है।

तो हम कुछ उपायों के जरिये उनके प्रभाव को लाभरी बना सकते है। इसके लिए सबसे पहले सूर्योदय पूर्व निद्रा का त्याग करके स्नानोपरांत सूर्य देव को जल अर्पित करना एवं आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करने मात्र से हम सूर्य की प्रभावों को अपने जीवन मे लाभकारी बना सकते है।

चंद्रमा-

यदि किसी जातक की कुंडली मे चंद्रमा की कुदृष्टि एवं उसका गलत प्रभाव पद रहा है तो उसको भगवान शिव की आराधना उनको जल अर्पण करना चाहिए इससे चंद्रमा के प्रभावों को लाभकारी बनाया जा सकता है।

साथ ही साथ हर मास की द्वितीय तिथि को चंद्र दर्शन के द्वारा भी चंद्रमा की कुदृष्टि के प्रभाव को कम किया जा सकता है। सोमवार के व्रत के द्वारा भी अतिशीघ्र लाभ मिलता है।

मंगल एवं शनि-

मंगल और शनि को उग्र ग्रह की श्रेणी मे भी रखा जाता है और इनके गलत दृष्टि के कारण जातक के जीवन मे बहुत सारी कठिनाइयाँ आती है। इनकी कुदृष्टि से बचाव हेतु जातक को हनुमान जी की आराधना करनी चाहिए।

और हो सके तो मंगलवार एवं शनिवार को सुंदरकाण्ड का पाठ सच्चे मन एवं भाव से करना चाहिए। कहते है जो भी व्यक्ति हनुमान जी की सच्चे मन से आराधना करता है उसके जीवन मे मंगल और शनि ग्रह कोई भी गलत प्रभाव नहीं डालते है।

बुध-

बुध की कुदृष्टि से जातक के जीवन मे उसके सुख वैभव इत्यादि को लेकर परेशानियाँ देखने को मिलती है। यदि जातक बुध की कुदृष्टि से परेशान है। तो उसे बहगवान गणेश की आराधना सच्चे मन से करनी चाहिए।

इसके लिए प्रत्येक दिन भगवान गणेश का पूजन करना चाहिए तथा बुधवार के दिन भगवान गणेश को दूर्वा एवं मोदक का भोग लगाना चाहिए ये उपाय करने के उपरांत स्वयं भगवान गणेश के द्वारा रिद्धि सिद्धि एवं वैभव का वरदान प्राप्त होता है और बुध ग्रह की कुदृष्टि का बिलकुल भी प्रभाव नहीं पड़ता है।

वृहस्पति-

यदि किसी जातक के जीवन मे वृस्पति ग्रह का प्रभाव सही नहीं है। और इसके प्रभाव से परेशान है। तो उसे गुरुवार के दिन उपवास करना चाहिए और पीले वस्त्र, वस्तु इत्यादि का दान करना चाहिए।

साथ ही साथ उसे केले के पेड़ मे प्रतिदिन जल अर्पित करना चाहिए मान्यता है कि केले के पेड़ मे स्वयं वृहस्पति का वास होता है और उसमे जल अर्पित करने से एवं जल अर्पण उपरात्न वृहस्पति का ध्यान करने से वो प्रसन्न होते है। और अपना आशीर्वाद प्रदान करते है।

शुक्र-

शुक्र ग्रह सुख सुविधा और दाम्पत्य जीवन से संबन्धित ग्रह है। और इनकी कुदृष्टि से हमारे दाम्पत्य जीवन हमारे व्यापार और रहम सहम पर असर पड़ता है। इस ग्रह की प्रसन्नता के लिए शुक्रवार के दिन हमे माता लक्ष्मी की विशेष आराधना करनी चाहिए।

तथा साथ ही साथ व्यभिचार एवं कुकृत्य से दूरी बना कर रखनी चाहिए माता लक्ष्मी की आराधना करने मात्र से हम शुक्र ग्रह के शुभ प्रभवों को प्राप्त कर पाएंगे और जीवन की अड़चनों से मुक्त हो सकते है।

राहू एवं केतू-

राहू एवं केतू क्कों पूर्ण ग्रह के रूप मे नहीं माना जाता है। कुंडली मे जब दोनों ग्रह के मध्य अन्य ग्रह विराजमान हो जाते है तब उसे हम कालसर्प दोष के रूप मे जानते है। साथ ही साथ कुंडली के कुछ स्थानो पर इनके निवास से इनके दुष्परिणाम देखने को मिलते है।

राहू एवं केतू के दुष्परिणामों से मुक्ति हेतु हमे भगवान विष्णु की आराधना करनी चाइए इनकी आराधना मात्र से राहू केतू का दुष्प्रभाव खत्म हो जाता है। और जीवन मे खुशहली का आगमन होता है।

अन्य उपाय-

उपरोक्त उपायों के अलावा कुछ उपायों को अगर हम दिनचर्या मे शामिल कर ले तो भी हम ग्रहों की कुदृष्टि से बचाव कर सकते है। जिनमे ग्राहू के राजा सूर्य को प्रतिदिन जल अर्पण करमे से एवं सूर्य नमस्कार करने से सभी ग्रहों का अच्छा फल प्राप्त होता है।

साथ ही साथ हमे अपने इष्ट देव की आराधन प्रतिदीन करनी चाहिए जिससे वो हमे जीवन की कठिनाइयों से मुक्ति प्रदान करते है। एवं जीवन मे नैतिकता का आचरण करने से भी सभी ग्रहों का सुभ फल प्राप्त होता है।

निष्कर्ष 

आज के समाज मे ग्रहों के रूप मे बहुत सारे लोग हमे केवल डराने का काम कर रहे है। और जिससे हम पता नहीं क्या क्या उत पतांग छीजे करते रहते है। सेवा भाव से कुच्छ भी करना अनुचित नहीं है लेकिन धर्म मे डर को लेकर कोई भी स्थान नहीं है।

कुंडली मे स्थित ग्रहों का फल हमे मिलना तो नियति है लेकिन हम अपने आचरण और दिनचर्या मे सुधार कर उनके दुष्प्रभावों से बच सकते है। लेकिन यहाँ अंध विश्वास एवं आडंबर को बढ़ावा देना उचित नहीं है।

अतः उपरोक्त साधारण उपायों को करके आप ग्रहों के दुष्प्रभावों से बच सकते है तथा साथ ही साथ जीवन मे अपने आचरण को सात्विक रखकर उनके सुभ फलों की भी प्राप्ति कर सकते है। ग्रहों का प्रभाव तो हमारे जीवन मे अवश्य होता है लेकिन हम अपने कर्म के आधार पर उसके दुष्परिणामों को लाभ मे परिवर्तित कर सकते है।

||इति शुभम्य||

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