10 प्रमुख तीर्थ स्थलों की रेल यात्रा (दिल्ली से)

10 प्रमुख तीर्थ स्थलों की रेल यात्रा (दिल्ली से)

भारतवर्ष में यात्रा के लिए प्रायः लोग ट्रेनों का प्रयोग करते है। ट्रेन का सफर शुखदायक कम खर्चीला है और इसकी पहुँच लगभग देश के हर कोने में है। भारतीय रेल हर वर्ष कुछ नयी ट्रेने तीर्थ स्थलों के लिए आरंभ करती है। और इन्हे इस प्रकार से संचालन करती है जिससे आप आसानी से प्रमुख स्टेशनों से कई सारे तीर्थ स्थलो के लिए ट्रेने प्राप्त कर सकते है।

यहा हम 10 प्रमुख तीर्थ स्थलों की रेल यात्रा के बारे जानेंगे। जो आपकी यात्रा को और भी सुलभ और आनंददायक बनाएगा। इस लेख के जरिये हम दिल्ली से 10 प्रमुख तीर्थ स्थलो की यात्रा एक बार में पूरा करने हेतु रोड मैप आपको बताएँगे। हमारा प्रयास होगा हर बार एक लेख के द्वारा कुछ प्रमुख तीर्थ स्थलो की यात्रा एक बार में कैसे पूरी की जाये।

1. दिल्ली से अयोध्या- 

अयोध्या सभी तीर्थ स्थलो में प्रमुख है। भगवान राम की जन्म स्थली सरयू नदी के किनारे बसा है यहा बहुत सारे मंदिर और देवस्थान है। दिल्ली से अयोध्या के प्रमुख ट्रेने आप सीधे अयोध्या के लिए या अयोध्या से 10 किमी. दूर फ़ैज़ाबाद स्टेशन के लिए प्राप्त कर सकते है।

जिनमे प्रमुख ट्रेनें पुरानी दिल्ली रेल्वे स्टेशन एवं नई दिल्ली रेल्वे स्टेशन से प्राप्त कर सकते है। अयोध्या दर्शन 1 से 2 दिन में पूरी की जा सकती है जिनमे प्रमुख रूप से रामजन्मभूमि, कनक भवन, हनुमान गढ़ी, सरयू नदी, श्री कालेरम मंदिर, नागेश्वर नाथ, क्षीरेश्वर नाथ, देवकली मंदिर, नंदीग्राम इत्यादि प्रमुख दर्शनीय स्थल है।

2. अयोध्या से वाराणसी-

अयोध्या से वाराणसी 290-300 किमी. की दूरी पर है। अयोध्या से कई ट्रेने वाराणसी के लिए उपलब्ध है। 2 दिन की यात्रा के उपरांत अयोध्या एवं फ़ैज़ाबाद स्टेशन से वाराणसी के लिए ट्रेन ली जा सकती है। वाराणसी का भ्रमण भी 1 से 2 दिन में पूरी की जा सकती है।

जिसमे प्रमुख रूप से काशी विश्वनाथ मंदिर, गंगा घाट, सारनाथ, BHU इत्यादि स्थलों का भ्रमण कर सकते है। वाराणसी भ्रमण हेतु हमारे लेख ( काशी, वाराणसी, बनारस ) से अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते है। यदि आप अधिक दिन रुक सकते है तो वाराणसी से विंध्याचल की भी यात्रा की जा सकती है और पुनः वाराणसी से आगे की यात्रा की जा सकती है।

3. वाराणसी से उज्जैन-

वाराणसी की यात्रा के उपरांत हम नई ट्रेन काशी महाकाल एक्सप्रेस से उज्जैन की सीधी यात्रा कर सकते है। या फिर वाराणसी एवं वाराणसी से 15 किमी. दूरी पर स्थित दीनदायल उपाध्याय स्टेशन से बहुत सारी ट्रेने भोपाल अथवा इंदौर स्टेशन के लिए ले सकते है। इन स्टेशनों से उज्जैन के लिए बहुत सारे साधन मिल सकते है।

उज्जैन की यात्रा 1 दिन में जिनमे की जा सकती है। जिनमे प्रमुख स्थल महाकाल मंदिर, कालभैरव मंदिर, हरसिद्धि माता मंदिर, क्षिप्रा घाट इत्यादि आते है। अगर 2 से 3 दिन का प्रवास किया जाये तो उज्जैन से लगभग 140 किमी. दूर ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के भी दर्शन किए जा सकते है।

4. उज्जैन से मथुरा-

उज्जैन दर्शन उपरांत हम भोपाल स्टेशन पुनः आकर ( उज्जैन से हर समय भोपाल के लिए साधन उपलब्ध है ) वह से मथुरा के लिए ट्रेन ले सकते है। मथुरा मे 2 से 3 दिन का भ्रमण पूरा किया जा सकता है।

जिसमे प्रसिद्ध कृष्ण जन्म स्थान, राधाकृष्ण मंदिर, वृन्दावन प्रेम मंदिर, बरसाना, प्रेम मंदिर, द्वारकाधीश मंदिर, गोवर्धन मंदिर इत्यादि का भ्रमण किया जा सकता है। इनके अलावा यमुना घाट मथुरा के पेड़े और अन्य खाने पीने की चीजों का भी अनुभव लिया जा सकता है। लगभग 3 दिन की यात्रा के उपरांत यहा से यात्रा को आगे बड़ाया जा सकता है।

5. मथुरा से तिरुपति देवस्थान बालाजी-

मथुरा स्टेशन से कई ट्रेने तिरुपति बालाजी के लिए मिल जाती है। तिरुपति देव स्थानम में कई जगहे दर्शन योग्य है। पहाड़ी पर स्थित तिरुमला देवस्थानम के दर्शन सबसे प्रमुख है वह का लड्डू प्रसादम बहुत ही प्रसिद्ध है।

देवस्थानम के अलावा आकाशगंगा तीर्थम, शिलातोरणम,  कपिला तीर्थम झरना, स्वामी पुष्कर्णी झील, कपिलेश्वर स्वामी मंदिर, राष्ट्रीय उद्यान इत्यादि बहुत ही सारे रमणीय स्थल है। तिरुपति अपने प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी बहुत ही प्रसिद्ध है। इन स्थानो का दर्शन 2 से 3 दिन में पूरा किया जा सकता है। उसके उपरांत यात्रा आगे बड़ाई जा सकती है।

6. तिरुपति से काँचीपुरम-

तिरुपति से काँचीपुरम लगभग 110 किमी. की दूरी पर है। दक्षिण भारत में काँचीपुरम बहुत ही प्रमुख तीर्थ स्थलो में है। प्राचीन धार्मिक ग्रंथो के अनुसार भी काँचीपुरम का नाम सप्तपुरियों में से एक है। तिरुपति से कई ट्रेने काँचीपुरम के लिए उपलब्ध है।

साथ ही बस की सुविधा भी उपलब्ध है। काँचीपुरम मे 2 से 3 दिन के प्रवास में कामाक्षी अम्मा मंदिर, पेरूमल मंदिर, कांची कामकोठी पीठ, कैलाश मंदिर इत्यादि के साथ कई प्रमुख देव स्थानो के दर्शन किए जा सकते है।

7. काँचीपुरम से मदुरै-

काँचीपुरम से लगभग 450 किमी. की दूरी पर मदुरै भी एक प्रमुख देवस्थान है। काँचीपुरम से बहुत सारे ट्रेन एवं बस सुविधा उपलब्ध है। मदुरै का प्रमुख मीनाक्षी अम्मा मंदिर सबसे प्रमुख देवस्थान है।

इसके अलावा तिरुमल्लई नयक्कर महल, कूडाल अजगर मंदिर, मुरूगन मंदिर इत्यादि के साथ गांधी संग्रहालय, समानर पहाड़ी जैसे कई रमणीय स्थल देखने योग्य है। दक्षिण भारत के लगभग सभी तीर्थ स्थल प्राकृतिक रूप से बहुत ही सुंदर और मनमोहक है।

8. मदुरै से रामेश्वरम-

मदुरै से 3 से 4 घंटे के सफर में ट्रेन एवं बस के द्वारा रामेश्वरम पहुंचा जा सकता है। 2 दिन के प्रवास से हम रामेश्वरम की यात्रा पूरी कर सकते है। नाम से ही जान सकते है कि यहा का सबसे प्रमुख दर्शनीय स्थल श्री रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग है।

इसके अलावा अग्नि तीर्थम, पंचमुखी हनुमान मदिर, धनुषकोडी, रामनाथ मंदिर जैसे कई प्रमुख तीर्थ स्थल दर्शनीय है। अगर प्रवास का समय बढ़ाया जाये तो रामेश्वरम के आस पास बहुत सारे रमणीय स्थल देखने योग्य है।

9. रामेश्वरम से भीमाशंकर, शिर्डी, शनिधाम सिगना-

रामेश्वरम यात्रा के उपरांत यहा से बहुत सारी ट्रेने पुणे शकर के लिए मिलती है। पुणे शहर से लगभग 180 किमी. दूरी पर श्री भीमाशंकर महादेव मंदिर है। जिसकी गणना 12 ज्योतिर्लिंगों में होती है, वह के दर्शन क्या जा सकता है।

भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग दर्शन के उपरांत वह से 175 किमी. के दूरी पर शिर्डी साई बाबा के स्थान के दर्शन किया जा सकता है। यहा से ही कुछ दूरी पर जिसके लिए टॅक्सी इत्यादि के जरिये श्री शनि सिगना धाम के दर्शन भी बहुत ही उत्तम होगा। इन तीनों प्रमुख स्थलो के दर्शन हेतु 2-3 दिन का प्रवास किया जा सकता है।

10. शिर्डी से नासिक-

शिर्डी से लगभग 90 किमी. की दूरी पर नासिक की यात्रा बहुत ही महत्वपूर्ण है। नासिक का वर्णन पौराणिक धार्मिक ग्रन्थों में मिलती है। इन ग्रन्थों के अनुसार चार कुम्भ क्षेत्रों में से नासिक का नाम भी आता है। गोदावरि नदी के तट पर कुम्भ मेले का आयोजन प्रत्येक चार वर्षो में बड़े ही धूम धाम से मनाया जाता है।

श्री पंचवटी धाम, कालाराम मंदिर, मुक्तिधाम, रामकुंड इत्यादि प्रमुख दर्शनीय स्थल यहा पर प्रसिद्ध है। इसके अलावा झरने और यहा का प्राकृतिक सौन्दर्य देखने लायक है। और यहा से कई ट्रेन उपलब्ध है पुनः दिल्ली और कई प्रमुख शहरों के लिए।

निष्कर्ष

सनातन धर्म में 33 करोड़ देवी देवताओं की मान्यता है। तथा भारतवर्ष में तीर्थ स्थल बहुत ही ज्यादा संख्या में है। और देश के चारो दिशाओं में कोई न कोई प्रमुख तीर्थ स्थल उपलब्ध है। इस तीर्थ यात्रा वर्णन के जरिये हमने सप्तपुरियों में 5 पुरियों ( अयोध्या, मथुरा, काशी, कांचीपुरम एवं उज्जैन ) 5 ज्योतिर्लिंग ( विश्वनाथ, महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर, रामेश्वर एवं भीमशंकर ) के साथ कई प्रमुख तीर्थ स्थलो का विवरण दिया है। यह क्रम कई चरणों में चलता रहेगा। और हमारा प्रयास रहेगा की हर बार हम एक तीर्थ यात्रा का वर्णन करे जिससे हम कई प्रमुख तीर्थ स्थलों का दर्शन कर सके।

!इति शुभम्!

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