अयोध्या दर्शनीय स्थल- रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र सम्पूर्ण दर्शन

अयोध्या नाम ही काफी है। सप्तपुरियों मे प्रथम तीर्थ स्थल उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले मे स्थित है जिसे पहले फ़ैज़ाबाद जिले के नाम से जाना जाता है। अयोध्या का नाम आते ही सभी के मन मे एक ही विचार आता है कि ये भगवान श्रीराम की जन्मस्थली है। लेकिन अयोध्या दर्शनीय स्थल के जरिये हम आपको इसका वो स्वरूप दिखने का प्रयास करेंगे जिसमे सम्पूर्ण रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र का क्रम वार दर्शन करने का प्रयास करेंगे। अयोध्या मंदिरों का शहर है। एक ऐसा शहर जो शहर होते हुए भी शहर की शोरगुल से बहुत दूर। यहाँ जो शांति का एहसास आप अनुभव करेंगे वो आपको कहीं भी प्राप्त नहीं हो सकती है। तो आइये शुरूआत करते है इस अद्भुत, शांतिपूर्ण आध्यात्मिक शहर के Virtual दर्शन की।

सर्वप्रथम सरयू स्नान- शुरुआत होगी हमारी प्रातःकाल मे सरयू स्नान से। सरयू नदी को पवित्र माना गया है और इनके दर्शन के उपरांत इसकी पवित्रता आपको दिखेगी भी। औद्योगिक कचरे का नामोनिशान नहीं स्वच्छ निर्मल जल देख कर ही मन आनंदित हो उठेगा। सरयू नदी तक जाने के लिए कहीं से भी आप ऑटो, ई रिक्शा के जरिये नयाघाट के लिए जा सकते है। नयाघाट सरयू नदी के स्नान घाट क्षेत्र के रूप मे प्रसिद्ध है। यहा हम पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ सरयू नदी मे स्नान करेंगे। और मन एवं तन को पवित्र बनाएँगे।

श्री नागेश्वर नाथ/ श्री कालेरम दर्शन- नयाघाट के पास ही राम की पैड़ी क्षेत्र मे श्री नागेश्वर नाथ प्रभु के दिव्य शिवलिंग के दर्शन हम प्राप्त कर सकते है। मान्यता है जब अयोध्या मे साँपों का प्रकोप बहुत ही अत्यधिक बढ़ गया तो स्वयं प्रभु श्री राम के पुत्र लव कुश ने नागेश्वर नाथ मंदिर की स्थापना की थी। श्री नागेश्वर नाथ मंदिर के बाल मे हम श्री कलेरम मंदिर दर्शन लाभ प्राप्त कर सकते है जहां मान्यता है कि मुगलों द्वारा जब राम जन्मभूमि को तोड़ा जाने लगा तो तत्कालीन पुजारी ने उस समय की प्रतिमा सरयू नदी मे प्रवाहित कर दी जो कई वर्षों उपरांत एक मराठी साधक को प्रपट हुई और उनकी स्थापना कालेरम प्रभु के रूप मे की गई।

श्री हनुमान गढ़ी स्थान/ श्री कनक भवन- नयाघाट सम्पूर्ण दर्शन उपरांत आप पुनः ई रिक्शा अथवा ऑटो के द्वारा हनुमान गढ़ी के लिए जा सकते है जहां आपको कई स्थलो के दर्शन पैदल यात्रा के द्वारा प्राप्त हो सकती है। हनुमान गढ़ी पवित्र स्थान की महिमा विश्व विख्यात है। एक महान दुर्ग के रूप मे स्थापित मंदिर प्रांगण श्री हनुमान जी को समर्पित है। तथा मान्यता है पूरे अयोध्या के देख रेख की ज़िम्मेदारी श्री हनुमान गढ़ी प्रभु की ही है। लगभग 60 सीढ़ियों के ऊपर स्थापित गर्भगृह और मुख्य मंदिर परिसर राम नाम से हमेशा प्रफुल्लित महसूस होता है। श्री हनुमान गढ़ी स्थान से कुछ सौ मिटर की दूरी पर श्री कनक भवन स्थान है। जिसके नाम का मूल अर्थ है सोने का महल मान्यता है कि माता सीता को मुह दिखाई के रश्म मे माता कैकेयी के द्वारा इसे उफार स्वरूप प्रदान किया गया था। श्री कनक बिहारी सरकार सरकारिणी जू की प्रतिमा बढ़ी मनमोहक है। इनकी पुरानी प्रतिमा आज भी मध्य प्रदेश के ओरछा क्षेत्र मे स्थापित है जिसकी कथा के लिए हमारा ये लेख ओरछा के राम की अद्भुत कथा- महल मे विराजमान ओरछा के राजाराम पढे। 

छोटी देवकाली/ बड़ी देवकाली- उपरोक्त के अलावा दो देवी स्थान भी हमारे अयोध्या मे बहुत प्रसिद्ध है।  हम छोटी देवकाली और बड़ी देवकाली के नाम से जानते है। छोटी देवकाली के बारे मे मान्यता है कि ये माता सीता की कुलदेवी है। और माता सीता के विवाह के पश्चात ये माता सीता के साथ अयोध्या आ गई थी। और इनका दिव्य मंदिर का निर्माण यहा किया गया है। ये स्थान नयाघाट से हनुमान गढ़ी के मध्य मे पड़ता है। बड़ी देवकली माता को भगवान श्री राम की कुल देवी के रूप मे मान्यता प्रपट है। ये अयोध्या के बाहरी क्षेत्र मे है जिसके लिए आपको ऑटो का साधन प्रयोग करना पड़ेगा।

मत्तगजेन्द्र प्रभु का स्थान- मत्तागजेन्द्र प्रभु का स्थान कनक भवन से लगभग 300 मिटर दूरी पर है। इनके बारे मे मान्यता है ये विभीषण के पुत्र है और अयोध्या क्षेत्र के कोतवाल के रूप मे विराजमान है अयोध्या मे वास करने वाला प्रत्येक नागरिक बिना इनकी इच्छा के इस क्षेत्र मे एक पल को भी नहीं निवास कर सकता है। होली के बाद पड़ने वाले प्रथम मंगलवार को यहाँ भव्य मेले का आयोजन होता है। और अयोध्या आने वाला हर व्यक्ति यहाँ अपनी उपस्थिती दर्ज अवश्य करता है।

श्री क्षीरेश्वर नाथ मंदिर- हनुमान गढ़ी से 500 मिटर दूरी पर स्थित श्री क्षीरेश्वर नाथ मंदिर बहगवान शिव को समर्पित है। तथा ये मंदिर अयोध्या के प्राचीनतम मंदिरों मे से एक है। मान्यता है इसकी स्थापना स्वयं प्रभु श्री राम के पिता महाराज दशरथ ने की थी। आज भी अयोध्या के मूल निवासियों की प्रभु क्षीरेश्वर नाथ के प्रति बहुत ही आधिक श्रद्धा है। यहाँ की शिव विवाह का आयोजन और फूल बंगले की झांकी का बहुत ही ज्यादा प्रसिद्ध है।

नंदीग्राम भरतकुंड- अयोध्या जिले के एकदम आखिरी क्षोर पर स्थित श्री भरतकुंड की आध्यात्मिक महिमा बहुत अधिक है। मान्यता है प्रभु श्री राम के वनवास के उपरांत को उनके भाई भरत जब उनके खड़ाऊँ लेकर आए तो उन्होने भी राजपाट छोडकर सन्यास धरण किया और अयोध्या के बाहरी क्षेत्र नंदीग्राम मे 14 वर्षों तक ताप साधना की और राम के आने का इंतज़ार किया आज उसे हम भरतकुंड के नाम से जानते है। यहाँ जाने के लिए आप प्राइवेट साधन को Hire करके जा सकते है।

श्री मणि पर्वत- अयोध्या तीर्थ क्षेत्र मे स्थित मणि पर्वत एक मनमोहक छोटी पहाड़ी के रूप मे स्थित दिव्य क्षेत्र है। इसके बगल मे विद्या कुंड नमक छोटा सरोवर स्थित है। ये बहुत ही आश्चर्यजनक है कि अयोध्या जैसी समतल मैदानी जमीन पर छोटी पहाड़ी स्थित है लेकिन इसको लेकर मान्यता है कि प्रभु श्री राम को जनक जी द्वारा विवाह के उफार स्वरूप बहुत सारे हीरे जवाहरात और मणियाँ उन्हे प्रदान की गई जिसे रखने हेतु इसे ढेर के रूप मे अमुक स्थान पर एकत्रित कर दिया गया और आज उसे मणि पर्वत स्थल के रूप मे मान्यता मिली। हर वर्ष झुलनोत्सव पर्व की शुरुवार मणि पर्वत पर होने वाले मेले से होती है। यहाँ प्रभु श्रीराम और माता सीता की झूला झूलती प्रतिमा विराजमान है।

अयोध्या के प्रमुख उत्सव- वैसे तो अयोध्या को सात वार तेरह त्योहार का शहर माना जाता है। लेकिन तीन प्रमुख मेले यहाँ के विश्वप्रसिद्ध है। जिनमे प्रथम चैत्र मास मे होने वाला रामनवमी का मेला जिसमे राम जन्मोत्सव बड़े ही हर्षोलास के साथ मनाया जाता है। इसके बाद श्रावण मास मे झुलनोत्सव पर्व जिसमे पूरी अयोध्या मे झूलन उत्सव मे प्रभु श्री राम और सीता के विग्रह को झुने मे झूलते हुए विभिन्न झूलन के पद गाये जाते है तथा ये पर्व अयोध्या के सभी मंदिरों मे बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। और तीसरा है कार्तिक मास का मेला जिसमे पंचकोशी और चौदह कोशी परिक्रमा और कार्तिक पुर्णिमा स्नान हेतु दूर दूर से लोग आते है।

इसके अलावा रामायण मेला और देव दीपावली का कार्यक्रम कुछ वर्षों से उत्तर प्रदेश शासन के द्वारा आयोजित किया जाता है। जिसमे रामायण मेला राम विवाह के समय मनाया जाता है जिसमे विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाते है। तथा देव दीपावली कार्यक्रम भगवान राम के लंका से अयोध्या आगमन के उपलक्ष्य मे मनाया जाता है जिसमे दीये के द्वारा अयोध्या को सजाया जाता है और वो दृश्य बहुत ही मनमोहक होता है।

सार

जैसा की हमने कहा अयोध्या मंदिरों का शहर है जहां हर तरफ मंदिर ही मंदिर स्थित है तो सभी की जानकारी देना इस लेख मे संबहव नहीं है लेकिन ऊपर वर्णित प्रमुख स्थान आपको सम्पूर्ण राम मय अयोध्या का अनुभव कराएंगी। अयोध्या आपको आध्यात्मिक शांति प्रदान कराएगी इसका अनुभव आप स्वयं करेंगे जब भी आप इस दिव्य क्षेत्र का भ्रमण करेंगे। जो शांति और संतुष्टि का अनुभव इस दिव्य क्षेत्र मे आप प्राप्त करेंगे वो काही और संभव नहीं है। तो एक बार अवश्य आप लोग इस पवन धरती का अनुभव प्राप्त करें। और आध्यात्मिक शांति का साक्षात्कार स्वयं करें।

||इति शुभम्य||

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