बाज भी सिखाता है बच्चों की सही परवरिश का तरीका

baaj aur uska bachcha- Kissa Kahani

इस दुनिया मे प्राणियों के तीन रूपों में विभक्त किया गया है। जलचर, थलचर और नभचर। सभी पक्षी जो उड़ने की क्षमता रखते है उन्हे नभचर माना जाता है। इन्ही पक्षियों मे से बाज को सबसे ताकतवर और बुद्धिमान पक्षी के रूप मे जाना जाता है। वो अपने बच्चे की परवरिश शुरू से ऐसे करता जिससे उसका बच्चा आगे चलकर शक्तिशाली और आत्मनिर्भर बने।

आज के इस लेख मे हम बात करेंगे कि किस प्रकार से एक बाज अपने बच्चे को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाता है। और बच्चों की परवरिश का ये तरीका हमे भी सीखने की आवश्यकता है।

एक बाज का बच्चा जब अपने अंडे से बाहर आता है तो उसकी माँ कुछ ही दिनों मे उसे उड़ना सिखाना शुरू कर देती है। होता इस प्रकार से है को वो माँ अपने बच्चे को अपने बाजुओं मे भरकर आसमान की उचाइयों मे ले जाती है, हम सभी जानते है कि एक बाज पक्षी बाकी सभी पक्षियों से ज्यादा ऊंचाई पर उड़ता है। उसी प्रकार बाज अपने बच्चे को भी उतनी ही ऊंचाइ पर ले जाती है।

आसमान की ऊंचाइयों पर लेकर जाकर बाज पक्षी पाने बच्चे को वहाँ से छोड़ देती है। करीब दस 10000 फीट से भी ज्यादा ऊंचाइ से वो अपने बच्चे को छोडती है और उसे धरती की तरफ गिरने देती है। धीरे धीरे बच्चा धरती की तरफ बढ़ रहा होता है उसका आँख भी नहीं खुला रहता है। 5000 फीट तक आने के बाद उस बच्चे को एहसास होता है कि वो गिर रहा है।

और नीचे आते आते वो बच्चा समझ नहीं पा रहा होता है कि उसके साथ क्या हो रहा है। और धरती की धरती गिरता रहता है। जब बच्चा एकदम से धरती पर गिरने वाला होता है उसकी माँ बाज आकर उसके अपने पंजों मे पकड़ लेती है और फिर आसमान की ऊंचाइयों की तरफ बढ़ जाती है। और पुनः अपने बच्चे को आसमान की ऊंचाइयों से छोड़ देता है।

ये क्रिया बाज तब तक अपने बच्चे के साथ दोहराता रहता है जब तक कि वो बच्चा उड़ना नहीं सीख जाता है। कोई भी पक्षी का बच्चा जिस समय घोसले मे माँ द्वारा लाये हुए खाने पर निर्भर रहता है उस उम्र मे वो बाज का बच्चा आसमान की ऊंचाइयों मे अपने पंख के द्वारा गोते लगा रहा होता है।

ये प्रसंग मैंने इस लिए बताया कि बच्चे की परवरिश से जुड़ी बहुत ही अच्छी सीख हमे देखने को मिल रही है इस प्रसंग मे। आज कल के माता पिता अपने बच्चे का बहुत ही ज्यादा ख्याल रखते है ये कहना भी अतिश्योक्ति नहीं होगा कि उनका ख्याल रखने का तरीका उनके बच्चे के विकास मे बाधक का काम भी करता है।

जिस प्रकार से वो बाज अपने बच्चे को ऊपर ले जाकर वहाँ से छोड़ देता है और पुनः जब उसे लगता है कि वो अभी उड़ने मे समर्थ नहीं है तो उसके धरती पर गिरने से पहले उसे उठा लेता है। ये चीज बहुत ही समझने वाली है कि बाज अपने बच्चे का ख्याल रख रहा है लेकिन जब उसकी आवश्यकता होती है तब ही। जब उसका बच्चा जमीन पर गिरने वाला होता है तभी उसे अपने पंजों मे पकड़ लेता है।

इसका सामान्य सा अर्थ है कि अपने बच्चों का ख्याल तो रखना हमारी नैतिक ज़िम्मेदारी तो है लेकिन उन्हे बाहर की दुनिया मे खुद आगे बढ़ने के लिए अकेला छोडना भी जरूरी है। ऐसा नहीं है कि बाज अपने बच्चे को प्रेम नहीं करता बल्कि वो अपने बच्चे को आत्मनिर्भर बना रहा है। और जब भी सच मे उसे सहायता की आवश्यकता होती है तभी उसे अपना सहयोग देता है। हमे भी अपने बच्चों को उनके पैरो पर स्वयं खड़ा होने का मौका देना चाहिए और जब कभी भी उन्हे सच मे सहयोग की आवश्यकता हो तो अपना हाथ आगे रखना चाहिए।

एक बाज पक्षी इसके अलावा भी हमे जीवन मे बहुत कुछ सिखाने का काम करता है। बाज बाकी पक्षियों से बहुत ही अलग जीवन शैली अपनाता है और पक्षियों मे सबसे चालक और तेज शिकारी के रूप मे जाना जाता है जितनी गति से ये उड़ता है उतनी ही गति से ये अपने शिकार को भी पकड़ने मे माहिर होता है।

जब बारिस के मौसम मे बारिस होती है तो सारे पक्षी आकाश मे उड़ने के बजाय कहीं आसरा दुन्ध कर उसमे छुप जाता है लेकिन एक बाज पक्षी उन बादलों से ऊपर उड़ता है जिस कारण से उस पर बारिश का कोई प्रभाव ही नहीं पड़ता है।

हमारी संस्कृति मे ऐसे बहुत से साक्ष्य मिल जाएँगे जहां हमे हर किसी प्राणी से कुछ न कुछ सीखने की बात काही जाती है आज हमने आपको बाज के द्वारा अपने बच्चों के परवरिश के बारे मे बताया इसके अलावा हमारे पहले के लेख भगवान दत्तात्रेय के 24 गुरु मे भी आप कई प्राणियों से मिलने वाली सीख के बारे मे जान सकते है।

तो दोस्तों कैसा लगा आज का हमारा लेख हमे जरूर बताए और अच्छा लगा तो दूसरों के साथ भी share करे। और जुड़े रहे हमारे पेज से और भी ऐसी रोचक लेखों को पढ़ने के लिए
धन्यवाद

इस दुनिया मे प्राणियों के तीन रूपों में विभक्त किया गया है। जलचर, थलचर और नभचर। सभी पक्षी जो उड़ने की क्षमता रखते है उन्हे नभचर माना जाता है। इन्ही पक्षियों मे से बाज को सबसे ताकतवर और बुद्धिमान पक्षी के रूप मे जाना जाता है। वो अपने बच्चे की परवरिश शुरू से ऐसे करता जिससे उसका बच्चा आगे चलकर शक्तिशाली और आत्मनिर्भर बने।

आज के इस लेख मे हम बात करेंगे कि किस प्रकार से एक बाज अपने बच्चे को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाता है। और बच्चों की परवरिश का ये तरीका हमे भी सीखने की आवश्यकता है।

एक बाज का बच्चा जब अपने अंडे से बाहर आता है तो उसकी माँ कुछ ही दिनों मे उसे उड़ना सिखाना शुरू कर देती है। होता इस प्रकार से है को वो माँ अपने बच्चे को अपने बाजुओं मे भरकर आसमान की उचाइयों मे ले जाती है, हम सभी जानते है कि एक बाज पक्षी बाकी सभी पक्षियों से ज्यादा ऊंचाई पर उड़ता है। उसी प्रकार बाज अपने बच्चे को भी उतनी ही ऊंचाइ पर ले जाती है।

आसमान की ऊंचाइयों पर लेकर जाकर बाज पक्षी पाने बच्चे को वहाँ से छोड़ देती है। करीब दस 10000 फीट से भी ज्यादा ऊंचाइ से वो अपने बच्चे को छोडती है और उसे धरती की तरफ गिरने देती है। धीरे धीरे बच्चा धरती की तरफ बढ़ रहा होता है उसका आँख भी नहीं खुला रहता है। 5000 फीट तक आने के बाद उस बच्चे को एहसास होता है कि वो गिर रहा है।

और नीचे आते आते वो बच्चा समझ नहीं पा रहा होता है कि उसके साथ क्या हो रहा है। और धरती की धरती गिरता रहता है। जब बच्चा एकदम से धरती पर गिरने वाला होता है उसकी माँ बाज आकर उसके अपने पंजों मे पकड़ लेती है और फिर आसमान की ऊंचाइयों की तरफ बढ़ जाती है। और पुनः अपने बच्चे को आसमान की ऊंचाइयों से छोड़ देता है।

ये क्रिया बाज तब तक अपने बच्चे के साथ दोहराता रहता है जब तक कि वो बच्चा उड़ना नहीं सीख जाता है। कोई भी पक्षी का बच्चा जिस समय घोसले मे माँ द्वारा लाये हुए खाने पर निर्भर रहता है उस उम्र मे वो बाज का बच्चा आसमान की ऊंचाइयों मे अपने पंख के द्वारा गोते लगा रहा होता है।

ये प्रसंग मैंने इस लिए बताया कि बच्चे की परवरिश से जुड़ी बहुत ही अच्छी सीख हमे देखने को मिल रही है इस प्रसंग मे। आज कल के माता पिता अपने बच्चे का बहुत ही ज्यादा ख्याल रखते है ये कहना भी अतिश्योक्ति नहीं होगा कि उनका ख्याल रखने का तरीका उनके बच्चे के विकास मे बाधक का काम भी करता है।

जिस प्रकार से वो बाज अपने बच्चे को ऊपर ले जाकर वहाँ से छोड़ देता है और पुनः जब उसे लगता है कि वो अभी उड़ने मे समर्थ नहीं है तो उसके धरती पर गिरने से पहले उसे उठा लेता है। ये चीज बहुत ही समझने वाली है कि बाज अपने बच्चे का ख्याल रख रहा है लेकिन जब उसकी आवश्यकता होती है तब ही। जब उसका बच्चा जमीन पर गिरने वाला होता है तभी उसे अपने पंजों मे पकड़ लेता है।

इसका सामान्य सा अर्थ है कि अपने बच्चों का ख्याल तो रखना हमारी नैतिक ज़िम्मेदारी तो है लेकिन उन्हे बाहर की दुनिया मे खुद आगे बढ़ने के लिए अकेला छोडना भी जरूरी है। ऐसा नहीं है कि बाज अपने बच्चे को प्रेम नहीं करता बल्कि वो अपने बच्चे को आत्मनिर्भर बना रहा है। और जब भी सच मे उसे सहायता की आवश्यकता होती है तभी उसे अपना सहयोग देता है। हमे भी अपने बच्चों को उनके पैरो पर स्वयं खड़ा होने का मौका देना चाहिए और जब कभी भी उन्हे सच मे सहयोग की आवश्यकता हो तो अपना हाथ आगे रखना चाहिए।

एक बाज पक्षी इसके अलावा भी हमे जीवन मे बहुत कुछ सिखाने का काम करता है। बाज बाकी पक्षियों से बहुत ही अलग जीवन शैली अपनाता है और पक्षियों मे सबसे चालक और तेज शिकारी के रूप मे जाना जाता है जितनी गति से ये उड़ता है उतनी ही गति से ये अपने शिकार को भी पकड़ने मे माहिर होता है।

जब बारिस के मौसम मे बारिस होती है तो सारे पक्षी आकाश मे उड़ने के बजाय कहीं आसरा दुन्ध कर उसमे छुप जाता है लेकिन एक बाज पक्षी उन बादलों से ऊपर उड़ता है जिस कारण से उस पर बारिश का कोई प्रभाव ही नहीं पड़ता है।

हमारी संस्कृति मे ऐसे बहुत से साक्ष्य मिल जाएँगे जहां हमे हर किसी प्राणी से कुछ न कुछ सीखने की बात काही जाती है आज हमने आपको बाज के द्वारा अपने बच्चों के परवरिश के बारे मे बताया इसके अलावा हमारे पहले के लेख भगवान दत्तात्रेय के 24 गुरु मे भी आप कई प्राणियों से मिलने वाली सीख के बारे मे जान सकते है।

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||इति शुभम्य||

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