अयोध्या (श्री राम जन्म भूमि) महातीर्थ जाने योग्य समय कौन सा समय होगा बेहतर

best time to visit ayodhya- Kissa Kahani

दोस्तों सनातन धर्म में तीर्थयात्रा का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है सनातन धर्म के धार्मिक और पौराणिक स्थानों की यात्रा करने से पुण्य लाभ प्राप्त होता है। वैसे तो सनातन संप्रदाय मे बहुत सारे तीर्थ स्थलों का वर्णन है लेकिन उन्मे से चार धाम और सप्तपुरियों का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है। और इन्ही सप्तपूरियों से सबसे प्रथम स्थान पर नाम आता है अयोध्या तीर्थ तो आज हम इस लेख के जरिए बात करेंगे कि अयोध्या तीर्थ भ्रमण के लिए सबसे अच्छा समय कौन सा होगा।

वैसे तो अयोध्या तीर्थक्षेत्र की यात्रा कभी भी की जा सकती है बारह महीनों वहाँ उत्सव त्योहार और धार्मिक समावेश का माहौल राहत है लेकिन कुछ प्रमुख त्योहार और पर्व है जब वहाँ जाना बहुत ही रमणीक अनुभव प्रदान करेगा। तो चलिए विस्तार से जानते है उस समय से के बारे में।

1- चैत्र मास रामनवमी पर्व- चैत्र शुक्ल प्रतिप्रदा हमारे सनातन धर्म मे नए वर्ष के रूप मे मनाया जाता है और इस दिन से 9 दिनों तक नवरात्र पर्व का आयोजन भी होता है लेकिन अयोध्या के लिए इन 9 दिनों का एक अलग ही महत्व है। क्योंकि चैत्र शुक्ल नवमी के दिन मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम का जन्मोत्सव मनाया जाता है जिसे राम नवमी के नाम से भी जानते है।

अयोध्या मे इन 9 दिनों तक बहुत ही भव्य आयोजन होता है। दूर दूर से लाखों लोग इस पर्व का आनंद लेने के लिए आते है। और अयोध्या के हर छोटे बड़े मंदिर मे 9 दिनों तक बधाई पर्व का आयोजन होता है। एक अभूत ही भव्य मेले का आयोजन होता है साथ ही कुछ प्रमुख मंदिर जैसे कनक भवन इत्यादि मे राम जन्मोत्सव देखने का आनंद ही कुछ और है। जिसका सीधा प्रसारण दूरदर्शन पर भी किया जाता है। इस समय अयोध्या तीर्थ का भ्रमण आपका मन मोह लेगा।

2- श्रावण मास झुलनोत्सव- सावन का महिना वर्ष ऋतु का मास मन जाता है पुराने समय से इस मास मे हम लोग झूला झूलते है और गायन वादन का कार्य करते है। अयोध्या मे भी पूरे श्रावण मास मे एक महीने तक झुलनोत्सव पर्व का आयोजन किया जाता है। जिसकी शुरुआत गुरु पूर्णिमा पर्व से आरंभ होती है आर रक्षाबंधन पर्व तक अनवरत होता राहत है एक भव्य मेले का आयोजन होता है। रोज संध्या मे भगवान के विग्रह को झुलनों मे बिठाया जाता है और भक्तों द्वारा झूलन के गीत गाए जाते है। सभी मंदिरों की सुंदरता देखने लायक होती है।

3- कार्तिक मास कल्प मास- कार्तिक मास मे पूरे महीने सन्यास आश्रम और वानप्रस्थ आश्रम जीवन यापन करने वाले पूरे महीने अयोध्या मे कल्प वायस करते है और अपना पूरा समय भागवत भक्ति मे गुजरते है। अन्य आयु के लोग इस पूरे मास मेले और परिक्रमा पर्व जो कि कार्तिक शुक्ल नवमी को चौदह कोशी तथा कार्तिक शुक्ल एकादशी को पंचकोशी का अनाद लेते है और पूरे मास कल्प वास करने वाले बहुत ही कठिन नियमों का पालन करते हुए अपना कल्प वास पूरा करते है।

4- देव दीपावली- कार्तिक मास मे ही दीपावली पर्व से 2 से 3 दिन पहले अयोध्या मे भव्य देव दीपावली पर्व का आयोजन किया जाता है। जो कि भगवान राम के अयोध्या आगमन के उपलक्ष्य में आयोजित किया जाता है। सरयू तट पर स्थित राम की पैड़ी पर लाखों मे दिए जलाए जाते है और कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। हर वर्ष पिछले वर्ष से अधिक दिए जल कर इसका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड मे दर्ज कराया जाता है।

इन चार प्रमुख पर्व के अलावा भी बहुत सारे त्योहार और तिथियों पर अयोध्या मे आयोजन होते रहते है। जैसे राम विवाह और रामायण मेल इत्यादि साथ ही हर मंगलवार एकादशी की तिथि एवं त्रयोदशी तिथि पर लाखों भक्त यहाँ पर आकार सरयू स्नान करके भागवत दर्शन करके अपने को अभिभूत करते है।

तो यदि आप बी अयोध्या तीर्थ क्षेत्र दर्शन का विचार अपने मन मे ला रहे है है तो इन प्रमुख पर्वों के समय भ्रमण करने का विचार बनाए आपके आनंद की अनुभूति की गुण ज्यादा हो जाएगी साथ ही अयोध्या सभी प्रमुख रेल लाइन एवं हाइवै से जुड़ा है और जल्द ही यहाँ एक भव्य इंटरनेशनल एयरपोर्ट का भी शुभारंभ हो जाएगा तथा ठहरने के लिए यहाँ बहुत सारे होटल, धर्मशाला इत्यादि भी बहुत आसानी से मिल जाएंगे। तो फिर जल्द ही अयोध्या तीर्थ भ्रमण के लिए आइए और अपने धार्मिक अनुभव का आनंद लीजिए।

॥ इति शुभम॥

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