10 गुम होते बच्चों के खेल: पारंपरिक (Traditional) खेल

10  गुम होते बच्चों के खेल: पारंपरिक (Traditional) खेल

आज के समय में बच्चों मे खेल के प्रति अरुचि देखी जाती है। अगर खेलो की बात करे तो मोबाइल और विडियो गेम ही उनके मन में प्रथम स्थान रखता है। आज की भागा दौड़ी वाली जिंदगी में बच्चों को भी समय का अभाव है।

प्रतिस्पर्धा भरी जीवन के कारण आज कल के बच्चे अपने स्कूल और ट्यूसन से समय नहीं बचा पाते। कही न कही बच्चों के खेल के प्रति उनकी अरुचि बढ़ती जा रही है। और पारंपरिक खेल भी उनके जहां से गुम होते जा रहे है।

हम बात कर रहे है उन खेलो का जिंका किसी न किसी रूप में निर्माण बच्चों ने किया है। और कोई खास नियम इत्यादि उनपर लागू नहीं होते। इन खेलों के बारे में 90 के दशक के बच्चों मे बहुत ही लगाव था और उनके पास उतना समय भी था जिससे वो इन खेलों मे अपनी रुचि लेते थे।

तो अब हम बात करेंगे उन खेलो के बारे मे जिनके द्वारा हम पुनः पुरानी जिंदगी को देखने का प्रयास करेंगे और मन में आनंद का अनुभव करेंगे।

1. गिल्ली डंडा-

अगर पुराने खेलों मे सबसे रोमांचक खेल की बात की जाये तो गिल्ली डंडा जैसा कोई भी नहीं है। सारे उपकरणो का निर्माण बच्चों के द्वारा स्वयं किया जाता है। एक मजबूत पकड़ वाला डंडा उसके साथ नुकीले किनारों वाला गिल्ली।

दोनों का निर्माण लकड़ी से होता था। मेरे जानकारी के अनुसार खिलाड़ियों की संख्या तय नहीं होती थी। बस दो टीम बनाई जाती थी। एक टीम का खिलाड़ी एक छोटे से गड्ढे में गिल्ली रखकर उसे डंडे से उछालता है।

और दूसरी टीम के बच्चे उसे कैच करने का प्रयास करते है। उसके बाद वो गिल्ली को खिलाड़ी के पास फेंकते है। और खिलाड़ी उसे डंडे से गिल्ली को दूर भेजने के लिए मारता है। यदि वो नहीं मार पता और गिल्ली गड्ढे से डंडे की लंबाई के बराबर दूरी पर गिरता है। तो खिलाड़ी आउट। अथवा खिलाड़ी गिल्ली को डंडे के मदद से दूर भेजने का प्रयास करता है।

और डंडे के नाप के अनुसार रन लेने का प्रयास करता है। इसी प्रकार दोनों टीम खेलते है और जिसके रन अधिक होते है वो टीम जीत जाती है।

2. विष अमृत-

दूसरे प्रचलित खेल की बात करे तो उस स्थान पर नाम आएगा विष अमृत का इसमे भी खिलाड़ियों की संख्या निश्चित नहीं होती थी। एक खिलाड़ी सभी खिलाड़ियों को पकड़ने का प्रयास करता है उन्हे छूकर जब विष बोलता है तो वो अपने स्थान पर स्थिर हो जाता है।

केवल अन्य खिलाड़ी अमृत बोलकर उस खिलाड़ी को पुनः दौड़ने के लिए एक्टिव कर देते है। यदि अकेला खिलाड़ी सभी खिलाड़ियों को को विष की स्थिति में ला देता है तो वो विजयी हो जाता है। और पुनः इस खेल की शुरुवात हो जाती है।

लेकिन प्रायः इन खेलो को पूर्ण रूप से समाप्त होते देखा होगा किसी ने। खेलते खेलते समय बीत जाता था और लोग खेल को पूर्ण रूप से समाप्त किए बगैर ही खुशी खुशी अपने घर चले जाते थे।

3. आइस पाइस-

आइस पाइस को लुका छुपी, छुपम छुपाई कई नामो से भी जाना जाता है। इसमे एक खिलाड़ी आंखो को बंद करके गिनती गिनता है। और हाँ गिनती हिन्दी मे गी जाती थी वन टू थ्री नहीं बल्कि एक दो तीन इत्यादि।

जब वो गिनती गिनता है तभी अन्य खिलाड़ी अलग अलग स्थान पर छुपने का प्रयास करते है। बाद मे अकेला खिलाड़ी अन्य खिलाड़ियों को ढूँढने का प्रयास करता है और उनके मिलने पर उनका नाम लेकर आइस पाइस बोलता है।

यदि इसी के बीच कोई खिलाड़ी आइस पाइस बोलने से पूर्व धप्पा कर देता है तो पुनः उस खिलाड़ी को खेल की शुरुवात करनी पड़ती है।

4. साँप सीडी, लूडो और कैरम-

कहते है साँप सीडी के खेल का आविष्कार संत ज्ञानदेव ने किया था। आज के समय में भी उपरोक्त खेलो को देखा जा सकता है। अब तो लूडो जैसे गेम ऑनलाइन भी देखने को मिलते है।

लेकिन साथ बैठकर लाल पीला हारा और नीला रंग चुनकर साथ ये खेल खेलने में जो मजा आता था वो ऑनलाइन गेम मे नहीं। हारा हराए लाल जिताए नीला पीला घर पहुंचाए के नियम के द्वारा लाल रंग के चयन हेतु जिद करना बहुत ही मजेदार होता था।

कैरम के द्वारा भी रानी को पाने का प्रयास बहुत ही मजेदार होता था। ये खेल हमे साथ जोड़ने का प्रयास करते है। और आज भी इनको याद करके मन मे आनंद की अनुभूति होती है।

5. अंताक्षरी-

अंताक्षरी का खेल सबसे अच्छा टाइम पास का साधन था। दो टीम मिलकर इस खेल को खेलते है। और दोनों ही टीमे गाने गाकर इस खेल को खेलते है। शुरू करो अंताक्षरी लेकर प्रभु का नाम समय बिताने के लिए करना है कुछ काम, बोलने के बाद इस खेल का शुभारंभ होता है।

और पहला गाना म अक्षर से गाना होता है और गाना खत्म होने पर अंतिम अक्षर से अगले गाने की शुरुवात करनी होती है। अगर हम उस अक्षर से गाना नहीं गा पाते तो वो टीम हार जाती है। मुझे आज भी याद आता है जब ही बिजली गुल हो जाती थी लोग एक साथ बैठकर अंताक्षरी के खेल को खेलते थे। अंताक्षरी का खेल इतना प्रसिद्ध था की दूरदर्शन पर इस नाम से प्रोग्राम भी आने लगा था।

6. राजा, वजीर, चोर और सिपाही-

वजीर वजीर, जी हुजूर, इन दोनों मे से चोर का पता लगाओ। ये लाइन ही इस खेल के बारे में सबकुछ बयां करती है। इस खेल मे चार लोग होते है। चार एक समान की परचियाँ होती है जिनमे राजा वजीर चोर और सिपाही नाम लाइक जाते है और उन पर्चियों को उछाला जाता है।

हर कोई राजा की पर्ची को पाने का प्रयास करता है। राजा, वजीर की पर्ची पाये खिलाड़ी से बाकी के दो खिलाड़ियों मे से चोर को ढूँढने को बोलता है यदि वजीर सही सही बता लेता है तो उसे पूरे अंक मिलते है और यदि नहीं बता पता तो वजीर के अंक चोर को मिल जाते है।

कई चरण खेलने के बाद जिसके अंक सबसे ज्यादा होते है वो विजेता होता है। अंको का वितरण राजा को 1000 अंक वजीर को 800 अंक सिपाही को 500 अंक और चोर को 0000 अंक के आधार पर होता है।

7. लंगड़ी (Hopscotch)-

ये खेल लड़कियों का प्रमुख गेम होता था। जमीन पर 10 खाने बनाकर एक पैर पर उनमे गिट्टी का एक टुकड़ा फेंककर सभी को पार करना होता है। और जो खिलाड़ी उन सभी 10 खानो को पूरी तरह पार कर लेगा वो विजेता घोषित हो जाता है।

ये खेल विदेशो में भी बहुत प्रसिद्ध है। उसे Hopscotch के नाम से जाना जाता है। थोड़ी सी चूक के कारण यदि गिट्टी का टुकड़ा अपने खाने मे ना जाकर काही और गिरता है और यदि सभी खाने पूरे करने से पहले खिलाड़ी एक के दोनों पैर जमीन पर आ जाते है तो वो अगले खिलाड़ी की बारी आ जाती है।

8. गिट्टी फोड़ (Seven Stone)-

सात गिट्टी के टुकड़े का एक मीनार बना कर दो टीम मे रहकर गेंद के जरिये उस मीनार को एक टीम द्वारा तोड़ना और उसे पुनः टीम के सदस्यों द्वारा मीनार को पूरा करना होता है।

लेकिन इसके बीच अगली टीम अगर मीनार का निर्माण करने वाले खिलाड़ी को गेंद से मार देता है तो टीम हार जाती है और अगली टीम की बारी आ जाती है। इस खेल के द्वारा भाग दौड़ बच्चों मे शारीरिक स्फूर्ति प्रदान करता है। और साथ ही साथ उनका मनोरंजन भी करता है।

9. खो-खो, कबड्डी इत्यादि-

पारंपरिक खेलो की बात हो और खो-खो एवं कबड्डी का नाम न आए तो इस सूची को पूरा नहीं माना जा सकता है। खो-खो और कबड्डी दोनों ही खेल बच्चों के शारीरिक विकास के लिए बहुत ही आवश्यक थे।

पुराने समय में कबड्डी को लड़को का प्रमुख खेल एवं खो-खो को लड़कियों का प्रमुख खेल माना जाता है। कबड्डी में दो टीम होती है जो अपने अपने पाले मे रहती है और दूसरे टीम से आया खिलाड़ी उनको छूकर अपने पाले मे जाने का प्रयास करता है और यदि दूसरी टीम के खिलाड़ी उसे उसके पाले में जाने से रोक लेते है तो वो खिलाड़ी खेल से बाहर हो जाता है।

इस प्रकार जब किसी टीम के सारे खिलाड़ी इस खेल से बाहर हो जाते है तो अगली टीम की जीत होती है। एक नियम अति आवश्यक है दूसरे पाले मे जाने वाले खिलाड़ी की सांस नहीं टुटनी चाहिए। उसे एक सांस में ही कबड्डी कबड्डी बोले हुए दूसरे पाले मे जाकर वापस आना होता है।

खो खो की बात करे तो दो टीम के खिलाड़ी एक सीधी लाइन में एक दूसरे से विपरीत मुह करके बैठते है सात मिनट के समय में दोनों टीम का एक एक खिलाड़ी उस सीधी रेखा का चक्कर करते है और एक खिलाड़ी दूसरे खिलाड़ी को पकड़ने का प्रयास करता है। खो खो किसी बच्चे के शारीरिक पुष्टता को बदने का प्रयास करता है।

10. अनोखा क्रिकेट-

अनोखा क्रिकेट से तात्पर्य ऐसे क्रिकेट से है जिसमे कोई अंतर्राष्ट्रीय मानक न होकर लोकल नियमों का वर्चस्व होता है जहां न खिलाड़ियों की संख्या तय होती है। कम खिलाड़ी होने पर दोनों टीम के खिलाड़ी फ़िल्डिंग करते है।

पैसे जुटा कर गेंद खरीदना। ईंटों से विकेट का निर्माण करना। रूल आउट का नियम होना। अंडर आर्म गेंदबाजी करना। और ओवर की भी कोई समय सीमा नहीं होना। पार्ले जी बिस्किट को गेम पुरस्कार बना देना और बहुत सारे अपने बनाए नियम के द्वारा क्रिकेट को खेलना।

क्रिकेट अपने देश में बहुत लोकप्रिय है लेकिन पारंपरिक खेलो की सूची में इसका नाम रखने का उद्द्येश्य बस इतना है कि आज हम क्रिकेट मानको के आधार पर खेलते है। लेकिन पहले हम अपने मानक बनाकर इसे खेलते थे इसीलिए इसे इस सूची मे जगह दी गई है।

निष्कर्ष

हमने इस लेख के द्वारा 10 प्रमुख पारंपरिक खेलो के बारे में बताने का प्रयास किया है लेकिन ये सूची केवल 10 तक सीमित नहीं है। ये सूची बहुत ही बड़ी है कई ऐसे खेल है जो इस सूची मे सामील सभी खेलो के बराबर का दर्जा रखते है।

जैसे पोसम्पा, कंचे का खेल, माचिस की डिबिया का कार्ड गेम, रस्सी कूद और चैन गेम इत्यादि। ये सभी गेम बच्चो के मध्य बहुत ही प्रचलित थे। इन खेलो के द्वारा बच्चो का शारीरिक और मानसिक विकास होता था।

इस लेख का उद्द्येश्य आज के समय में बच्चों के मन में इन खेलो के प्रति चाह उजागर करना है। आज का बच्चा मोबाइल होने, विडियो गेम इत्यादि में फँसकर अपने बचपने को जिस प्रकार नष्ट कर रहा है। उससे उन्हे दूर करके अपने पारंपरिक खेलो के प्रति लगाव बढ़ाना ही इस लेख का आली उद्द्येश्य है।

!इति शुभम्!

Leave a Reply