शास्त्रार्थ और धर्म के नियमों की व्याख्या मे इसका महत्व- दार्शनिक विवेचना

शास्त्रार्थ और धर्म के नियमों की व्याख्या मे इसका महत्व- दार्शनिक विवेचना

भारतीय सनातन धर्म मे शास्त्र और शास्त्रार्थ का बहुत ही अधिक महत्व है धर्म के नियम उनके अवयव की विवेचना का कार्य इन्ही की जरिये की जाती है। लेकिन आज के समय मे शास्त्रार्थ को वाद विवाद के रूप मे जाना जाता है जो इसकी व्याख्या को दूषित करता है। तो आज के इस लेख…

कब होती है पूजा स्वीकार- दार्शनिक विवेचना

कब होती है पूजा स्वीकार- दार्शनिक विवेचना

भारतीय संस्कृति हो या फिर कोई अन्य संस्कृति अथवा सभ्यता, पूजा पाठ और prayer की परंपरा सभी जगहों पर प्रचलित है। और लोगो का पूजा पाठ करने का उद्देश्य भी एक समान होता है। लेकिन प्रश्न ये उठता है कि क्या सभी की पूजा ईश्वर स्वीकार करते है या फिर इसके भी कुछ मानक है।…

राष्ट्रकवि दिनकर रचित रश्मिरथी द्वारा ईश्वर वर्णन- जयंती विशेष

राष्ट्रकवि दिनकर रचित रश्मिरथी द्वारा ईश्वर वर्णन- जयंती विशेष

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर का जन्म दिवस 23 सितंबर को मनाया जाता है। इनकी कृति संस्कृति के चार अध्याय हेतु इन्हे साहित्य अकादमी पुरस्कार से नवाजा गया था। साथ ही साथ पद्मविभूषण से सम्मानित किया गया है। दिनकर जी की रचना रश्मिरथी, जिसमे महाभारत का उद्धहरण किया गया है और जो कविता संग्रह मूलतः कर्ण…

विद्यार्थी शिक्षक और शिक्षक दिवस का महत्व- 05 सितंबर शिक्षक दिवस दार्शनिक विवेचना

विद्यार्थी शिक्षक और शिक्षक दिवस का महत्व- 05 सितंबर शिक्षक दिवस दार्शनिक विवेचना

विद्यार्थी शिक्षक और शिक्षक दिवस का महत्व- हम जिस भी समाज मे रहते है उसमे अगर उस समाज का सही निर्माण और संचालन होता है तो उसमे शिक्षक का बहुत ही बड़ा योगदान होता है। एक बच्चे का मानसिक और सामाजिक विकास और उसके समाज के प्रति योगदान देने केलिए प्रेरित करने का काम एक…

सनातन धर्म अनुसार ऐसे करें दिन की शुरुआत

सनातन धर्म अनुसार ऐसे करें दिन की शुरुआत

प्रायः हम देखते है जब किसी व्यक्ति का दिन अच्छा नहीं रहता है तो उसके मुह से सुनने को मिलता है कि आज पता नहीं किसका चेहरा देखा था जिससे आज मेरा दिन अच्छा नहीं जा रहा है। यानि की हमारे दिन की शुरुआत का हमारे पूरे दिन पर बहुत ही ज्यादा प्रभाव पड़ता है।…

भगवान श्री कृष्ण को प्राप्त थी 16 कलाएं (विद्याएँ): क्या है इनका रहस्य

भगवान श्री कृष्ण को प्राप्त थी 16 कलाएं (विद्याएँ): क्या है इनका रहस्य

प्राचीन काल मे गुरुकुल पद्धति के अनुसार शिक्षा प्रदान की जाती थी। और इसमे सबसे प्रमुख 16 विद्याओं का बहुत ही महत्व था। यहाँ तक मान्यता थी जो विद्यार्थी अपने गुरु से 16 विद्याओं मे निपुणता प्राप्त कर लेता था उसे ब्रह्मपुरुष की पदवी प्राप्त होती थी। चूंकि आज जनमाष्टमी का महापर्व है तो बरबस…

नर सेवा करने वाला ही असली नायक (Real Hero)

नर सेवा करने वाला ही असली नायक (Real Hero)

मानवता के कुछ प्रमुख गुणो की बात की जाये तो उनमे सबसे प्रमुख कारक है सेवा भाव और सेवा भाव ही हमे असली मानव के स्वरूप को पहचान देती है। किसी साधु की बात हो या फिर कोई भी महापुरुष उसमे सबसे प्रमुख गुण रहा है सेवा भाव का गुण और इसीलिए एक असली नायक…

जन जन को राम नाम सुलभ कराया महाकवि तुलसीदास ने- जयंती विशेष

जन जन को राम नाम सुलभ कराया महाकवि तुलसीदास ने- जयंती विशेष

जन जन के मन मस्तिष्क मे राम की कथा कंठस्थ है और अगर बोला जाये इसका प्रमुख कारण महाकवि तुलसीदास (Tulsidas) है तो ये कोई अतिस्योक्ति नहीं होगा। आज श्रावण मास के शुक्ल पक्ष के सप्तमी तिथि को जन कवि तुलसीदास बाबा का जयंती है। तुलसी दास ने अपनी महान रचना रामचरितमानस के जरिये जन…

क्या होता है कर्म योग (Karm Yog): कर्म योगी (Karma Yogi) के लक्षण

क्या होता है कर्म योग (Karm Yog): कर्म योगी (Karma Yogi) के लक्षण

भारतीय सनातन धर्म मे हमारे जीवन में कर्म की बहुत ही ज्यादा प्रधनता है। गीता मे भी कर्म की सम्पूर्ण और विस्तृत व्याख्या की गई है। अतः कर्म की प्रधानता हमारे जीवन मे आवश्यक तत्व के रूप में है। कर्म ही हमारे पाप पुण्य का निर्धारण करता है। और उससे ही हमारे आगे का जीवन…

मानसिक मजबूती से शारीरिक मजबूती- दार्शनिक विवेचना

मानसिक मजबूती से शारीरिक मजबूती- दार्शनिक विवेचना

आज की दौड़ भरी जिंदगी में मानव सब कुछ पाने में सक्षम है। तकनीकी और नए संसाधनो के जरिये मानव के पास हर तरह की सुख सुविधाएं उपलब्ध है। लेकिन जो उसके लिए अति आवश्यक है केवल उसी की उसके पास कमी है। हम बात कर रहे है। मानसिक मजबूती से जो की उसके शारीरिक…