कार्टून प्रोग्राम: 90 का दशक और आज के समय में परिवर्तन

भारत में कार्टून प्रोग्राम का उद्भव-

अगर देखा जाए तो भारत में कार्टून प्रोग्राम (Cartoon Characters India) का उद्भव 90 के दशक मे हुआ दूरदर्शन का नया नया आगाज हुआ था। रामनन्द सागर कृत रामायण और बी. आर. चोपड़ा कृत महाभारत के साथ ही द जंगल बुक (मोगली की कहानी) भी जन सामान्य में प्रचलित थी।

कार्टून प्रोग्राम से पहले कार्टून किताबों का बहुत ही ज्यादा प्रचलन था जिनमे प्राण कृत कार्टून कहानियाँ (कॉमिक्स) बच्चों में बहुत ही ज्यादा लोकप्रिय थे, इस विषय पर फिर कभी लेख अवश्य लिखेंगे अभी हम बात करते है कार्टून प्रोग्राम की।

मुझे अभी भी याद है शुक्रवार को शाम 4 बजे दूरदर्शन पर अरेबियन नाइट्स (अलादीन और जिनी) आती थी। और मेरे स्कूल की बस पूरा चक्कर लगाने के बाद सबसे आखिरी में मुझे घर लाती थी जिससे मेरा प्रोग्राम छूट जाता था। तो मैंने बस से आना ही बंद कर दिया। तो चलिये अनुभव करते है 90 के दशक के कार्टून की दुनिया और आज के समय से वह कितना परिवर्तित था।

90 के दशक में कार्टून प्रोग्राम-

90 के दशक मे कार्टून प्रोग्राम (and Cartoon Characters India)उस समय के बच्चों के लिए किसी खजाने से कम नहीं था, उस समय के बच्चों के लिए आज के समय अनुसार इतने चैनल उपलब्ध नहीं थे हाँ अपवाद रूप मे कह सकते है कि कुछ समृद्ध परिवारों के पास केबल कनैक्शन होते थे लेकिन यहाँ मै बात उस वर्ग की कर रहा जिनकी संख्या ज्यादा थी जो पूरी तरह दूरदर्शन पर निर्भर रहते थे।

20वीं शदी के कार्टून प्रोग्राम की कोई भी जानकारी जिन्हे न हो उन्हे भी उस समय के कार्टून प्रोग्राम द जंगल बुक का नाम जरूर ही मालूम होगा। अगर मै गलत न हूँ तो यह पहला भारतीय परिप्रेक्ष में बना कार्टून प्रोग्राम था। इसके अलावा हम पूरी तरह डिज़्नी के प्रोग्राम पर निर्भर थे जिनका भी एक निश्चित टाइम था। जो प्रायः कुछ दिन शाम को 4 से 5 एवं रविवार के दिन सुबह 9 से 10 के बीच प्रसारित होते थे।

अब अगर बात करें 90 के दशक के कुछ बहुत ही लोकप्रिय कार्टून प्रोग्राम की तो वो इस प्रकार से है। मै पूरी आशा करता हूँ कि आप शायद एक बार इस लिस्ट में दिये गए कार्टून को अवश्य देखेंगे।

अब 90 के दशक के कार्टून प्रोग्राम को भी हम दो भाग में बाँट सकते है।

केबल टीवी से पहले-

  • जंगल बुक
  • डक टेल्स
  • टेल्सपिन
  • अरेबियन नाइट्स
  • गम्मी बियर इत्यादि।

केबल टीवी आने के बाद- हम कुछ खुसनसीब तो थे कि हमारा बचपन बीतने से पहले 21वीं सदी शुरू होने से कुछ वर्ष पहले केबल टीवी का प्रसारण हो गया था अब देखते है लिस्ट को।

  • टीमोन एंड पुम्बा
  • करेज द कावर्डलि डॉग
  • डेक्स्टर’स लैबरोट्री
  • फ्लिण्टस्टोन्स इत्यादि।

90 के दशक और आज के समय मे परिवर्तन एवं अंतर-

ऊपर की लिस्ट देखकर ऐसा नहीं समझा जाना चाहिए कि 90 के दशक में कार्टून प्रोग्राम (Cartoon Characters India) की कमी थी, बल्कि हमारा ये लेख अपने विषय से भटक न जाये तो बात करते है की उस समय और आज के समय में क्या अंतर है या फिर कहें क्या परिवर्तन हुए।

तकनीकी परिवर्तन-

90 के दशक के कार्टून में ग्राफिक्स बहुत ही आधारभूत तकनीकी के थे। उस समय यह अपने शुरुवाती चरण में था इसलिए उनके डिस्प्ले आज कि तरह नहीं थे। जबकि उन्हे हम 3डी जैसी उन्नत तकनीकी में न देखकर 2डी तकनीकी पर देखते थे। इन कार्टून के निर्माण में भी बहुत समय लगता था।

क्योंकि उस समय आज की तरह एनिमेशन सॉफ्टवेर इत्यादि का प्रयोग नहीं होता था। ठीक ऐसे ही ग्राफिक्स इत्यादि की बात की जाये तो आज की तुलना में 90 की दशक के कार्टून किसी भी प्रतिस्पर्धा मे नहीं आते।

विषय सामाग्री-

अब बात करे 90 के दशक और आज के समय के कार्टून प्रोग्राम (Cartoon Characters India) के विषय सामाग्री की, तो 90 के दशक के कार्टून प्रोग्राम की विषय सामाग्री ज्यादा उन्नत मानी जायेगी। मै ये नहीं मानता की आप भी इस बात से सहमत हो। लेकिन अगर देखा जाये तो आज कल के कार्टून प्रोग्राम में कुछ ऐसे विषय दिखाये जाते है, जो एक बाल मन के लिए उचित नहीं है इनमे हिंसा घृणा इत्यादि को प्रेरित किया जाता है।

कुछ कार्टून तो ऐसे भी है जिनमे छोटे बच्चे अपने बड़ो से दुर्व्यवहार करते है। कुछ प्रमुख किरदार आलसी पढ़ाई मे कमजोर इत्यादि भी दिखाये जाते है, इसी कारण मै मानता हूँ कि आज के कार्टून प्रोग्राम भले ही तकनीकी में उच्च हो लेकिन विषय वस्तु के अनुसार वो आज भी 90 के दशक के कार्टून प्रोग्राम से कमजोर है।

निष्कर्ष

चूंकि उपरोक्त तथ्यों से कह सकते है, कि आज के समय के कार्टून प्रोग्राम की तकनीकी एवं 90 के दशक के कार्टून की विषय सामाग्री उन्नत थी। पर इससे हम यह नहीं कह सकते कि आज के समय की सभी कार्टून प्रोग्राम की विषय सामाग्री बिल्कुल भी सही नहीं।

किसी भी समय में अच्छे बुरे दोनों तरह की चीजे देखने को मिलती है केवल जरूरत है अच्छे विषय को चुनने की एवं बुरे विषयों को नकारने की और कार्टून प्रोग्राम का आनंद प्राप्त लेते रहने की।

!इति शुभम्!

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