बच्चों को एक बार जरूर दिखाएँ ये क्लासिक हिन्दी फिल्में

best classic hindi movies- Kissa Kahani

कहते है हर चीज से हम कुछ न कुछ सीख सकते है। आज के समय मे मनोरंजन का सबसे बड़ा साधन सिनेमा भी हमे बहुत कुछ सिखाता है। आज के इस महामारी काल मे बाहर जाकर मनोरंजन करना असुरक्षित हो सकता है। और सिनेमा ही एक ऐसा साधन बचा है तो घर के अंदर बंद हमारे जीवन को बोर होने से बचाती है।

तो आज हम कुछ ऐसी पुरानी हिन्दी फिल्मों की बात करेंगे जो आपको अपने बच्चों के साथ एक बार जरूर देखनी चाहिए ये प्रेरणादायक और मनोरंजक दोनों ही कैटेगरी मे खरे उतरते है।

दो आंखे बारह हाथ- सन 1957 मे आई ये फिल्म आज भी उतनी ही प्रेरणादायक है। वी. शांताराम द्वारा बनाई गई और उनके ही द्वारा अभिनीत फिल्म मेरी लिस्ट मे आज भी सबसे Best फिल्म है। ये कहानी है 6 खूंखार कैदियों की जिसे एक जेलर सुधारने का बीड़ा उठता है और किन परिस्थितियों से गुजरते हुए वो उन्हे सच्ची राह पर लता है। वो देखना बहुत ही रोचक है। आज भी इस फिल्म की IMDB रेटिंग 8 अंक से ऊपर है।

पूरब पश्चिम- 1970 मे आई इस फिल्म से हम बहुत ही ज्यादा प्रेरणा ले सकते है अभिनेता मनोज कुमार द्वारा अभिनीत और निर्देशित जिन्हे हम भारत कुमार के नाम से भी जानते है। ये फिल्म जैसा की नाम है दो संस्कृतियों की कहानी है जहां भारतीय संस्कृति की महानता और इसकी विशालता के बारे मे बहुत अच्छे से रचना की गई है।

जाने भी दो यारों- 1983 मे बनी ये फिल्म बहुत ही कम बजट की फिल्म थी लेकिन अभिनय के मामले मे बहुत ही उम्दा कैटेगरी की फिल्म थी कई महान कलाकारों का संगम इस फिल्म मे देखने को मिलता है। कुन्दन शाह द्वारा निर्देशित जिसमे नसीरुद्दीन शाह, ओम पूरी सतीश शाह, रवि वासवानी, सतीश कौशिक, पंकज कपूर, नीना गुप्ता जैसे महान अभिनय के महासागर कलाकारों ने अभिनय किया है। corruption की रूपरेखा को दर्शाती ये फिल्म मेरे Best फिल्मों की कैटेगरी मे एक अच्छा स्थान रखती है।

बावर्ची- 1972 मे मेरे फेवरेट निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी द्वारा निर्मित ये फिल्म मेरे दिल को छू जाती है। राजेश खन्ना द्वारा अभिनीत इस फिल्म मे न ही कोई romance है और न ही action एक बड़े से घर की चार दिवारी के मध्य होने वाली रोज़मर्रा की जिंदगी पर आधारित इतनी अच्छी फिल्म जिस तरह से उसका फिल्मांकन किया गया या फिर जिस तरह से उसे एक कहानी का रूप दिया गया है वो सच देख कर बहुत ही आनंद आ जाएगा।

एक रुका हुआ फैसला- 1986 मे बासु चटर्जी द्वारा निर्देशित जिसमे अभिनय किया है पंकज कपूर, अनु कपूर और बहुत सारे मंझे हुए कलाकारों ने। ये कहानी है तब कि जब हमारे न्याय प्रणाली मे किसी अपराध का फैसला एक jury members का ग्रुप लेता था इस फिल्म मे सम्पूर्ण कहानी एक बड़ी मेज के इर्द गिर्द ही घूमती है जहां एक लड़के को अपने पिता के कत्ल के जुर्म में दोषी और निर्दोष साबित करना होता है। और कैसे एक jury मेम्बर के विरोध के बाद धीरे धीरे सभी मेम्बर उसे निर्दोष साबित कर देते। कहानी बहुत ही अच्छी है।

ऊपर बताई गई फिल्मों के अलावा भी बहुत सारी फिल्मे है जिनहे एक लेख मे बताना नामुमकिन है। मदर इंडिया, आँधी, आनंद, छोटी सी बात, मासूम और न जाने कितने फिल्म है जो पुरानी यादों को ताजा करने के अलावा कुछ अच्छा सिखाते है।

पुरानी फिल्मों को बच्चों को दिखने का एक उद्देश्य ये भी है कि पहले के समय की अभिनय कला उस समय की कम तकनीकी के बाद भी बनने वाली अच्छी फिल्मों के बारे मे जान पाये अपने समय की फिल्मे इत्यादि तो देखते ही है साथ ही वो ये जान पाये की आज की कहानी और पहले की कहानियों मे कितना अंतर रहता था।

कुछ फिल्मे जो कि पुराने महान लेखकों की कहानियों पर भी बनी है। जैसे गाइड जो की आर के नारायण की अङ्ग्रेज़ी उपन्यास गाइड की कहानी पर बनाई गयी है। इसके अलावा फणीश्वर नाथ रेणु की मारे गए गुलफाम पर राज कपूर साहब की तीसरी कसम फिल्म बनी है। और बहुत सारी फिल्मे प्रेमचंद की कहानियों और उपन्यास फार्म आधारित है जिसमे से दो बैलों की कथा पर आधारित हीरा मोती बहुत ही प्रचलित कथा है।

इसके अलावा कुछ director है जिनकी कहानियाँ विश्व पटल पर शोभायमान है जैसे सत्यजित रे, ऋषिकेश मुखर्जी इत्यादि की फिल्मे। कुछ समय निकालकर अपने बच्चों के साथ इन फिल्मों को एंजॉय जरूर करना चाहिए। उससे जो बच्चो के मन मस्तिष्क मे नए पुराने दोनों की जो अच्छी समझ उत्पन्न होगी वो उन्हे बहुत काम भी आ सकती है।

तो फिर इस Weekend प्लान बनाइये और इन फिल्मों का अपने परिवार के साथ आनंद ले।

!!इति शुभम्य!!

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