Childish और Childlike behavior में अंतर तथा बच्चों मे Childlike Behavior की उत्पत्ति कैसे करें

एक बच्चे मे सीखने का गुण और उसके प्रति लालसा बहुत ही ज्यादा रहती है। कई बार हम अपने आस पास मे ऐसे बच्चे देखते है जो प्रायः चीजे देखकर उनके बारे मे जानने की बहुत ही ज्यादा जिज्ञासा रहती है।

और जो भी उनके आस पास रहता है उससे वो उस विषय वस्तु की सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त करने का प्रयास करते है। इसी पर आधारित है आज हमारा लेख हम आज जानने का प्रयास करेंगे Childish और Childlike behavior में अंतर के बारे मे।

साथ ही साथ ये भी जानने का प्रयास करेंगे इनमे से कौन हमारे बेहतर मानसिक विकास के लिए आवश्यक है।

Childish Behavior-

इसे हम हिन्दी मे बचकाना हरकत के रूप मे बोलते है। childish behavior से तात्पर्य है जब बच्चो जैसी जिद नासमझी इत्यादि का प्रदर्शन करते है तो उसे अच्छा नहीं माना जाता है।

विचारों और प्रश्नो से भरा दिमाग होना बहुत ही अच्छी बात है लेकिन शरारत से भरा और जिद से भरा दिमाग का होना अच्छे व्यक्ति की पहचान नहीं होती है। तर्को का प्रयोग करना उचित माना जाता है।

लेकिन कुतर्को के द्वारा अपनी बात मनवाना अनुचित माना जाता है। और childish behavior के कारण हमारे मानस पटल मे उद्दंडता का भी उद्भव होता है। जो किसी भी मायने मे उचित नहीं माना जा सकता है।

Childlike Behavior-

वहीं दूसरी तरफ हमारे मन मे अच्छे विचारों का होना, तर्क के भाव का होना, दुनिया मे व्याप्त विषय वस्तु को लेकर मन मे जिज्ञासा उत्पन्न होना Childlike behavior की निशानी है।

उदाहरण के तौर पर जितने भी महान वैज्ञानिक हुए कहीं न कहीं उनके मन मे किसी न किसी विषय वस्तु को लेकर जिज्ञासा अथवा प्रश्न उत्पन्न हुआ और उसके जवाब की तलाश मे जब उनको सफलता मिली तो आज वो एक महान वैज्ञानिक के रूप मे प्रसिद्ध है।

चाहे बात करे न्यूटन की या फिर जेम्स वाट की या फिर किसी और वैज्ञानिक की सभी के मन मे ऐसे प्रश्न के उत्तर जानने की जिज्ञासा उत्पन्न हुई जो हमारे पहले से ही लोगो के दैनिक जीवन मे होती आ रही थी। लेकिन इसी जिज्ञासु स्वभाव ने आज उन्हे अलग ही पहचान प्रदान की।

कैसे करे Childlike Behavior की उत्पत्ति-

कोई भी बच्चा पैदा होने का साथ ही सब कुछ सीख कर नहीं आता बल्कि धीरे धीरे कलानुक्रम मे वो चीजों को सीखता है। और हमारे आस पास के वातावरण और देश काल परिस्थिति का बहुत ही अधिक प्रभाव उस पर पड़ता है।

तो यदि हम शुरू से ही बच्चों को ऐसा माहौल पैदा करे तो उनमे Childlike Behavior अथवा जिज्ञासु स्वभाव को उत्पन्न किया जा सकता है। जिनमे से कुछ निम्नलिखित है।

1. पढ़ने की रुचि-

सर्वप्रथम हमे बच्चे मे पढ़ने की रुचि का विकास करना होगा चाहे वो डिजिटल माध्यम मे हो या फिर सामान्य किताबों इत्यादि के जरिये हो। जब भी बच्चे मे पढ़ने के प्रति रुचि जागृत होगी तो अवश्य ही कुछ बातों को लेकर उसके मन मे प्रश्न उठेंगे।

और उन प्रश्नो के उत्तर प्राप्त करने हेतु उसके मन मे जिज्ञासा उत्पन्न होगी। अतः अगर बच्चों मे पढ़ने के प्रति रुचि पैदा करनी है तो शुरू से ही घर के बड़े बुजुर्गों को उनके सामने खुद भी पड़ने की आदत का विकास करना पड़ेगा। जिससे बच्चा भी उन पुस्तकों या फिर digital संसाधनो का प्रयोग पड़ने के लिए करेगा।

2. कुछ नया सीखने की ललक-

बच्चों को कुछ नया सीखने के लिए प्रेरित करना होगा। जो किसी भी रूप मे हो सकता है। हमने देखा है कई सारे वैज्ञानिक थे जिन्हे किसी न किसी वाद्य यंत्र बजने की रुचि थी।

उदाहरण के तौर पर अब्दुल कलाम साहब बहुत ही अच्छे वीणा वादक थे। और रोज वे कुछ समय वीणा वादन मे देते थे। महान लोगो को हमेशा कुछ न कुछ नया सीखने की ललक रहती है।

जो इनके जिज्ञासु स्वभाव को और मजबूत बनती है। और इसी स्वभाव के कारण ये नित कुछ नए Innovation और creativity करते रहते है।

3. महान लोगो को जानना-

बच्चे मे जिज्ञासु स्वभाव का विकास करने मे सबसे सहायक तत्व है। उन्हे महान लोगो की जीवनी उनके विचारो को बताना उन्हे प्रेरित करना कि वो महान लोगो के जीवन संघर्ष और उनके जीवन के उतार छड़ाव के बारे मे जाने जिससे बच्चों मे सकारात्मक भाव उत्पन्न होगा तथा जो उन्हे कुच्छ नया करने और सोचने के लिए प्रेरित करेंगी।

4. मनोरंजन के साधनो का चयन-

तकनीकी से इस परिपूर्ण समाज मे आज मनोरंजन के साधन के रूप मे बहुत सारे विकल्प है। कई सारे प्रोग्राम, चैनल, सोशल मीडिया प्लैटफ़ार्म, ऑनलाइन वैबसाइट उपलब्ध है तो यहाँ इनके चयन का ध्यान रखना भी बहुत आवश्यक है।

बच्चे को हमेशा ज्ञानवर्धन करने वाले मनोरंजन के साधनों के उपयोग हेतु प्रेरित करें साथ ही साथ उन्हे अनुपयोगी और विचारों को दूषित करने वाले साधनो से दूरी बनाने का प्रयास करें।

5. समाज के प्रति ज़िम्मेदारी-

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। और एक समाज का अभिन्न अंग होने के कारण हम सभी का कर्तव्य है कि हम सभी इस समाज के नव निर्माण इसके सुव्यवस्थित संचालन मे सहयोग करें।

इस समाज और प्रकृति से हमे बहुत कुछ प्राप्त होता है और हमारा सम्पूर्ण जीवन इन्ही पर टिका हुआ है तो हमे भी इसके बदले मे इसे कुछ देने का प्रयास करना चाहिए। बच्चों मे ऐसी भावनाए पैदा करनी चाहिए।

निष्कर्ष

उपरोक्त अवयवों के अलावा और भी कई सारे अवयव है जिसके द्वारा बच्चों मे childlike behavior की उत्पत्ति की जा सकती है। जैसे उनके अंदर सत्य और ईमानदारी के प्रति जागरूक करे इन आदर्शों पर जीवन जीने के लिए प्रेरित करे।

क्योंकि एक बच्चा अपने स्वभाव से बहुत ही लोयल होता है। और ये एक प्रमुख गुण है जो बच्चों मे ईर्ष्या, कपट, छ्ल इत्यादि की भावना नहीं पैदा होने देता है जिससे बच्चा सभी प्रकार के विचारों के प्रति तटस्थ रहता है।

उसके विचारों को कोई भी विचलित नहीं कर सकता सबके प्रति उसकी प्रतिक्रिया अथवा व्यवहार एक समान रहता है। Childlike Behavior की उत्पत्ति से बच्चे का मानसिक विकास भी सही दिशा मे होगा जो आगे चलकर समाज के लिए बहुत ही लाभदायक सिद्ध हो सकता है।

अतः उपरोक्त तथ्यों का अपने बच्चे के जीवन मे अनुशरण करके बच्चे का सही विकास और समाज के लिए एक अच्छा नागरिक बनाने का प्रयास करे।

||इति शुभम्य||

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