चतुर्मास जब भगवान विष्णु शयन करते है- देवशयनी एकादशी

chaturmas dev shayani ekadashi- Kissa Kahani

आषाढ़ शुक्ल पक्ष एकादशी के दिन को हरिशयनी एकादशी या फिर देवशयनी एकादशी के रूप मे माना जाता है। वैसे तो वर्ष मे कुल 24 एकादशी होती है। लेकिन आषाढ़ मास शुक्ल पक्ष की एकादशी और कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की एकादशी का महत्व बहुत अधिक है।

इन्ही चार मास के अंतराल को चतुर्मास के रूप मे भी जाना जाता है। मान्यता है कि इस चार मास के लिए बहगवान विष्णु योगनिद्रा मे चले जाते है। कई पौराणिक पुस्तकों मे भी बताया गया है कि भगवान विष्णु के 2 निवास स्थान है जिसमे क्षीर सागर मे अपनी योगनिद्रा के समय यानि इन चार महीनों मे रहते है और बाकी के महीने वैकुंठ मे।

इस वर्ष 20 जुलाई को हरिशयनी एकादशी का योग है। मान्यता है कि इस चतुर्मास मे मांगलिक कार्य का आयोजन नहीं होता है। और पुनः हरि प्रबोधिनी अथवा देवोत्थनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागते है।

इस चतुर्मास मे ईश वंदना भक्ति का महात्म्य बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। मान्यता है कि जब भगवान विष्णु योग निद्रा मे जाते है तो चूंकि वो ही इस संसार के पालन कर्ता हैं इसलिए इस समय उनका नाम जप ध्यान करने से उनकी कृपा बनी रहती है।

इस चतुर्मास मे कोई शुभ कार्य न होने का कारण है कि इस समय भगवान विष्णु योगनिद्रा मे रहते है और सभी शुभ कार्य ईश्वर की उपस्थिती मे होता है अतः इन चार महीनो मे शुभ कार्य वर्जित है लेकिन इन चार मासों को अन्य देवों को समर्पित किया गया है। जिसमे श्रवण मास भगवान शिव को समर्पित है।

भाद्रपद मास भगवान गणेश को जिसमे गणेश उत्सव का आयोजन किया जाता है। और आश्विन मास फ़िटरों एवं माँ भगवती को समर्पित है। एवं कार्तिक मास भगवान विष्णु की आराधना को समर्पित है इसी कार्तिक मास की वंदना उपरांत भगवान विष्णु पुनः योगनिद्रा से जागते है।

अब हम बताएँगे कि आखिर क्यों भगवान विष्णु चार मास के लिए विश्राम करते है इसको लेकर बहुत सारी कथाएँ है लेकिन उनमे से सबसे प्रमुख कथा इस प्रकार से है। भक्त प्रहलाद के पोते और पटल लोक के राजा बलि जो कि बहुत ही दानी ध्यानी और विद्वान थे उन्होने अपने तप, दान इत्यादि के बल पर सभी लोकों मे अपना वर्चस्व बना लिया।

राजा बलि के पराक्रम से देवता भी भयभीत हो गए उन्हे भी डर सताने लगा कि कहीं बलि स्वर्ग पर भी अपना आधिपत्य न जमा ले इसके उपरांत देवराज इन्द्र सभी देवताओं के साथ भगवान विष्णु के पास जाते है और उनसे अपनी समस्या बताते है।

भगवान विष्णु देवताओं को आश्वस्त करते है और वामन रूप धरण कर राजा बलि के द्वार भिक्षा मांगने जाते है। राजा बलि द्वार पर आए ब्राह्मण को देखकर प्रसन्न होता है और उनसे कुछ भी देने को राजी हो जाता है जिससे वामन देव तीन पग मे ही सम्पूर्ण तीनों लोको को नाप लेते है परंतु वो राजा बलि के इस दान और समर्पण की भावना को देखकर बहुत प्रसन्न होते है और उनसे वरदान मांगने को कहते है।

इसपर राजा बलि भगवान विष्णु से पटल लोक मे अपने साथ चलने को कहते है। तब भगवान विष्णु उन्हे आशीष देते है कि प्रति वर्ष वो विश्राम करने हेतु पटल लोक मे निवास करेंगे और तब से प्रति वर्ष भगवान विष्णु 4 मास के लिए विश्राम करने पटल लोक मे जाते है।

इस प्रकार भगवान विष्णु अपने सभी भक्तों की बात सुनते है। और हमे भी इस चतुर्मास मे भगवान विष्णु की आराधना करनी चाहिए और पुण्य फल का भागीदार बनना चाहिए। भगवान विष्णु सम्पूर्ण जगत के पालन कर्ता हैं और यही हमारे जीवन को सुचारु ढंग से संचालित करते है। इनके ही कृपा से हम सभी जीवन मे शुख दुख का अनुभव करते है। हमारे कर्मों के आधार पर हमारे जीवन के पाठ का निर्माण इन्ही के आदेश से होता है।

तो इस चातुर्मास शरद्धा भक्ति प्रेम के साथ सच्चे मन से भगवान की आराधना और पूजन वंदना इत्यादि कर उनके पुण्य प्रताप का लाभ उठाएँ।

!!इति शुभम्य!!

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